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यूपी में JPNIC को निजी हाथों में सौंपने पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव और बीजेपी आमने-सामने

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लीज पर देने या निजी हाथों में सौंपने की चर्चा ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) आमने-सामने हैं। दोनों दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने JPNIC को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुरानी संस्थाओं और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने तथा उनका व्यावसायीकरण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अखिलेश यादव का कहना है कि सार्वजनिक महत्व की संपत्तियों और संस्थानों को बचाने के बजाय उन्हें व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए देने की कोशिश की जा रही है। सपा इस मुद्दे को सरकार की नीतियों से जोड़कर लगातार सवाल उठा रही है।

ब्रजेश पाठक ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

अखिलेश यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया है। उन्होंने JPNIC परियोजना को लेकर पिछली सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

ब्रजेश पाठक के मुताबिक, करीब 200 करोड़ रुपये की मूल लागत वाली इस परियोजना पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद परियोजना अपेक्षित तरीके से आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

JPNIC का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। बीजेपी और सपा दोनों ही इस विवाद के जरिए एक-दूसरे की सरकारों और नीतियों पर निशाना साध रहे हैं।

सपा जहां इसे सार्वजनिक संपत्तियों के कथित निजीकरण और ऐतिहासिक संस्थाओं की अनदेखी से जोड़ रही है, वहीं बीजेपी परियोजना की लागत और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विपक्ष को घेर रही है।

ऐतिहासिक विरासत और भ्रष्टाचार बना मुद्दा

JPNIC विवाद अब केवल एक भवन या परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। दोनों दल इसे व्यापक राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे के रूप में पेश कर रहे हैं। एक तरफ सपा इसे जयप्रकाश नारायण की विरासत और सार्वजनिक संपत्ति से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी परियोजना में हुए खर्च और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठा रही है।

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की सियासत में कितना बड़ा राजनीतिक हथियार बनता है, इस पर अब सबकी नजर है।

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