देवघर: गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने देवघर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी औरझारखंड सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति और हालिया कार्यक्रमों को लेकर सवाल उठाए, वहीं झारखंड सरकार पर विकास और विभिन्न नीतिगत मुद्दों को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन देश और राज्य से जुड़े मुद्दों पर तथ्यों के साथ बात होनी चाहिए। उन्होंने ने राहुल गांधी की हालिया राजनीतिक गतिविधियों को लेकर उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हैं, लेकिन विपक्ष को अपनी राजनीतिक भूमिका और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता पर भी विचार करना चाहिए।
दुबे ने राहुल गांधी के हालिया ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कार्यक्रम और कांग्रेस की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा। इससे पहले भी दुबे ने राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी।
हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से निशिकांत दुबे की इन टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान आवश्यक है।
झारखंड सरकार पर भी साधा निशाना
निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार पर भी कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राज्य में विकास, खनिज संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की। हालिया बयान में दुबे ने MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर भी झारखंड सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार को झारखंड के कोयले की जरूरत नहीं है और राज्य सरकार चाहे तो कोयला उत्पादन रोक सकती है। ये दुबे के राजनीतिक आरोप हैं; इन पर राज्य सरकार का पक्ष अलग से महत्वपूर्ण है।
कोयला और खनिज अधिकार का मुद्दा गरम
झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राजस्व का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बहस के केंद्र में है। झामुमो ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया है। पार्टी का कहना है कि खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और आर्थिक हितों की रक्षा जरूरी है।
वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे इस मुद्दे पर राज्य सरकार की रणनीति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में खनिज कानून को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
SIR और प्रशासनिक मुद्दों पर भी सवाल
निशिकांत दुबे ने झारखंड में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन पर प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
हालांकि SIR निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है और इससे जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जांच या चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।
विकास को लेकर भी सरकार को घेरा
निशिकांत दुबे ने झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में विकास कार्यों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अपने क्षेत्र में सड़क, रेल, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं को रेखांकित किया।
दुबे इससे पहले भी देवघर और गोड्डा क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया बातचीत में उन्होंने देवघर-गोड्डा क्षेत्र में सड़क और रेल कनेक्टिविटी सहित विभिन्न परियोजनाओं का उल्लेख किया था।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी सक्रियता
झारखंड में आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर भाजपा और झामुमो के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। एक ओर झामुमो खनिज कानून और राज्य के अधिकारों को लेकर केंद्र पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा नेता राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कामकाज को निशाना बना रहे हैं।
देवघर में निशिकांत दुबे के ताजा बयान भी इसी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा हैं। आने वाले दिनों में खनिज कानून, SIR, विकास परियोजनाओं और विपक्ष की भूमिका जैसे मुद्दों पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।

