Category: समाचार

  • झारखंड की राजमहल लोकसभा क्षेत्र में बदला बदला सा है माहौल

    झारखंड की राजमहल लोकसभा क्षेत्र में बदला बदला सा है माहौल

    साहिबगंज । राजमहल लोकसभा क्षेत्र की डेमोग्राफी कुछ इस तरह है कि भाजपा के लिए ये सीट हमेशा चुनौती रही है। मुस्लिम और ईसाई मतदाता की बहुलता के कारण झामुमो के लिए ये सीट आसान मानी जाती है।

    राजमहल में 37 फीसद आदिवासी और 5 प्रतिशत SC हैं। 29 फीसदी अल्पसंख्यक और 28 फीसदी सनातनी हिंदू रहते हैं।

    राजमहल लोकसभा क्षेत्र में महेशपुर, लिïट्टीपाड़ा, बरहेट तथा बोरियो विधान सभा क्षेत्र ST के लिए रिजर्व है, वही राजमहल और पाकुड़ से सामान्य जाति के लोग चुनाव लड़ सकते हैं। राजमहल लोकसभा क्षेत्र के कुछ मतदान केंद्र गोड्डा और दुमका जिला में भी हैं।

    इस बार राजमहल लोकसभा क्षेत्र का माहौल 2019 के मुकाबले बदला बदला सा है, उसके निम्नलिखित कारण हैं:

    उम्मीदवार
    पिछली बार हेमलाल मुर्मू झामुमो से पाला बदलकर बीजेपी में आए थे। उनको टिकट दिए जाने से बीजेपी का कैडर बहुत खुश नहीं था। लेकिन इस बार माहौल थोड़ा अलग है। झामुमो के मौजूदा सांसद विजय हांसदा के खिलाफ़ माहौल ख़राब है। उनके बारे में आम शिकायत ये है कि उन्होंने क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया। सिर्फ़ बीजेपी से विरोधी के नाम पर उन्हें कब तक वोट दिया जाए ? विजय हांसदा अपनी उपलब्धि बताएं।

    लॉबिन हेंब्रम
    दूसरा फैक्टर हैं लोबिन हेंब्रम। लॉबिन हेंब्रम ने एलान कर दिया है कि अगर मेरे बेटे को झामुमो से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय खड़े होंगे। हालांकि लॉबिन हेंब्रम अपनी बात पर कायम रहेंगे इसपर शक है। वे पहले भी झामुमो के बारे में अनाप शनाप बोलते रहे हैं, पर ऐन मौके पर गुरुजी और शिबू सोरेन के नाम पर सरेंडर कर जाते हैं।

    देवीधन टुडू फैक्टर
    तीसरा फैक्टर है देवीधन टुडू, ताला मरांडी और बाबूलाल मरांडी की तिकड़ी। देवीधन टुडू हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं, उनका अपना खुद का जनाधार है। वे ताला मरांडी के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अगली बार महेशपुर से विधानसभा चुनाव लड़ना है। अपने क्षेत्र में उन्होंने ताला मरांडी को लीड दिला दी तो विधानसभा चुनाव में उनका टिकट पक्का हो जाएगा

    ताला मरांडी
    भाजपा उम्मीदवार ताला मरांडी ख़ुद ज़मीन से जुड़े नेता हैं। इलाका उनके लिए जाना पहचाना है और वे अंदरूनी इलाके में घुसकर प्रचार कर रहे हैं। ताला मरांडी आदिवासी सेंटीमेंट्स और उनके मुद्दे अच्छी तरह समझते हैं। उनके साथ रांची लॉबी ने राजनीति जरूर की थी, पर वो बीती बात हो गई। इस बार आदिवासी मतदाताओं के बीच ताला मरांडी को लेकर पॉजीटिव चर्चा है।

    बाबूलाल मरांडी
    बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष बनने का संथाल आदिवासियों के बीच बीजेपी की छवि बदली है। बाबूलाल मरांडी दुमका और राजमहल के हर गांव, हर गली से परिचित हैं। शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां के दो- चार लोगों को बाबूलाल नाम और चेहरे से नहीं पहचानते हों। इसका असर भी राजमहल लोकसभा चुनाव में दिखेगा

    लेकिन इन तमाम फैक्टर्स के बावजूद झामुमो कमज़ोर है, ऐसा मानना बेवकूफी होगी। आलमगीर आलम पाकुड़ में झामुमो को लीड दिलाएंगे तो राजमहल विधानसभा में एमटी राजा को आजसू से तोड़कर दोबारा पार्टी में शामिल कराना JMM का मास्टरस्ट्रोक ही माना जाएगा। हेमन्त सोरेन को जेल भेजने से भी आदिवासी सेंटिमेंट भाजपा के विरुद्ध गया है। इसलिए राजमहल बीजेपी के लिए आज भी मुश्किल सीट की श्रेणी में ही आएगी ।

  • झारखंड में उपचुनाव: सोरेन और परविरा के बीच टकराव

    झारखंड में उपचुनाव: सोरेन और परविरा के बीच टकराव

    झारखंड में उपचुनाव: सोरेन और परविरा के बीच टकराव

    झारखंड में लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। इस उपचुनाव में झारखंड के दो प्रमुख नेताओं, हेमंत सोरेन और बाबुलाल मरांडी परविरा, के बीच टकराव देखने की संभावना है। पहली बार सोरेन और परविरा दोनों एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।

    हेमंत सोरेन की उम्मीदवारी पर बड़ी बात

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी पर फैसला लेने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। वे इस उपचुनाव में अपने पार्टी की उम्मीदवारी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। सोरेन ने इसके लिए अपनी भाभी और झारखंड में उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत रह चुकी सुदेश कुमारी महतो को चुना है। यह फैसला राजनीतिक गतिरोध को और भी तेज कर सकता है।

    परविरा के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं सोरेन

    हेमंत सोरेन के बाद अब परविरा की बारी है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (युनाइटेड) के नेता बाबुलाल मरांडी परविरा भी इस उपचुनाव में अपनी उम्मीदवारी के लिए तैयार हैं। परविरा ने अपनी पार्टी के सदस्यों को चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया है और उन्हें जिताने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इसलिए इस उपचुनाव में सोरेन और परविरा के बीच टकराव देखने की संभावना है।

    झारखंड में यह उपचुनाव राजनीतिक माहौल में बड़ी बदलाव ला सकता है। इसके लिए दोनों नेताओं को अपनी पार्टियों की सुशासन नीतियों को और विकास कार्यों को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत होगी। यह उपचुनाव झारखंड के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अपने नेता को चुनकर अपने राज्य के विकास में मदद कर सकते हैं।

  • चुनाव से पहले बड़ी साजिश कर रहे थे आतंकी, कश्मीर पुलिस ने फोड़ दिया भांडा

    चुनाव से पहले बड़ी साजिश कर रहे थे आतंकी, कश्मीर पुलिस ने फोड़ दिया भांडा

    चुनाव से पहले बड़ी साजिश कर रहे थे आतंकी, कश्मीर पुलिस ने फोड़ दिया भांडा

    अबकी बार चुनाव से पहले ही कश्मीर में एक बड़ी साजिश सामने आई है। कश्मीर पुलिस ने इस साजिश को नाकाम कर दिया है और आतंकी गठबंधन को एक बड़ा प्रहार पहुंचाया है। इस साजिश के पीछे पाकिस्तान की हाथों का हाथ है।

    चुनाव समय कश्मीर में सुरक्षा की गात्रों में बढ़ोतरी हो गई है। सुरक्षा बलों ने अपनी जांच और निगरानी ताकत को मजबूत किया है ताकि चुनाव के दौरान कोई भी आतंकी हमला न कर सके। इसके बावजूद, आतंकी गठबंधन ने चुनाव से पहले ही एक बड़ी साजिश रची थी।

    इस साजिश के तहत, आतंकी गठबंधन ने कश्मीर में धमाकों की योजना बनाई थी। इन धमाकों के जरिए वे चुनाव के माहौल को दंगा करना चाहते थे और लोगों को डराना चाहते थे। इससे चुनाव के माहौल में हार-जीत के मामले पर असर पड़ सकता था।

    कश्मीर पुलिस ने इस साजिश की जानकारी प्राप्त की और तत्परता से काम किया। उन्होंने आतंकी गठबंधन के सदस्यों को गिरफ्तार किया और उनके घरों में छापेमारी की। इस छापेमारी में उन्होंने बड़ी मात्रा में आतंकी सामग्री और हथियार बरामद किए।

    इस साजिश में पाकिस्तानी सरगना का भी एक बड़ा योगदान था। पाकिस्तानी सरगना ने चुनाव से पहले ही आतंकी गठबंधन को पैसा दिया था और उन्हें धमाकों की योजना बनाने में मदद की थी। इसके बदले में उसे 10 लाख रुपये का इनाम दिया गया था।

    पाकिस्तानी सरगना पर 10 लाख का इनाम

    पाकिस्तानी सरगना को आतंकी गठबंधन ने इस साजिश के लिए इनाम दिया था। इसका मकसद था कि वह और अन्य आतंकी सरगना इस साजिश के लिए और भी मेहनत करें और इस तरह के हमलों की योजना बनाएं। इससे चुनाव के माहौल में डरावना माहौल पैदा होता और लोगों का विश्वास घट जाता।

    कश्मीर पुलिस ने इस साजिश को नाकाम कर दिया है और आतंकी गठबंधन को एक बड़ा प्रहार पहुंचाया है। इससे चुनाव में लोगों का विश्वास बढ़ा है और उनकी सुरक्षा की गारंटी मिली है।

    इस साजिश के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने का खुलासा हुआ है। पाकिस्तान कभी भी भारत के खिलाफ नकारात्मक कार्रवाईयों का समर्थन करता है और आतंकवाद को बढ़ावा देता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि पाकिस्तान कश्मीर में अपनी आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश करता है।

    सुरक्षा बलों का बड़ा योगदान

    कश्मीर में चुनाव से पहले इस साजिश को नाकाम करने में सुरक्षा बलों का बड़ा योगदान रहा है। वे निरंतर चौकसी कर रहे थे और आतंकी गठबंधन के सदस्यों को पहचानने में मदद की। उन्होंने आतंकी सामग्री और हथियार बरामद किए और इससे चुनाव में लोगों की सुरक्षा की गारंटी मिली।

    सुरक्षा बलों की मजबूत पहुंच और निगरानी ने चुनाव में लोगों का विश्वास बढ़ाया है। लोग अब चुनावों में अपना मतदान करने के लिए डर कम महसूस कर रहे हैं। इससे चुनाव में बड़ी भागीदारी देखने की संभावना है और लोगों का विश्वास भी बढ़ा है।

    चुनाव से पहले ही आतंकी गठबंधन की यह साजिश नाकाम हो गई है और इससे लोगों की सुरक्षा की गारंटी मिली है। कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों को इसकी तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने अपनी जांच और निगरानी को मजबूत किया है और आतंकी गठबंधन को एक बड़ा प्रहार पहुंचाया है।

  • राजस्थान की हाट्रिक से मुंबई को हार

    राजस्थान की हाट्रिक से मुंबई को हार

    राजस्थान की हाट्रिक से मुंबई को हार

    राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ एक शानदार जीत हासिल की। इस मैच में राजस्थान ने अपनी बैटिंग और गेंदबाजी के दम पर मुंबई को 6 विकेट से हराया। यह मैच वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था।

    रियान पराग की बेहतरीन पारी

    राजस्थान की जीत में रियान पराग की बेहतरीन पारी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। पराग ने अपने 20 गेंदों में 3 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 43 रन बनाए। वह अपनी बैटिंग के साथ-साथ गेंदबाजी में भी अच्छी प्रदर्शन करते नजर आए। उन्होंने मुंबई के बल्लेबाजों को परेशान किया और 3 विकेट लिए।

    चहल और बोल्ट की चमकदार गेंदबाजी

    राजस्थान की जीत में युजवेंद्र चहल और ट्रेंट बोल्ट की चमकदार गेंदबाजी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। चहल ने 4 ओवर में सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट लिए और बोल्ट ने 4 ओवर में 26 रन देकर 2 विकेट लिए। इन दोनों गेंदबाजों ने मुंबई के बल्लेबाजों को रोका और उन्हें जल्दी से आउट कर दिया।

    इस मैच में राजस्थान की बैटिंग भी बेहतरीन रही। विश्व जोशी ने 33 गेंदों में 33 रन बनाए और दिव्यांग सांक्या ने 28 गेंदों में 28 रन बनाए। इसके अलावा अनुष्का जोशी और शिवम दुबे ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिए।

    मुंबई की ओर से इस मैच में कोहली और रोहित शर्मा ने अच्छी पारी खेली। कोहली ने 51 गेंदों में 57 रन बनाए और रोहित ने 42 गेंदों में 42 रन बनाए। लेकिन उनकी पारी भी जीत के लिए काफी नहीं रही।

    इस मैच में राजस्थान की गेंदबाजी और बैटिंग ने मुंबई को परेशान किया और उन्हें हरा दिया। राजस्थान ने इस मैच में बेहतरीन टीम के रूप में प्रदर्शन किया और जीत के साथ-साथ अपने खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया।

    मुंबई की हार में कारण

    मुंबई की हार में कुछ कारण भी थे। उनकी गेंदबाजी इस मैच में बेहतर नहीं रही। उनके गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी नहीं कर पाए और राजस्थान के बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने की मौका मिल गई। इसके अलावा मुंबई की बैटिंग भी अच्छी नहीं रही। उनके बल्लेबाज जल्दी आउट हो गए और इससे उन्हें अच्छा स्कोर बनाने की मौका नहीं मिला।

    इस मैच में राजस्थान ने बेहतरीन प्रदर्शन करके मुंबई को हराया है। उनकी गेंदबाजी और बैटिंग दोनों ही बेहतरीन रही। वह इस जीत के साथ अपनी टीम के मनोबल को भी बढ़ाने में कामयाब रहे हैं। मुंबई को इस हार से कुछ सबक लेना होगा और वह अपनी गेंदबाजी और बैटिंग को सुधारने पर ध्यान देना होगा।

  • बुजुर्गों को ट्रेन किराए में छूट वापस लेने से कितना लाभ हुआ?

    बुजुर्गों को ट्रेन किराए में छूट वापस लेने से कितना लाभ हुआ?

    ट्रेन किराए में छूट वापस लेने से बुजुर्गों को कितना लाभ हुआ?

    रेलवे ने अपनी एक आपातकालीन निर्णय के बाद, जिसमें देशभर में लॉकडाउन की घोषणा हुई, वरिष्ठ नागरिकों को ट्रेन किराये में छूट देने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के बाद से अब तक, बुजुर्गों को कितना लाभ हुआ है, इसका खुलासा आईटीआई के माध्यम से हुआ है।

    रेल मंत्रालय द्वारा बचाए गए रुपये

    रेल मंत्रालय ने खुदरा विभाग के माध्यम से जानकारी प्राप्त की है कि इस आपातकालीन निर्णय के चार साल के दौरान, बुजुर्गों को किराए में छूट देने से रेलवे ने कितने रुपये बचाए हैं। इस खुलासे के अनुसार, रेलवे ने चार साल में कुल मिलाकर १०० करोड़ रुपये बचाए हैं। यह बहुत ही महत्वपूर्ण और गर्व की बात है कि रेलवे ने बुजुर्गों के लिए इतने बड़े राशि को बचाया है।

    बुजुर्गों को छूट का लाभ

    इस आपातकालीन निर्णय के माध्यम से, बुजुर्गों को ट्रेन किराये में छूट मिली है, जिससे उन्हें कई तरह के लाभ हुए हैं। पहले तो उन्हें अपने यात्रा के लिए किराये का खर्च नहीं उठाना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक बचत होती है और वे अपनी यात्रा करने के लिए अधिक से अधिक धन खर्च कर सकते हैं।

    दूसरे, यह निर्णय बुजुर्गों को अपने परिवार के साथ यात्रा करने का मौका देता है। बहुत से बुजुर्ग अकेले रहते हैं और इस छूट के माध्यम से वे अपने परिवार के साथ यात्रा का आनंद ले सकते हैं। यह उन्हें एक मानसिक और भावनात्मक लाभ देता है और उनके लिए यात्रा का एक अद्वितीय अनुभव बन जाता है।

    तीसरे, यह निर्णय बुजुर्गों के लिए एक सामाजिक मुद्दे को उठाने का भी एक माध्यम है। बहुत से बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उन्हें सामाजिक संपर्क की कमी महसूस होती है। इस छूट के माध्यम से, वे अपने दोस्तों और परिवार के साथ यात्रा करके नए संबंध बना सकते हैं और अपनी सामाजिक जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

    सामाजिक सद्भावना को बढ़ाने का एक कदम

    यह आपातकालीन निर्णय रेलवे के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सामाजिक सद्भावना और समरसता को बढ़ाने का मौका मिलता है। बुजुर्गों को इस तरह की छूट देने से हम समाज में उनके प्रति सम्मान का संकेत देते हैं और उन्हें अपने अधिकारों की प्राथमिकता मिलती है।

    इस आपातकालीन निर्णय के माध्यम से, हम समाज में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का माहौल बना सकते हैं। यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि हम समाज में हर उम्र के लोगों का सम्मान करते हैं और उनकी जरूरतों को महत्व देते हैं।

    इस प्रकार, रेलवे द्वारा बुजुर्गों को ट्रेन किराये में छूट वापस लेने से उन्हें बहुत सारे लाभ हुए हैं। यह निर्णय न केवल उनकी आर्थिक बचत कराने का माध्यम है, बल्कि उनके लिए एक मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक लाभ प्रदान करने का एक उत्कृष्ट तरीका है। यह निर्णय सामाजिक सद्भावना और समरसता को बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • 2014 से पहले पता चलता था क्या? विपक्ष पर बरसे पीएम मोदी

    2014 से पहले पता चलता था क्या? विपक्ष पर बरसे पीएम मोदी

    नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2024 (ठंडी रात)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर कड़े वचन बोलते हुए कहा कि 2014 से पहले के चुनावों में कितना पैसा खर्च किया गया था, यह एक एजेंसी बता सकती है। उन्होंने यह बयान एक निजी तमिल न्यूज चैनल के साथ हुई बातचीत में दिया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इलेक्टोरल बॉन्ड की वजह से फंडिंग का सोर्स पता चल जाता था। क्या कोई एजेंसी हमें बता सकती है कि 2014 से पहले चुनावों में कितना पैसा खर्च किया गया था?”

    मोदी ने इसके साथ ही इलेक्टोरल बॉन्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड की नीति से यह पता चलता है कि किस पार्टी को कहां से किसने चंदा दिया है।

    मोदी ने उत्तर प्रदेश चुनावों के मद्देनजर विपक्ष के बयानों को कटाक्ष करते हुए कहा, “चुनावी बांड की बदौलत अब हम फंडिंग के सोर्स का पता लगा सकते हैं। कुछ भी सही नहीं है, हर चीज में खामियां हैं मगर उन्हें दूर किया जा सकता है।”

    मोदी ने उस निजी तमिल न्यूज चैनल के साथ बातचीत में इलेक्टोरल बॉन्ड की जमकर वकालत की है।

    इस बारे में विपक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मोदी सरकार की पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड को सपोर्ट किया था। वे कहते हैं कि इस बॉन्ड के माध्यम से किसी भी पार्टी को चंदा देने का स्रोत पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

    पिछले सप्ताह, संसद में भारतीय जनता पार्टी के विरोध में कांग्रेस ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कड़े आरोप लगाए थे। वे कहते हैं कि इस से भ्रष्टाचार बढ़ा है और चंदे के स्रोत को गुप्त रखने की कोशिश की जा रही है।

    साथ ही, वे इस पर भी जोर दे रहे हैं कि इसके माध्यम से अनियमितता बढ़ गई है और पार्टियों को अपने चंदे का हिसाब नहीं देना पड़ता है।

    संबंधित रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गहरी विवाद चल रहा है। इसके बारे में सरकार ने कहा है कि यह एक आवाज के बदले अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए।

    इस समय, सरकार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए विपक्ष से बातचीत का आह्वान किया है।

  • चिराग पासवान की पार्टी ने घोषित किए चौंकाने वाले नाम

    चिराग पासवान की पार्टी ने घोषित किए चौंकाने वाले नाम

    चिराग पासवान की पार्टी ने घोषित किए चौंकाने वाले नाम

    पटना। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने अपने पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की।

    जमुई से अरुण भारती चिराग पासवान के जीजाजी हैं। अरुण भारती ने अपनी शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम में पूरी की है। अरुण के पास विदेश से एमबीए की डिग्री है। अरुण भारती मूल रूप से कांग्रेस परिवार से नाता रखते हैं । उनकी मां डॉ ज्योति भारती भोजपुर जिले कि सहर सीट दो बार कांग्रेस विधायक, विधान परिषद सदस्य रह चुकी हैं ।

    समस्तीपुर से शांभवी चौधरी जेडीयू वाले अशोक चौधरी की बेटी हैं। अगर जीती तो वे देश की सबसे कम उम्र की सांसद होंगी। शांभवी के पति शायन कुणाल आचार्य कुणाल के बेटे हैं। शांभवी चौधरी (25) दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से पढ़ाई की हैं । इसके अलावा उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में पीएचडी कर रखी हैं। मौजूदा वक्त में वो पटना के ज्ञान निकेतन स्कूल में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं ।

    वैशाली से वीणा देवी MLC दिनेश प्रसाद सिंह की पत्नी हैं, इन्होंने रघुवंश प्रसाद सिंह को हराकर 2019 का लोकसभा चुनाव जीता था। इस बार उनका मुकाबला मुन्ना शुक्ला से है।

    खगड़िया से राजेश वर्मा भागलपुर के जाने माने सर्राफा व्यवसायी हैं. भागलपुर में उनका बड़ा नाम है. वह भागलपुर के डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं। रियल एस्टेट में भी उन्होंने बहुत नाम कमाया है। राजेश वर्मा पहली बार लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरने जा रहे हैं। इससे पहले वे 2020 के विधानसभा में चिराग पासवान की पार्टी से ही उम्मीदवार थे, 20 हज़ार से अधिक मत प्राप्त हुए थे।

  • मयंक का शानदार डेब्यू मैच

    मयंक का शानदार डेब्यू मैच

    मयंक का शानदार डेब्यू मैच

    आईपीएल 2024 के शुरुआती मैच में लखनऊ के गेंदबाज मयंक ने एक शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने पहले गेंद में सबसे तेज गेंद को फेंका, जिसकी गेंदबाजी की रफ्तार 155.8 किमी/घंटा थी। यह गेंद सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड बन गई है। मयंक ने इस मैच में चार विकेट लेकर अपनी टीम को बड़ी जीत दिलाई।

    मयंक का डेब्यू मैच उनकी करियर का एक अद्वितीय मोमेंट था। उन्होंने अपनी गेंदबाजी के साथ-साथ बहुत ही संवेदनशील कप्तानी भी दिखाई। वे अपनी गेंदों को बेहतर ढंग से संभालने के साथ-साथ अपनी टीम के अनुभवी गेंदबाजों के साथ मिलकर खुद को समझाने में भी सक्षम रहे। उन्होंने अपनी गेंदबाजी को अपनी टीम के लिए निर्णायक साबित किया और उन्हें चार विकेट लेने की कामयाबी भी मिली।

    मयंक की गेंदबाजी में विद्यमान रफ्तार का रिकॉर्ड तो उन्होंने बना दिया है, लेकिन उनकी गेंदबाजी का अद्वितीय अंदाज भी ध्यान में आया। उन्होंने गेंद को बहुत ही सुरुचिपूर्ण ढंग से फेंका, जिससे उन्हें विकेट लेने में आसानी हो गई। उनकी गेंदबाजी की रफ्तार और विद्यमान तकनीक ने उन्हें अन्य गेंदबाजों से अलग बना दिया है।

    इस मैच में मयंक ने उन्हें दिखाए गए प्रदर्शन के साथ अपनी प्रतिभा को साबित किया है। उन्होंने अपनी गेंदबाजी के साथ टीम को एक बड़ी जीत दिलाई है और अपनी पहली पारी में चार विकेट लेकर उनकी गेंदबाजी की महत्ता को बढ़ाया है। यह उनके लिए एक अद्वितीय अनुभव रहा होगा और उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया होगा।

    जॉनी बेयरस्टो के पवेलियन को भेजा

    मयंक का पहला शिकार जॉनी बेयरस्टो रहे। उन्होंने एक तेज गेंद द्वारा उन्हें पवेलियन भेज दिया। यह विकेट लखनऊ के लिए बड़ी कामयाबी थी, क्योंकि जॉनी बेयरस्टो एक अनुभवी बैट्समेन हैं और उन्हें हर कोई रोक पाना मुश्किल होता है।

    मयंक की इस गेंद के साथी भारतीय टीम के खिलाड़ी और उनके प्रशंसकों के लिए यह एक गर्व का पल था। इस विकेट से जॉनी बेयरस्टो की आउट और उनकी बेहतरीन बैटिंग का अंत हुआ। बेयरस्टो की बेहतरीन तकनीक, संयमित खेल और अनुभव के चलते उन्हें विश्व क्रिकेट में एक मान्यता प्राप्त है। उनके खिलाफ खेलना हमेशा एक चुनौती होती है और यह विकेट लखनऊ की पिच पर उनके खाते में एक बड़ी सफलता थी।

    जॉनी बेयरस्टो की आउट के बाद, बाकी के खिलाड़ी और खेल के दिग्गज द्वारा लखनऊ को एक और अवसर मिला था अपनी टीम का प्रदर्शन सुधारने का। यह विकेट उनके पास बड़ी संख्या में रन बनाने का मौका देता है और उन्हें उनकी टीम के लिए नई दिशा देने का अवसर प्रदान करता है। जॉनी बेयरस्टो की आउट ने खेल के दौरान एक बड़ा परिवर्तन लाया और लखनऊ की टीम को एक बड़ी जीत के लिए मजबूत किया।

    इस विकेट के बाद, मयंक ने अपनी गेंदबाजी को और भी सुधारा और उन्होंने लखनऊ की बैटिंग लाइनअप को और अधिक दबाव डाला। उनकी गेंदबाजी ने विपक्षी बैट्समेन को समस्याओं में डाल दिया और उन्होंने अपनी टीम को एक बड़ी जीत के लिए मजबूत किया। जॉनी बेयरस्टो के पवेलियन को भेजने से पहले, मयंक ने विपक्षी टीम के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी की आउट की है।

    मयंक ने अपनी दूसरी और तीसरी विकेट प्रभसिमरन सिंह और जितेश शर्मा को ले लिया। उन्होंने इस मैच में 27 रन खर्च किए और इकॉनमी रेट 6.75 रखा। यह एक बहुत ही अच्छा प्रदर्शन है, क्योंकि प्रभसिमरन सिंह और जितेश शर्मा दोनों बहुत बड़े बैट्समेन हैं।

    गेंदबाजी में मयंक ने कुल 18 गेंदें फेंकी और उनकी गेंदबाजी की रफ्तार 148 किमी/घंटा से ज्यादा थी। यह गेंदबाजी का रिकॉर्ड है और यह बहुत ही प्रभावशाली है।

    इस मैच में मयंक की गेंदबाजी ने टीम को बहुत ही मजबूत बनाया। उन्होंने प्रभसिमरन सिंह और जितेश शर्मा जैसे स्थानीय बैट्समेन को शिकार बनाया और इससे उनकी खुद की भरोसेमंदी और क्षमता को दिखाने का मौका मिला। मयंक की गेंदबाजी का इतना उच्च रेट और इतनी बड़ी गेंदबाजी की रफ्तार उनके अंदाजे को बढ़ा देती है।

    गेंदबाजी में रफ्तार बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह बैट्समेन के खिलाफ टेक्निकल गलतियों को पकड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका होता है। मयंक की गेंदबाजी की रफ्तार उन्हें बैट्समेन के बिल्कुल आगे रहने की संभावना देती है, जिससे वे उन्हें असाधारण और अनुप्रयोगी गेंदों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

    मयंक की गेंदबाजी ने उनकी टीम को मजबूत किया है और उन्हें मैच में अहम योगदान दिया है। उनके द्वारा लिए गए विकेट ने उनकी टीम को बड़े बैट्समेन के खिलाफ वापसी की संभावना दी है और इससे उन्हें पूरी मदद मिली है। इसके अलावा, उनकी गेंदबाजी की रफ्तार और उच्च इकॉनमी रेट ने उन्हें एक मान्यता दी है कि वे एक अग्रेसिव और प्रभावशाली गेंदबाज हैं।

  • चतरा, धनबाद और दुमका को लेकर क्यों है विवाद? क्या है जमीनी हकीकत?

    चतरा, धनबाद और दुमका को लेकर क्यों है विवाद? क्या है जमीनी हकीकत?

    चतरा, धनबाद और दुमका को लेकर क्यों है विवाद? क्या है जमीनी हकीकत?

    रांची। झारखंड की जिन तीन सीटों को लेकर सबसे अधिक ख़बर बनाई जा रही है, वो हैं दुमका, चतरा और धनबाद। तीनों सीटों की एक समीक्षा

    धनबाद
    धनबाद में भाजपा ने ढुल्लू महतो को टिकट दिया है। “राजपूत का अपमान” वाला नारा सबसे अधिक यहीं गूंज रहा है। लेकिन नारा लगाने वाले शायद ध्यान नहीं दे रहे कि दूसरी ओर ढुल्लू के समर्थन में “पिछड़ों और स्थानीय” की गोलबंदी भी हो रही है। धनबाद और बोकारो जैसे शहरों में रहने वाले सवर्ण आमतौर पर भाजपा के वोटर हैं। उनको इससे कोई शायद कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस जाति को उम्मीदवार बनाया गया है। उनको तो सिर्फ़ मोदीजी को प्रधानमंत्री बनाना है। फिर भी मान लिया कि 20-30% राजपूत वोट भाजपा से छिटकता है और इसके खिलाफ OBC, झारखंडी वोट ढुल्लू महतो के पक्ष में गोलबंद होते हैं तो फायदे में कौन रहेगा। ऊपर से सरयू राय धनबाद में कूदकर गलती कर रहे हैं। उनको लगता है कि जमशेदपुर पूर्वी की तरह कांग्रेस और झामुमो उनको समर्थन देंगे। पर इस बार वो गलत ट्रैक पर हैं, कांग्रेस धनबाद से अपना कैंडिडेट घोषित करने वाली है। और ये प्रिंस खान जैसे पुराने ट्रिक्स बंद कर दें। धनबाद में कांग्रेस का कैंडिडेट रहा, और सरयू राय भी चुनाव लड़ गए तो ढुल्लू महतो की ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ जीत होगी। और इसके प्रतिरोध में अगले विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर में भी सरयू राय को भाजपा के परंपरागत वोटरों का कोप झेलना पड़ेगा।

    दुमका
    दुमका में सुनील सोरेन को टिकट देकर फिर सीता सोरेन को दिया गया। ये सुनील सोरेन के साथ अच्छा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने जिस गरिमा से पार्टी के फ़ैसले को स्विकार किया है, उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

    सीता सोरेन के खिलाफ़ हेमन्त सोरेन शायद चुनाव नहीं लड़ेंगे। हेमलाल मुर्मू ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये साफ किया है कि हेमन्त सोरेन दुमका से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहे। ST रिजर्व सीट होने के नाते कल्पना सोरेन नहीं लड़ सकतीं। तो फिर सीता सोरेन के मुकाबले कौन? स्टीफन मरांडी लड़ें या हेमलाल मुर्मू, ये दोनो सीता सोरेन को नहीं हरा सकेंगे। झामुमो को कुछ अलग, कुछ out of the box सोचना होगा। जबतक झामुमो का कैंडिडेट घोषित नहीं होता, इस सीट पर कौन जीतेगा, कौन हारेगा, इसे रहने देते हैं।

    चतरा
    चतरा से आज एक तस्वीर आई जिसमें चतरा के पूर्व सांसद सुनील सिंह मौजूदा उम्मीदवार कालीचरण सिंह के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। इसके आलावा बरही से मनोज यादव, अन्नापूर्णा देवी जैसे बड़े यादव नेता कालीचरण सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करने आने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का भी समय लिया जाना है, हालांकि कन्फर्मेशन के बाद ही इसपर बोलना उचित होगा।
    जैसा कि अनुमान है चतरा से आरजेडी का उम्मीदवार होगा। काली बाबू स्थानीय हैं। चतरा के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि किसी स्थानीय को सांसद चुना जाए। ऐसे में आरजेडी पर भी दबाव होगा कि किसी स्थानीय को ही टिकट दें। एक नाम जो सामने आ रहा है वो है पत्थर कारोबारी अरुण सिंह का । सत्यानंद भोक्ता ने बहुत कोशिश की लेकिन शायद लालू दरबार में उनकी बात नहीं बनी। मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा है कि इक्का दुक्का अपवादों को छोड़ काली बाबू का विरोध कौन कर रहा है ? इटखोरी इलाके के तीन चार मुखिया कालीचरण सिंह के साथ घूम रहे हैं। वहीं पर राजपूतों की सबसे बड़ी आबादी है। कल एक तस्वीर देखी, सबसे बडे़ राजपूत गांव में कालीचरण सिंह के स्वागत में वहां के लोग आतिशबाजी कर रहे थे।
    मेरा आकलन है कि कालीचरण सिंह फिलहाल बहुत आगे चल रहे हैं, फिर भी मैं सामने वाले कैंडिडेट का इंतज़ार करूंगा, उसके बाद ही जीत हार का आकलन होगा।

  • दिल्ली में भाजपा का पोस्टर युद्ध: सियासी प्रचार और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा

    दिल्ली में भाजपा का पोस्टर युद्ध: सियासी प्रचार और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा

    निशाने पर केजरीवाल, राहुल, ममता और विपक्ष के अन्य नेता

    पोस्टर पर लिखा है “वो कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ, मोदी कहते हैं भ्रष्टाचारी भगाओ”

    पोस्टर के जरिये “मोदी की गारंटी” और सरकार की उपलब्धियां गिनाने में जुटे भाजपाई

    नई दिल्ली, उज्जवल दुनियां संवाददाता: भारतीय राजनीति में चुनावी प्रक्रिया के समय, हर दल अपनी राजनीतिक यात्रा को मजबूत करने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता है। इसका एक उदाहरण भाजपा के पोस्टर युद्ध का है, जो दिल्ली में चल रहा है। दिल्ली में विभिन्न पोस्टरों के माध्यम से, भाजपा अपने नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व और सरकार की उपलब्धियों को सामने लाने का प्रयास कर रही है, और साथ ही विपक्ष के नेताओं राहुल ममता और केजरीवाल को निशाना बना रही है।

    भाजपा के पोस्टरों में दिखाया गया है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं और मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इसके विपरीत, इन पोस्टरों के द्वारा विपक्षी नेताओं को भ्रष्टाचार का समर्थन करने के लिए दोषी भी ठहराया जा रहा हैं। जैसा की पोस्टरों में लिखा है, “वो कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ, मोदी कहते हैं भ्रष्टाचारी भगाओ”। इस स्लोगन के जरिये भाजपा द्वारा यह बताने के प्रयाश किया जा रहा है विपक्ष भ्रष्टाचार का समर्थन कराती है और मोदी भ्रष्टाचार का उन्मूलन चाहते हैं।

    अपने पोस्टर अभियान के माध्यम से, भाजपा दिल्ली के लोगों को बताने का प्रयास कर रही है कि मोदी सरकार ने किस प्रकार से उनके लिए काम किया है। होर्डिंग और बैनरों पर लिखा है कि करोड़ों गरीबों को पक्का घर मिला है, और लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, उन्होंने भारत के विकास के लिए अंतरिक्ष मिशन और बुलेट ट्रेन के विस्तार को भी उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।

    पोस्टरों के माध्यम से भाजपा विपक्ष के नेताओं को निशाना बना रही है, और विपक्ष के पाखंड को खोल रहे हैं और लोगों को यह बता रहे हैं कि मोदी सरकार ही वास्तव में उनकी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है। साथ ही यह भी बताने का प्रयास है की दिल्ली के लोग भी भाजपा के साथ दिख रहे हैं और पीएम मोदी को आशीर्वाद दे रहे हैं।