जमशेदपुर: सफलता हासिल करने के बाद अक्सर लोग अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपनी उपलब्धियों के साथ समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लेते हैं। मानगो मरीना सिटी की रहने वाली अंशिका ऐसी ही युवा छात्रा हैं। पूर्वी सिंहभूम की 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम की टॉपर रह चुकीं अंशिका आज जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने में जुटी हैं। खास बात यह है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए वह किसी तरह की फीस नहीं लेती हैं।
अंशिका वर्तमान में ग्रेजुएट कॉलेज में हिस्ट्री ऑनर्स की पढ़ाई कर रही हैं और उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना है। पढ़ाई के साथ-साथ वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का काम भी कर रही हैं।
अंशिका ने बताया कि जब उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, तब उन्हें महसूस हुआ कि शहर में ऐसे कई बच्चे हैं, जिनमें पढ़ने की पूरी इच्छा है, लेकिन आर्थिक परेशानियां उनकी राह में बाधा बन रही हैं। इसी अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर के निक्को पार्क के बाहर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में बच्चों की संख्या कम थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके पास पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। वर्तमान में अंशिका सप्ताह में दो दिन बच्चों को पढ़ाती हैं। वह ऐसे बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं, जो आर्थिक कारणों से नियमित कोचिंग या ट्यूशन का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
पढ़ाई के अलावा अंशिका को कला में भी विशेष रुचि है। इसी रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ‘अंशिका आर्ट गैलरी’ के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के साथ कला से जोड़ने की पहल की है। उनका प्रयास है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रचनात्मक क्षमता का भी विकास हो। मानगो के मरीना सिटी में वह एक कोचिंग सेंटर भी चलाती हैं, जहां बच्चों को आर्ट सिखाया जाता है।
अंशिका का सपना केवल खुद IAS अधिकारी बनने तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा साबित करने का समान अवसर मिले। उनका मानना है कि प्रतिभा किसी आर्थिक वर्ग की मोहताज नहीं होती। जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है। इसी सोच के साथ अंशिका अपनी पढ़ाई के साथ बच्चों के भविष्य को भी आकार देने में जुटी हैं।

