सरना धर्मकोड नहीं मिला तो वोट नहीं देगा आदिवासी समाज

उज्ज्वल दुनिया/रांची: जनगणना 2021 में सरना धर्म कोड को शामिल करने की मांग को लेकर आज सरना धर्मावलंबियों द्वारा राज्यभर में रैली-प्रदर्शन कर रहे है। राजधानी रांची में भी सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा और डॉ. करमा उरांव के नेतृत्व में मंगलवार को अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं अन्य आदिवासी संगठनों के द्वारा राजधानी रांची में मानव श्रृंखला बनाई गई और रैली निकाली गई।

आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि भारत के जनगणना प्रपत्र में हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सब के लिए अलग-अलग कोलम है मगर भारत में काफी संख्या में रहने वाले आदिवासी धर्मावलंबियों के लिए कोई कोलम नहीं है जिससे आदिवासियों की कोई अलग पहचान नहीं बन पाती है ।

इधर, आदिवासी संगठनों की ओर से रैली भी निकाली गयी पिस्का मोड़ से रैली निकाला गया। रैली रातू रोड, हरमू रोड व कचहरी चौक होती हुई मोरहाबादी मैदान पहुंचकर सभा में तब्दील हो गयी। राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत मेन रोड सर्जना चौक से राजभवन तक मानव शृंखला बनायी गई है। दोपहर 2.30 बजे राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

इससे पहले सुबह आदिवासी समाज के लोगों ने अल्बर्ट एक्का चौक पर मानव श्रृंखला भी बनाया। इस दौरान अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की जिलाध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी धर्मकोड की मांग लेकर हम आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमलोगों की पिछले 40 साल से मांग है कि हमारी अलग से जनगणना हो। जैसे हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई की होती है, वैसे ही प्रकृति पूजा करने वालों के लिए अलग धर्मकोड बने। हमलोगों की जनगणना अलग से नहीं होती है जिससे कुछ हिंदु में चले जाते हैं तो कुछ ईसाई में चले जाते हैं। इसलिए हम इस बार आंदोलन कर रहे हैं। आज राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के माध्यम से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर जनगणना से पहले अलग धर्मकोड नहीं मिला तो पूरा आदिवासी समाज वोट नहीं देगा।

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