बागेश्वर। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गरुड़ क्षेत्र स्थित भिलकोट गांव के आकाश किरोला ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इसे सच कर दिखाया है। गंभीर पीलिया, पढ़ाई में आई बाधाओं और NEET परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के बाद आकाश ने एमबीबीएस में प्रवेश हासिल किया है। वह अपने गांव और किरोला परिवार के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं।
आकाश को पिथौरागढ़ स्थित लेट जगजीवन राम राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिली है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं।
2025 में गंभीर पीलिया ने रोक दी थी पढ़ाई
आकाश के लिए डॉक्टर बनने का सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2024 में उन्होंने पहली बार NEET परीक्षा दी थी और 604 अंक हासिल किए थे। हालांकि, परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद के बीच उन्हें मनचाही मेडिकल सीट नहीं मिल सकी।
इसके बाद वर्ष 2025 में उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। आकाश गंभीर पीलिया की चपेट में आ गए और उन्हें करीब तीन से चार महीने तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। बीमारी के कारण उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित हुई।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से उबरने के बाद उन्होंने दोबारा अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया और डॉक्टर बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहे।
NEET में हासिल किए 640 अंक, दोबारा परीक्षा में मिले 530 अंक
आकाश ने वर्ष 2026 में फिर NEET परीक्षा में हिस्सा लिया और 640 अंक हासिल किए। मूल रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद दोबारा आयोजित परीक्षा में उन्होंने 530 अंक प्राप्त किए। इन्हीं अंकों के आधार पर उन्हें एमबीबीएस में प्रवेश मिला।
आकाश की ऑल इंडिया रैंक 56,271 और सामान्य वर्ग की रैंक 19,135 रही। लगातार चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्य के प्रति उनका समर्पण इस सफलता की प्रमुख वजह रहा।
पिता सेना में रहे हवलदार, मां ने शिक्षा के लिए किया संघर्ष
आकाश की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है। उनके पिता राजेंद्र सिंह भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आर्थिक कठिनाइयों के कारण राजेंद्र सिंह कम उम्र में ही सेना में भर्ती हो गए थे।
वहीं, उनकी मां कौशल्या देवी ने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए सामाजिक विरोध के बावजूद प्रयास जारी रखे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें गांव से बाहर रखकर शिक्षा दिलाई गई।
पिता की सैन्य सेवा के कारण आकाश की पढ़ाई देश के अलग-अलग शहरों में हुई। उन्होंने कानपुर, बीकानेर और बरेली के आर्मी पब्लिक स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की।
हाईस्कूल में 94 और इंटरमीडिएट में 93.8 प्रतिशत अंक
आकाश पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने बरेली स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल की परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद जीव विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की परीक्षा में 93.8 प्रतिशत अंक हासिल किए।
उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां और लगातार मेहनत के प्रति प्रतिबद्धता अब उन्हें मेडिकल की पढ़ाई तक ले आई है।
गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणा
भिलकोट गांव के आकाश किरोला की उपलब्धि केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। गंभीर बीमारी और परीक्षा संबंधी चुनौतियों के बावजूद एमबीबीएस में प्रवेश हासिल कर उन्होंने दिखाया है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास किया जा सकता है।
अब आकाश मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उनकी सफलता से गांव और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी।

