गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले में मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच कालीपीठ मंदिर परिसर में जेसीबी की मदद से अस्थायी तालाब तैयार किया गया। इसके बाद पांडुबथान स्थित कालीपीठ में स्थापित मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा का विसर्जन परिसर में ही करने की व्यवस्था की गई। राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति नहीं मिलने और पुराने रास्ते की बदहाल स्थिति के कारण पूजा समिति को यह वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।
विसर्जन स्थल को लेकर प्रशासन और पूजा समिति में विवाद
गोड्डा के कालीपीठ मंदिर में इस वर्ष मां दुर्गा की बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई थी। पूजा संपन्न होने के बाद प्रतिमा विसर्जन के लिए पूजा समिति ने शहर के राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति मांगी थी। समिति का कहना था कि पुराने रास्ते की स्थिति जर्जर है और वहां से बड़ी प्रतिमा ले जाने में परेशानी हो सकती है। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी जताई गई थी।
हालांकि, जिला प्रशासन ने विधि-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला देते हुए पुरानी व्यवस्था के अनुसार स्थानीय तालाब में विसर्जन करने का निर्देश दिया। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी, जिसके कारण निर्धारित समय पर प्रतिमा का विसर्जन नहीं हो पाया।
जेसीबी से खुदवाया गया अस्थायी तालाब
विसर्जन को लेकर विवाद के बीच पूजा समिति ने कालीपीठ मंदिर परिसर में ही जेसीबी की मदद से गड्ढे की खुदाई कराई। इसमें पानी भरकर अस्थायी तालाब तैयार किया गया, ताकि मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जा सके।
पूजा समिति की संचालिका वंदना दुबे के अनुसार, बड़ी प्रतिमा को पुराने रास्ते से ले जाना मुश्किल था। राजकचहरी तालाब में विसर्जन की अनुमति नहीं मिलने के बाद परिसर में ही वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया गया।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर की थी तैनाती
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कालीपीठ परिसर में दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की थी। प्रशासन का कहना था कि विसर्जन की पुरानी व्यवस्था में अचानक बदलाव करने से विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
इस मामले ने धार्मिक आयोजन के दौरान प्रशासनिक नियमों और पूजा समिति की व्यावहारिक समस्याओं के बीच तालमेल की जरूरत को भी सामने रखा। अंततः परिसर में अस्थायी तालाब बनाने की व्यवस्था से प्रतिमा विसर्जन का वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया।
बड़ी प्रतिमा के कारण पैदा हुई परेशानी
पूजा समिति के अनुसार, पिछले वर्षों में छोटी प्रतिमा स्थापित की जाती थी, जिसे आसानी से स्थानीय तालाब तक ले जाकर विसर्जित कर दिया जाता था। इस बार बड़ी प्रतिमा स्थापित होने के कारण पुराने रास्ते से विसर्जन करना कठिन हो गया।
इसी समस्या के समाधान के लिए समिति ने वैकल्पिक विसर्जन स्थल तैयार कराया। इस पूरे घटनाक्रम ने गोड्डा में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था को लेकर चर्चा छेड़ दी।

