नई दिल्ली, 30 अगस्त (आरएनएस)। पिछले सप्ताह वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने प्रस्तावित सिक्योरिटीज मार्केट कोड विधेयक, 2025 पर अपनी 36वीं रिपोर्ट जारी की। इस प्रस्तावित कोड का उद्देश्य भारत के सिक्योरिटीज मार्केट को नियंत्रित करने वाले तीन प्रमुख मौजूदा कानूनों की जगह एक एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार करना है। हालांकि समिति की रिपोर्ट मुख्य रूप से भारत के सिक्योरिटीज कानूनों में सुधारों पर केंद्रित है, लेकिन इसकी एक सिफारिश वर्चुअल डिजिटल एसेट्स क्षेत्र के लिए अलग से ध्यान आकर्षित करती है। समिति ने सुझाव दिया है कि जब तक इस क्षेत्र के लिए एक अलग और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक एक तय नियामक की निगरानी में स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) स्थापित किया जाना चाहिए। यह सिफारिश समिति द्वारा सामूहिक निवेश योजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आई। समिति ने एक अहम सवाल उठाया कि क्या निवेश योजना की परिभाषा वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी लागू हो सकती है।
आज पारंपरिक सिक्योरिटीज, जैसे किसी कंपनी के शेयर या बॉन्ड, को डिजिटल टोकन के रूप में भी पेश किया जा सकता है। इन टोकनों में निवेश से जुड़ी व्यवस्थाएं कई मामलों में पारंपरिक निवेश योजनाओं जैसी हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, इनमें कई निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया जा सकता है। हालांकि, टोकन के रूप में मौजूद संपत्तियों या वितरित लेखा तकनीक (डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी) के जरिए चलने वाली ऐसी निवेश व्यवस्थाओं की कानूनी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं रही है। समिति ने इसी अस्पष्टता को दूर करने की जरूरत पर ध्यान दिया है। समिति की सिफारिश इस बात की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है कि भारत का वर्चुअल डिजिटल एसेट्स क्षेत्र अब उस स्तर पर पहुंच रहा है, जहां संस्थागत शासन-व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है।
क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स पर सरकार का फोकस बढ़ा, संसदीय समिति ने दिए नए नियमन के संकेत
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