तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित ईरान के लारक द्वीप पर हवाई हमला किया है। जुलाई के अंत के बाद ईरानी क्षेत्र में यह अमेरिका का पहला ज्ञात हमला बताया जा रहा है।
दो रॉकेट लॉन्चरों को बनाया निशाना
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुछ सैनिकों को होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने में सक्षम रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा गया था।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई संभावित समुद्री खतरे को रोकने के लिए की गई।
ईरान ने किया जवाबी हमला
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की ओर से जॉर्डन और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गईं।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है दुनिया की नजर?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक बाजार तक बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।
ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है।
तेल की कीमतों में 1% से ज्यादा तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ती है या तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू होते हैं।

