हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत भेदभाव से जोड़कर वाल्मीकि और अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया है।
खड़गे की सभा के बाद शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हुई, जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। इसके कुछ दिनों बाद मैदान में हवन-यज्ञ और कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान गंगाजल का छिड़काव किए जाने की बात सामने आई।
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को खड़गे की दलित पहचान से जोड़ते हुए बीजेपी और RSS की कथित मानसिकता पर सवाल उठाए। वहीं, बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि रैली के बाद मैदान में गंदगी थी और धार्मिक स्थल पर कथित आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे, जिसके बाद धार्मिक अनुष्ठान किया गया।
राहुल गांधी ने की थी FIR की मांग
राहुल गांधी ने 29 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हल्द्वानी की घटना पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को छुआछूत से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की मांग की थी।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी और RSS की कथित मानसिकता दलितों को आगे बढ़ते और सम्मान के साथ जीवन जीते नहीं देखना चाहती। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले में राहुल गांधी के रुख का समर्थन किया था।
अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत अमित कुमार ने दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता हल्द्वानी के जवाहर नगर निवासी और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े बताए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह कथित धार्मिक अनुष्ठान और सफाई अभियान के दौरान मौके पर मौजूद थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्यक्रम में शामिल लोगों को छुआछूत और दलित विरोध से जोड़कर पेश किया। शिकायतकर्ता ने खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित बताते हुए कहा कि कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ दलित समाज के लोग भी शामिल थे।
‘मैं खुद दलित हूं, हमने कुछ गलत नहीं किया’
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े विनोद आर्य ने कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम का बचाव किया है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थल की साफ-सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित करना सनातन परंपरा के अनुयायियों का अधिकार और जिम्मेदारी है।
आर्य ने खुद को दलित बताते हुए दावा किया कि कार्यक्रम में उनके अलावा दलित समुदाय के अन्य लोग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से कोई गलत काम नहीं किया गया।
कांग्रेस ने पूछा- पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर शिकायत थी तो इतने दिनों तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
धस्माना का कहना है कि कांग्रेस और अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों ने घटना पर पहले ही आपत्ति जताई थी। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी के खिलाफ FIR करने के बजाय पहले उन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया था।
ओवैसी ने भी सरकार को घेरा
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हल्द्वानी विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और कानून से जुड़ा है।
ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान छुआछूत को प्रतिबंधित करता है। ऐसे में 2026 में इस तरह की घटना सामने आना गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद
हल्द्वानी में शुरू हुआ यह विवाद अब कांग्रेस, बीजेपी, RSS और विभिन्न दलित संगठनों के बीच राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक ओर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही है, वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि धार्मिक कार्यक्रम को जातिवाद से जोड़कर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। मामले में अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है।

