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लातेहार के टूकुडीह स्कूल की बदहाली, न दरवाजा-खिड़की, न बेंच; टूटे फर्श पर पढ़ने को मजबूर बच्चे

लातेहार: सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच लातेहार जिले के टूकुडीह गांव का प्राथमिक विद्यालय बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्कूल भवन में न दरवाजे हैं, न खिड़कियां और न ही बच्चों के बैठने के लिए बेंच-कुर्सियां। हालात यह हैं कि बच्चे टूटे हुए फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित टूकुडीह गांव लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 160 किलोमीटर दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए छत्तीसगढ़ की सीमा से होकर गुजरना पड़ता है। सीमा क्षेत्र में स्थित होने के कारण गांव लंबे समय से सड़क समेत कई बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।

स्कूल के नाम पर सिर्फ भवन, सुविधाएं नदारद

गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालय संचालित है, लेकिन स्कूल भवन की स्थिति बेहद खराब है। कमरों में दरवाजे और खिड़कियां नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। वहीं, क्लासरूम का फर्श जगह-जगह टूट चुका है।

बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और कुर्सियां भी नहीं हैं। ऐसे में नौनिहालों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।

खबर की बड़ी बातें

  • टूकुडीह गांव लातेहार के महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत में आता है।
  • गांव जिला मुख्यालय से करीब 160 किलोमीटर दूर बताया गया है।
  • गांव तक पहुंचने के लिए छत्तीसगढ़ की सीमा पार करनी पड़ती है।
  • प्राथमिक विद्यालय में दरवाजे और खिड़कियां नहीं हैं।
  • क्लासरूम का फर्श टूटा हुआ है।
  • बच्चों के लिए पर्याप्त बेंच और कुर्सियों की व्यवस्था नहीं है।
  • ग्रामीणों के मुताबिक इलाके के कई स्कूलों की स्थिति खराब है।
  • गांव की समस्याओं को लेकर ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
  • शिक्षा विभाग ने स्कूल भवन की मरम्मत और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

सड़क से लेकर स्कूल तक, हर तरफ परेशानी

ग्राम प्रधान सुखलाल नगेसिया के मुताबिक महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ओरसा पंचायत का टूकुडीह टोला विकास की दौड़ में काफी पीछे है। गांव तक पहुंचने के लिए सड़क की समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने में भी कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि स्कूल की हालत भी बेहद चिंताजनक है। बच्चों के बैठने के लिए बेंच और कुर्सियां तक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें टूटे-फूटे फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ता है।

इलाके के अधिकांश स्कूल बदहाल: मुखिया

पंचायत की मुखिया अमृता कुजूर ने कहा कि क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि गांव की बदहाली केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है।

मुखिया के अनुसार, गांव की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

जल्द शुरू होगी स्कूल भवन की मरम्मत

मामले पर लातेहार जिला शिक्षा अधीक्षक ऋषिकेश कुमार ने कहा कि उन्हें स्कूल की स्थिति की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि स्कूल भवन की मरम्मत का काम शुरू कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्कूल में आवश्यकता के अनुसार जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। जिला प्रशासन का प्रयास है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिल सके।

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