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हां, रिया के दोषी या निर्दोष का फैसला अदालत करेगी, पर मीडिया नहीं होता तो सुशांत केस कोर्ट तक पहुंचता ही नहीं

उज्जवल दुनिया

आज रियाचक्रवर्ती के प्रति खास वर्ग का प्यार सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही छलक उठा है। कुछ लोगों को शर्म आ रही है तो कुछ नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं। वे रिया के पक्ष में जमकर अपनी कुंठित भड़ास निकाल रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा जा रहा है। उन्हें रिया और उसके परिवार के साथ ही मुंबई पुलिस, शिवसेना के बदजुबान सांसद संजय राउत, महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख सभी अच्छे लगने लगे हैं। बहादुर कंगना रनौत को मिल रही धमकियां भी उन्हें पसंद आ रही हैं, लेकिन उन्हें सुशांत सिंह राजपूत और उनके परिवार का पक्ष नहीं दिखता।

हां, यह सच है कि रिया दोषी है या निर्दोष यह अदालत ही तय करेगी। लेकिन, उससे भी बड़ा सच यह है कि मीडिया ने अपनी भूमिका नहीं निभाई होती तो आज कोर्ट भी अपना कर्तव्य निभाने की स्थिति में नहीं होता, क्योंकि यह केस अदालत तक पहुंचता ही नहीं। मुंबई पुलिस अभी पूछताछ ही कर रही होती। कोई केस दर्ज ही नहीं होता। मुंबई के बिके हुए डॉक्टरों की अधूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तरह मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह भी अपनी रिपोर्ट सौंप चुके होते। साथ ही शिवसेना-कांग्रेस की उद्धव ठाकरे सरकार के दबाव में मुंबई पुलिस आत्महत्या के मामले का केस दर्ज कर फाइल बंद करने की तैयारी में होती। परिस्थितियां तो कुछ ऐसी ही कहानी सुना रही हैं।

कुछेक हाउसेस को छोड़कर मीडिया का एक बड़ा वर्ग सुशांत और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत है। अर्णब गोस्वामी और कंगना रनौत सहित उस पूरे तबके को साधुवाद। क्योंकि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले को यहां तक पहुंचाया। नहीं तो शिवसेना कांग्रेस सरकार के दबाव में सुशांत केस को भी दिव्या भारती सहित फिल्म इंडस्ट्री की अन्य हस्तियों की मौतों की तरह आत्महत्या बताकर मुंबई पुलिस दफन कर चुकी होती। जांच चल रही है। सुशांत और दिशा सालियान की मौत का सच देश के सामने आएगा, लेकिन आखिर ऐसा क्या है जिसे मुंबई पुलिस छुपाने का प्रयास कर रही है? शिवसेना सांसद संजयराउत आखिर क्यों इतना बौखलाए हुए हैं? महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख कंगना को धमकी क्यों दे रहे हैं? सुशांत की संदिग्ध स्थिति में मौत के 40 दिनों बाद पटना (बिहार) में केस क्यों दर्ज कराना पड़ा। जांच के लिए मुंबई गई बिहार पुलिस के साथ काॅपरेट क्यों नहीं किया गया? आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी क्यों क्वॉरेंटाइन किया गया? और अब सच जानने की कोशिश कर रहे मीडिया पर निशाना साधा जा रहा है। यह सब इसलिए क्योंकि भय राज खुलने का है।

हालांकि आजतक के राजदीप सरदेसाई ने अपने चाॅकलेटी सवालों से रिया चक्रवर्ती के लिए काफी सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया , लेकिन उन्हें और उनके चैनल को उल्टा पड़ गया। टीआरपी गिर गई। कारण है, परिस्थिति जन्य साक्ष्य का रिया के पक्ष में नहीं दिखना। मुट्ठीभर को छोड़कर देश के करोड़ों लोग सुशांत सिंह राजपूत की मौत को आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं। और उनका कहना है कि डरते वो हैं जिसे पकड़े जाने का खौफ होता है।

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