नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग की ओर मार्च और धरने के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर चुनावी हार से बौखलाने और बिना सत्यापन वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने की पैरवी करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस ऐसी व्यवस्था से किसे फायदा पहुंचाना चाहती है।
‘चुनावी हार के नशे में चूर है कांग्रेस’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार से पार्टी बौखला गई है और देश को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व की सोच ‘‘पराजित और विनाशकारी मानसिकता’’ से प्रभावित हो गई है। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं को बिना सत्यापन के मतदान का अधिकार देने के पक्ष में क्यों है और इससे किसे लाभ मिलेगा।
SIR को लेकर BJP ने कांग्रेस से पूछा सवाल
INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन मुख्य रूप से SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और विश्वसनीय बनाने के लिए मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान तथा सत्यापन जरूरी है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के पुराने बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि यदि पार्टी पहले मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम होने की बात कहती रही है, तो अब सत्यापन की प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जा रहा है।
राहुल गांधी के पुराने बयानों का भी किया जिक्र
बीजेपी नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अलग-अलग समय पर मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम होने की बात उठा चुके हैं।
त्रिवेदी ने सवाल किया कि कांग्रेस उस समय सही थी या अब सही है। उनके मुताबिक, यदि कांग्रेस पहले डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने की बात कर रही थी, तो अब मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, ये बीजेपी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतदाता अधिकार, पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया पर अलग-अलग दावे हैं।
‘राहुल गांधी को चुनाव आयोग से मिलना ही नहीं था’
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस आरोप पर भी सवाल उठाया, जिसमें विपक्ष ने दावा किया कि उसे चुनाव आयोग से मिलने का मौका नहीं दिया गया।
बीजेपी नेता ने चुनाव आयोग के बयान का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित समय तक कांग्रेस या INDIA ब्लॉक की ओर से औपचारिक बैठक का अनुरोध नहीं मिला था। उन्होंने दावा किया कि आयोग की ओर से ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी को भेजने का विकल्प दिया गया, लेकिन विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखना नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रदर्शन करना था।
300 सांसदों के दावे पर भी BJP का हमला
बीजेपी ने INDIA ब्लॉक के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन में करीब 300 सांसद शामिल थे।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मौके पर कांग्रेस के सभी सांसद भी मौजूद नहीं दिखाई दिए, ऐसे में 300 सांसदों के दावे पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक ‘ड्रामा’ करार दिया।
राहुल गांधी ने भी BJP और चुनाव आयोग पर बोला हमला
इससे पहले राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला था। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
इसके बाद विपक्षी सांसद धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी पुलिस बैरिकेड पर भी चढ़े और हाथ में तिरंगा लेकर नजर आए। बाद में पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया।
विपक्ष की मुख्य मांगों में SIR को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है।
चुनाव आयोग बनाम विपक्ष: बढ़ता राजनीतिक टकराव
इस पूरे विवाद ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
एक ओर INDIA ब्लॉक SIR को लेकर सवाल उठा रहा है और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है, वहीं बीजेपी विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और चुनावी हार के बाद राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगा रही है।
अब देखना होगा कि इस राजनीतिक टकराव का अगला चरण क्या होता है और क्या विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच किसी औपचारिक बातचीत का रास्ता निकलता है।

