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किसी भी चुनौती से निपटने के लिए नौसेना पर पूरा भरोसा : राजनाथ

रक्षामंत्री ने किया दिल्ली में नौसेना कमांडरों के सम्मेलन का उद्घाटन

 ​पूर्वी लद्दाख में तनाव को लेकर नौसेना के कमांडरों का सम्मेलन काफी अहम 

नई दिल्ली (हि.स.)। चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में तनाव बरकरार रहने के बीच बुधवार से दिल्ली में शुरू हुए नौसेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन में हिन्द महासागर में चीनी नौसेना के मंसूबों पर पानी फेरने और भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। तीन दिन तक चलने वाले सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मुझे अपने जहाजों और विमानों को तैनात करने में सक्रिय प्रतिक्रिया के माध्यम से किसी भी चुनौती को पूरा करने के लिए नौसेना की तैयारियों पर पूरा भरोसा है।

रक्षामंत्री ने कोविड महामारी के दौरान अब तक के सबसे बड़े निकासी अभियान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ का संचालन करने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना करते हुए कहा कि हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थित पड़ोसी देशों के लगभग 4000 लोगों को घर लाने में नौसेना का महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर नौसेना के जहाजों और विमानों को तैनात करके समुद्री हितों की रक्षा के लिए मिशन आधारित तैनाती को प्रभावी ढंग से किया है। इन तैनाती ने समुद्री डोमेन में जागरुकता बढ़ाने में मदद करने के साथ-साथ तेजी से मानवीय सहायता और राहत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना स्वदेशीकरण प्रक्रिया में भी सबसे आगे रही है। अब यह महत्वपूर्ण है कि हम उन सफलताओं के साथ तालमेल बनाए रखें जो अब तक हासिल की गई हैं। हाल ही में शुरू किया गया नेवल इनोवेशन इंडिजेनलाइजेशन ऑर्गनाइजेशन एक ऐसा ही कदम है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इसके अलावा ‘मिशन सागर’ के तहत दक्षिण पश्चिम हिन्द महासागर क्षेत्र (मालदीव, मॉरीशस, कोमोरोस, सेशेल्स और मेडागास्कर) के देशों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कोविड-19 के प्रबंधन में नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए संगरोध सुविधाओं की स्थापना में सभी नौसेना कमांडों के प्रयासों की भी सराहना की। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर नौसेना के जहाजों और विमानों को तैनात करके समुद्री हितों की रक्षा के लिए मिशन आधारित तैनाती को प्रभावी ढंग से किया है। जून 2017 में मिशन आधारित तैनाती की शुरुआत के बाद से समुद्री जागरुकता को बढ़ाया है, जिससे हिन्द महासागर क्षेत्र के नागरिकों को मानवीय सहायता और आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय को सुरक्षा प्रदान की गई है।

रक्षा मंत्री को नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कोविड-19 महामारी से लड़ने में भारतीय नौसेना द्वारा किए गए नवाचारों पर जानकारी दी गई। इनमें नौसेना द्वारा विकसित किए गए विभिन्न उपकरण शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रभावी रूप से उपयोग किया जा रहा है। नौसेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में संयुक्त योजना ढांचे, तीनों सेवाओं में तालमेल और ऑपरेशनल तैयारियां बढ़ाने के उपायों के साथ-साथ कुशलता बढ़ाने के लिए नौसेना में कार्य संबंधी पुनर्गठन पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि ​हिन्द महासागर में चीन और पाकिस्तान समेत सभी संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर सम्मेलन में विस्तार से विचार किया जाएगा।

तीन दिन तक चलने ​वाला यह सम्मेलन ​​चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में बरकरार तनाव को लेकर काफी अहम ​माना जा रहा है। नौसेना पहले से ही ​हिन्द महासागर में ऑपरेशनल अलर्ट पर है। नौसेना के जंगी जहाज, सर्विलांस और एयरक्राफ्ट कैरियर्स पूरी तरह से मुस्तैद हैं। साथ ही लद्दाख सेक्टर में भी ​भारतीय नौसेना की मौजूदगी है। ​सीमा पर जरा से हालात और खराब हुए तो नेवी पूरी ताकत के साथ दुश्‍मन को समुद्र में तहस-नहस के लिए पूरी तरह तैयार है। नौसेना के खास पोसाइडन-8​आई एयरक्राफ्ट का ​इस्तेमाल वहां सर्विलांस के लिए हो रहा है। ​​​ 

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