नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर तीखा पलटवार किया। शनिवार, 26 सितंबर को अपने संबोधन में जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए उसे “आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाला” बताया और कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने या उसके परिणामों से बचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
जयशंकर का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण के एक दिन बाद आया। शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया था और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी उल्लेख किया था।
‘आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिश नहीं चलेगी’
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि एक ऐसे पक्ष ने, जो लगातार आतंकवाद में लिप्त रहा है, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। उनके अनुसार, आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए, लेकिन “यह स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद लंबे समय से वैश्विक शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जब आतंकवाद को सीमा पार उद्देश्य के साथ राज्य का समर्थन मिलता है, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन जाता है।
‘आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल करेगा’
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद से अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो टॉलरेंस नीति में किसी तरह की कमी नहीं आने की बात कही। साथ ही उन्होंने आतंकवाद की वित्तीय व्यवस्था को उजागर करने और उस पर रोक लगाने की जरूरत बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद और दोस्ती तथा सद्भाव एक साथ नहीं चल सकते। उनके मुताबिक, आतंकवाद की बुनियाद पर बनी समझ को स्वाभाविक रूप से दोबारा विचार के दायरे में लाया जाएगा और आतंकवाद के जिम्मेदार पक्ष को अपनी नीति बदलनी होगी।
शहबाज शरीफ ने UNGA में उठाया था कश्मीर का मुद्दा
जयशंकर का बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के UNGA संबोधन के अगले दिन आया। शरीफ ने अपने करीब 23 मिनट के भाषण में कश्मीर का मुद्दा उठाया और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने इस संघर्ष को खत्म कराने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का भी उल्लेख किया था।
इसके जवाब में जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसके तर्कों पर सवाल उठाए और आतंकवाद को लेकर भारत की स्थिति दोहराई।
युद्ध और वैश्विक शांति पर भी भारत का संदेश
अपने संबोधन में जयशंकर ने केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों की बात नहीं की, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्धों को समाप्त करने तथा वैश्विक शांति और स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और उसके वित्तीय स्रोतों पर कार्रवाई की जरूरत को भी रेखांकित किया।

