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बिहार के वांटेड नक्सली को झारखंड पुलिस ने गिरफ्तार कर छोड़ा, जांच में पुष्टि के बाद SP ने किया थाना प्रभारी को लाइन हाजिर

बिहार के मोतिहारी में दर्ज नक्सली मामले में वांछित था राजेंद्र पासवान

जांच में पुलिस द्वारा पकड़ने के बाद छोड़ने की पुष्टि, एसपी ने की कार्रवाई

पलामू: जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र स्थित दंगवार ओपी में पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़ा मामला सामने आया है। बिहार के मोतिहारी जिले में दर्ज नक्सली मामले के एक वांछित वारंटी को पकड़ने के बाद कथित तौर पर छोड़ दिए जाने के मामले में दंगवार ओपी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर वीरेंद्र मेहता को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामले की जांच के बाद पलामू पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने यह कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार, पलामू पुलिस की ओर से फरार आरोपियों और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान 22 सितंबर की रात दंगवार ओपी पुलिस ने राजेंद्र पासवान को पकड़ा था। राजेंद्र पासवान के खिलाफ बिहार के मोतिहारी जिले में वर्ष 2016 में नक्सली गतिविधियों से जुड़े मामले में केस दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

पकड़ने के बाद छोड़ने का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने राजेंद्र पासवान को रात करीब 12 बजे पकड़ा था। इसके बाद उसे उसी रात छोड़ दिया गया। मामले की जानकारी पलामू एसपी तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच के निर्देश दिए।

एसपी के निर्देश पर हुसैनाबाद एसडीपीओ दिव्यांशु शुक्ला के नेतृत्व में जांच कराई गई। जांच में यह पुष्टि होने की बात सामने आई कि राजेंद्र पासवान को पुलिस ने पकड़ा था और बाद में उसे छोड़ दिया गया।

एसपी ने ओपी प्रभारी को किया लाइन हाजिर

जांच रिपोर्ट के आधार पर दंगवार ओपी प्रभारी वीरेंद्र मेहता को लाइन हाजिर कर दिया गया। एसपी कपिल चौधरी के अनुसार, यदि किसी वारंटी को पुलिस पकड़ती है, तो इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को देते हुए नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। पकड़े गए व्यक्ति को इस तरह छोड़ना उचित नहीं है।

वहीं, पुलिस की ओर से संबंधित व्यक्ति की गिरफ्तारी और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रयास जारी रहने की बात कही गई है।

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मामला चर्चा में

वांछित वारंटी को पकड़ने के बाद छोड़ने की घटना सामने आने और जांच के बाद ओपी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल विभागीय स्तर पर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

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