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संगीत शिक्षकों को हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगायी जाए : बाबूलाल मरांडी

रांची ( हि.स.) भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधन सचिव को लिखे पत्र में कहा कि 10-15 वर्षों से नियुक्त संगीत शिक्षकों को हटाने की प्रक्रिया पर अविलम्ब रोक लगाई जाय । साथ ही प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद एवं प्राचीन कला केन्द्र, चंडीगढ़ द्वारा प्रदत्त डिग्री की मान्यता को बरकरार रखने संबंधी आदेश दिया जाय। 
 

मरांडी ने रविवार को विभाग के प्रधान सचिव को लिखे पत्र में बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा प्रयाग संगीत समिति एवं प्राचीन कला केन्द्र चण्डीगढ़ द्वारा प्रदत्त डिग्रीधारी स्थायी शिक्षकों को सेवा से मुक्त करने एवं इन दोनों संस्थानों द्वारा प्रदत्त डिग्री की मान्यता को रद्द करने के सम्बन्ध में आदेश जारी किया गया है। 
 

उन्होंने बताया कि राज्य के निर्माण के बाद वर्ष 2005 में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में उक्त दोनों संस्थानों से प्राप्त डिग्रीधारी भाग लिए थे एवं परीक्षा में सफलता के उपरान्त शिक्षा विभाग द्वारा जाँचोपरान्त उक्त दोनों संस्थानों से पास डिग्रीधारी अभ्यर्थियों की नियुक्ति निदेशालय स्तर पर की गई थी, जो पिछले 15 वर्षों से कार्यरत है। पुनः वर्ष 2014 एवं 2016 में भी सरकार द्वारा संगीत शिक्षकों की बहाली हुई जिसमें उक्त दोनों संस्थानों से उत्तीर्ण डिग्रीधारी अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई है एवं स्थायी शिक्षक के तौर पर राज्य के विभिन्न विद्यालयों में अपनी अटूट सेवा दे रहे हैं। 

लेकिन 28मई को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में संगीत शिक्षक नियुक्ति के लिए प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद एवं प्राचीन कला केन्द्र, चंडीगढ़ द्वारा प्रदत्त डिग्री की मान्यता नहीं देने का आदेश सभी उपायुक्त एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि निदेशालय द्वारा आदेश पत्र में लिखा गया है कि प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद एवं संगीत कला केन्द्र, चंडीगढ़ का नाम केन्द्र, राज्य अथवा यूजीसी के वेबसाइट पर मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में दर्ज नहीं है। निदेशालय द्वारा यह आदेश जारी किया गया है कि उक्त दोनों संस्थानों की डिग्री के आधार पर जिन जिलों में गलत नियुक्ति हुई है, उन्हें शीघ्र कार्यमुक्त किया जाय।
 

मरांडी ने कहा कि निदेशालय द्वारा जारी आदेश के आलोक में कई जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा उन जिलों में कार्यरत संगीत शिक्षकों को 15 दिनों का नोटिस देकर सेवामुक्त करने की कार्रवाई की जा रही है। गिरिडीह जिले में तीन संगीत शिक्षकों को सेवा से मुक्त भी कर दिया गया है और कई जिलों में ऐसा करने की कार्रवाई की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि विगत 10-15 वर्षों से राज्य के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत संगीत शिक्षक अपनी अटूट सेवा दे रहे हैं और अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। जल्दबाजी में ऐसा आदेश जारी कर नौकरी से हटाने की कार्रवाई करना नैसर्गिक न्याय के प्रतिकुल होगा। उन्होंने कहा कि जब निदेशालय द्वारा इन संगीत शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी तब क्या निदेशालय द्वारा उक्त कथित संस्थानों द्वारा प्रदत्त डिग्री की मान्यता की जाँच हुई थी या नहीं ? उन्होंने कहा कि यदि विभाग द्वारा उक्त दोनों संस्थानों की मान्यता के विषय में कोई निर्देश जारी करती है तो यह आदेश तत्काल प्रभाव से (आदेश जारी करने की तिथि से) लागू होना चाहिए एवं पिछले कई वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के मामले में यह आदेश प्रभावी नहीं माना जाना चाहिए। 

खासकर सभी विभागों द्वारा जारी नए आदेश होने की तिथि से लागू होता है। निदेशालय द्वारा इस मामले में एकतरफा निर्णय बहुत ही गलत है। 

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