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सुनार से खोटे सिक्कों का सौदागर: 20 साल से चार राज्यों में चल रहा था नकली सिक्कों का काला कारोबार

सहारनपुर। नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने का यह खेल कोई नया नहीं था। पंजाब के जीरकपुर मोहाली निवासी आरोपित उपकार ने करीब दो दशक पहले साल 2001 में इस अवैध धंधे की शुरुआत की थी। शुरुआत में वह एक सुनार के रूप में काम करता था और चांदी के सिक्के तैयार किया करता था।

सिक्के ढालने की बारीकियों और उनकी बनावट की गहरी समझ होने के बाद उसने इसी हुनर का इस्तेमाल नकली सिक्के तैयार करने में शुरू कर दिया। वक्त के साथ उसका यह काला कारोबार लगातार बढ़ता गया और आरोपितों ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और बिहार तक नकली सिक्कों की बिक्री का एक बड़ा नेटवर्क फैला लिया।

मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2017 में एक लाख रुपये के इनामी अपराधी उपकार लूथरा को गिरफ्तार किया था। उसके पास से भारी मात्रा में पांच रुपये के नकली सिक्के बरामद किए गए थे। हालांकि, इसके बाद वह पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए नेपाल भाग गया था और वहीं से छुपकर अपने पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। नेपाल में रहने के दौरान भी वह लगातार नकली सिक्के बनाने के अवैध काम में सक्रिय बना रहा।

महज दसवीं पास उपकार ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उसने साल 1990 में उत्तम नगर इलाके की एक ज्वेलरी की दुकान में काम किया था। महज चार महीने बाद उसने वह काम छोड़कर कपड़े की दुकान शुरू की, लेकिन वहां उसका धंधा ठीक नहीं चल पाया। इसके बाद, साल 1997 में उसकी मुलाकात देहरादून के रहने वाले गुलशन गंभीर से हुई और उसी के जरिए उसने इस गोरखधंधे की दुनिया में कदम रखा था।

पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि नकली सिक्कों को तैयार करने के बाद उन्हें बाजार में सफलतापूर्वक खपाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में खास संपर्क बनाए गए थे। इस नेटवर्क से जुड़े तमाम लोग इन खोटे सिक्कों को आम बाजारों तक पहुंचाने और उन्हें आगे बेचने का काम करते थे। चार अलग-अलग राज्यों तक इस नेटवर्क के फैलने से इस अवैध कारोबार का दायरा बेहद बड़ा होने का अंदेशा जताया जा रहा है।

एसएसपी ने दोहराया कि आरोपित उपकार के पास चांदी के सिक्के बनाने का पुराना और लंबा अनुभव था। चांदी के सिक्के तैयार करने के दौरान ही उसे सिक्कों के डिजाइन, सटीक आकार और ढलाई की तमाम बारीकियों की पूरी जानकारी हासिल हो गई थी, और इसी अनुभव ने उसे जुर्म की दुनिया में नकली सिक्के बनाने की तरफ धकेल दिया। साल 2001 से शुरू हुआ यह सिलसिला धीरे-धीरे एक बड़े संगठित कारोबार का रूप ले चुका था, जिसमें आरोपित ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार के कई शातिर लोगों को अपने इस गिरोह में शामिल कर रखा था।

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