नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में लगी फोटो प्रदर्शनी विवादों में आ गई है। रेहान ने आरोप लगाया है कि उनकी प्रदर्शनी ‘No Idea Is Final’ शुरू होने से कुछ घंटे पहले 105 में से 74 तस्वीरों को हटाने या बदलने के लिए कहा गया। उनके मुताबिक, इन तस्वीरों में दिल्ली में छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं। मामले में तिरंगे वाली तस्वीरों का जिक्र आने के बाद विवाद और बढ़ गया है।
प्रदर्शनी शुरू होने से पहले तस्वीरें हटाने को कहा गया
रेहान वाड्रा के मुताबिक, उनकी प्रदर्शनी में पिछले छह महीनों के दौरान दिल्ली में हुए जन-आंदोलनों को कैमरे में कैद किया गया था। उनका कहना है कि तस्वीरों के जरिए वह इन आंदोलनों को एक कलाकार के नजरिए से दिखाना चाहते थे।
रेहान ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनी शुरू होने से पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन की ओर से कई तस्वीरों को हटाने या उनकी जगह दूसरी तस्वीरें लगाने के लिए कहा गया। उनके अनुसार, पहले से साझा किए गए प्रस्ताव और प्रदर्शनी के लेआउट के बावजूद अंतिम समय में यह निर्देश दिया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुल 105 तस्वीरों में से 74 को हटाने या बदलने की मांग की गई। इसके बाद प्रदर्शनी में उपलब्ध तस्वीरों की संख्या घट गई। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर बीकानेर हाउस प्रशासन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि निर्देश के पीछे बताए गए कारणों को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
तिरंगे वाली तस्वीरों को लेकर भी आपत्ति
रेहान वाड्रा ने कहा कि जिन तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया, उनमें भारतीय राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगे से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं। उन्होंने इन तस्वीरों को हटाने पर आपत्ति जताई।
रेहान के मुताबिक, उन्होंने तिरंगे वाली तस्वीरें खुद हटाने से इनकार किया। उनका आरोप है कि बाद में उनके परिसर से बाहर जाने पर तस्वीरों में से एक को वहां से हटा दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनी में कला, राजनीतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक सांस्कृतिक स्थलों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, तस्वीरें हटाने के निर्देश और उसके कारणों के संबंध में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
‘कला पर पाबंदी गलत’ — रेहान वाड्रा
रेहान ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एक नागरिक और कलाकार के रूप में उनके लिए इन तस्वीरों को लेना और प्रदर्शित करना महत्वपूर्ण था। उनका मानना है कि कला पर प्रतिबंध लगाना गलत है और कला लोगों तक पहुंचने का रास्ता तलाश लेती है।
उनके अनुसार, तस्वीरों का उद्देश्य आंदोलनों को केवल राजनीतिक घटनाओं के रूप में दिखाना नहीं, बल्कि भीड़, लोगों की भागीदारी और सामूहिक गतिविधियों के दृश्य पक्ष को सामने लाना था।
रेहान ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सांस्कृतिक स्थलों की जिम्मेदारी केवल उनका संचालन करने वालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आम लोगों और कलाकारों के प्रति भी होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने किया बेटे का समर्थन
विवाद के बीच प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे का समर्थन किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब ताकत रखने वाला व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह उस ताकत को बचाने की कोशिश करता है जिसे वह पहले ही खो चुका होता है। उन्होंने रेहान के प्रति गर्व भी व्यक्त किया।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में भी आ गया। कांग्रेस नेताओं ने तस्वीरें हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विवाद की पूरी तस्वीर समझने के लिए बीकानेर हाउस प्रशासन का पक्ष और कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं।
क्या है ‘No Idea Is Final’ प्रदर्शनी?
‘No Idea Is Final’ रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी है, जिसमें विभिन्न विषयों पर आधारित तस्वीरें रखी गई थीं। विवाद के केंद्र में दिल्ली में हुए छात्र और युवा आंदोलनों की तस्वीरें हैं। रेहान के अनुसार, वह इन घटनाओं को अपने फोटोग्राफिक नजरिए से दर्ज कर रहे थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तस्वीरों को लेकर आपत्ति प्रदर्शनी शुरू होने के ठीक पहले उठाई गई। इसके बाद प्रदर्शनी में तस्वीरों की संख्या कम हो गई और हटाई गई तस्वीरों को किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शित करने की संभावना पर भी विचार किया गया।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थलों की भूमिका पर बहस
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक सांस्कृतिक स्थलों पर कला और राजनीतिक विषयों से जुड़ी तस्वीरों के प्रदर्शन के लिए क्या नियम होने चाहिए और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए।
एक ओर रेहान वाड्रा ने अंतिम समय पर तस्वीरें हटाने के निर्देश को अनुचित बताया है, वहीं प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने पर यह समझना आसान होगा कि कार्रवाई किस नीति या नियम के तहत की गई।


