राज्यसभा के उप

विधेयक पारित होने के विरोध में विपक्षी दलों के 12 सांसद सदन में ही धरने पर बैठे

नई दिल्ली । संसद में मानसूत्र के सातवें दिन आज रविवार को विपक्ष के हंगामे के बीच कृषि संबंधी दो विधेयक राज्यसभा से पास हो गए। दोनों विधेयक ‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020’ तथा ‘कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020’ उच्च सदन में ध्वनिमत से पास हुए। इसे लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और उप-सभापति हरिवंश पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। यहीं नहीं विपक्षी दलों के 12 सांसद सदन में ही धरने पर बैठ गए हैं।

दरअसल, कृषि विधेयकों पर चर्चा के बाद जब कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जवाब दे रहे थे तो विपक्षी दलों के सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। इसी दौरान उपसभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही को निर्धारित समय दोपहर एक बजे के बाद भी चलाने का फैसला किया जिसके बाद विपक्ष के तमाम विरोधों के बावजूद दोनों विधेयक पारित हो गए। इसी बात को लेकर विपक्षी सांसद उपसभापति पर पक्षपात करने तथा सदन के सारे नियम तोड़ने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आये। इतना ही नहीं विपक्षी दलों के 12 सांसद सदन में ही धरने पर बैठ गए हैं।

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस सांसद अहमद पटेल ने कहा कि आज का यह दिन इतिहास में ‘काले दिन’ के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ये बिल पारित किए गए हैं, वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ और लोकतंत्र की हत्या के रूप में जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के उपसभापति के फैसलों को लेकर ही 12 विपक्षी दल उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश को लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए लेकिन वो खुद सदन के नियमों को तोड़ते हैं। आज के उनके रवैये ने लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाया है। उनके इस पक्षपातपूर्ण व्यवहार ने ही विपक्ष को ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाने की दहलीज पर खड़ा किया है।

तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि आज जो हुआ वह लोकतंत्र की हत्या है। विपक्ष के विरोध को साइडलाइन करने के साथ आम लोगों तक हमारा विरोध न पहुंचे, इसलिए राज्यसभा टीवी की फीड तक काट दी गई। सदन के नियमों को ताख पर रखकर विधेयकों पास कराए जा रहे हैं, यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ की बात है।

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