नई दिल्ली। जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में जातियों का भरोसेमंद और एकरूप आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्पों की सूची को जरूरी बताया था, तो जनगणना 2027 में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।
मुख्य बिंदु :
- जाति जनगणना को लेकर जयराम रमेश ने केंद्र से पूछा सवाल
- 2021 के सुप्रीम कोर्ट हलफनामे का दिया हवाला
- जातियों के समान आंकड़ों के लिए विकल्प सूची को बताया था उपयोगी
- बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षणों का भी किया जिक्र
- खरगे ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर विकल्प सूची का सुझाव दिया था
- केंद्र पर जाति जनगणना को लेकर गंभीर नहीं होने का लगाया आरोप
2021 के हलफनामे का दिया हवाला
जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 21 सितंबर 2021 को केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जाति जनगणना की मांग को खारिज किया था। हालांकि, इसी हलफनामे के पैरा 12 (डी) में सरकार ने जातियों की रजिस्ट्री तैयार करने के लिए जातियों के चयन में विकल्पों की सूची को बेहतर तरीका बताया था।
रमेश के अनुसार, सरकार का मानना था कि इस तरह की सूची से जातियों के भरोसेमंद और समान आंकड़े जुटाने में मदद मिल सकती है।
2027 की जनगणना में प्रावधान क्यों नहीं?
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार ने खुद 2021 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जातियों का समान और विश्वसनीय आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्प सूची की जरूरत बताई थी, तो जनगणना 2027 में ऐसा प्रावधान क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
बिहार और तेलंगाना के सर्वेक्षणों का जिक्र
जयराम रमेश ने कहा कि बिहार और तेलंगाना में किए गए जाति सर्वेक्षणों से पहले भी इसी तरह की विकल्प सूची तैयार की गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जातियों की पहचान और आंकड़े जुटाने के लिए ऐसी सूची उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था।
केंद्र पर गंभीर नहीं होने का आरोप
रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है और इसे रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा कर अपना पहले का रुख बदल दिया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब जातियों के विश्वसनीय और समान आंकड़े जुटाने के लिए विकल्प सूची को पहले जरूरी माना गया था, तो आगामी जनगणना में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।

