रांची। झारखंड में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए संदिग्ध मरीजों के आठ सैंपल में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके बाद सभी जिलों के सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेज और जिला सर्विलांस पदाधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या है H1N1?
H1N1 इन्फ्लुएंजा-A वायरस का एक सबटाइप है। वर्ष 2009 में इसी वायरस से वैश्विक महामारी फैली थी। बाद में यह मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस का हिस्सा बन गया और अलग-अलग देशों में समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे। इसलिए वर्तमान में H1N1 संक्रमण मिलने का मतलब 2009 जैसी नई महामारी शुरू होना नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मौसमी इन्फ्लुएंजा एक संक्रामक श्वसन बीमारी है। अधिकांश मरीज करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और कुछ अन्य हाई-रिस्क लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है।
कोरोना से कितना अलग है H1N1?
रांची के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हिमालय झा के मुताबिक H1N1 से बचाव के लिए मास्क पहनना, भीड़ से दूरी रखना और संक्रमित व्यक्ति को अलग रखना उपयोगी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि H1N1 को लेकर अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है।
H1N1 संक्रमण में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान, नाक बहना और कुछ मामलों में उल्टी या पेट दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में निमोनिया विकसित हो सकता है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह से पीड़ित लोग, अस्थमा या हृदय-फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले मरीज और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, लगातार बिगड़ती हालत, असामान्य सुस्ती या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कैसे फैलता है H1N1?
H1N1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली बूंदों और कणों से फैल सकता है। संक्रमित सतह या हाथ के संपर्क के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों में इसका प्रसार तेजी से हो सकता है।
क्या है बचाव का तरीका?
नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोना, बिना धुले हाथों से चेहरे को न छूना और खांसते-छींकते समय मुंह ढकना जरूरी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़, स्कूल और कार्यस्थल से दूरी रखना संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर सकता है। घर और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन भी जरूरी है।
इन्फ्लुएंजा वैक्सीन के संबंध में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। हाई-रिस्क लोगों के लिए टीकाकरण विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग तैयार
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव ने कहा कि लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहना चाहिए। विभाग सीजनल इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए तैयार है।
रांची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि रांची में H1N1 संक्रमण के मामले सामने आने की जानकारी मिली है। मुख्यालय के निर्देश पर सदर अस्पताल में 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में जरूरी दवाओं की उपलब्धता है और लोगों से अपील है कि घबराने के बजाय संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं।

