नई दिल्ली: देश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्यों को अपनी परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुसार तीन साल का रोडमैप तैयार करने की सलाह दी गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने राज्यों से राष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के अनुरूप अपनी कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।
केवल ड्रग्स की बरामदगी नहीं, पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
तीसरे राष्ट्रीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) सम्मेलन में ड्रग तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों ने हिस्सा लिया। इस दौरान ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और डिजिटल कड़ियों की जांच पर जोर दिया गया।
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है राष्ट्रीय रणनीति
नारकोटिक्स नियंत्रण के लिए तैयार विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है। इनमें प्रवर्तन, खुफिया एवं ऑपरेशन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, मांग में कमी और हानि नियंत्रण, तथा क्षमता निर्माण और समन्वय शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने इस तीन वर्षीय योजना में समयबद्ध लक्ष्य और जिम्मेदारियां तय की हैं। जुलाई 2026 में PIB की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, विजन डॉक्यूमेंट में विभिन्न हितधारकों के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
एंट्री प्वाइंट से लेकर स्थानीय नेटवर्क तक कार्रवाई
सम्मेलन में ड्रग कार्टेल पर तीन स्तरों पर कार्रवाई की रणनीति पर जोर दिया गया—देश में ड्रग्स के प्रवेश या उत्पादन का स्थान, अंतरराज्यीय परिवहन नेटवर्क और जिलों में सक्रिय स्थानीय बिक्री नेटवर्क।
इसके साथ ही जिलों को ड्रग्स के उत्पादन या प्रवेश वाले क्षेत्र, ट्रांजिट कॉरिडोर और खपत वाले क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। वित्तीय जांच और डिजिटल लिंक की पहचान को भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट पर भी नजर
नई चुनौतियों में सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर केमिकल्स का दुरुपयोग, डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और नई संचार तकनीकों के जरिए होने वाली तस्करी शामिल है। सम्मेलन में इन माध्यमों से जुड़े मामलों की जांच के लिए राज्यों में विशेष क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया।
2029 तक ड्रग-फ्री भारत का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 2029 तक भारत को ड्रग-फ्री बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 2026-29 का तीन वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय के जरिए कार्रवाई को आगे बढ़ाने की योजना है।
तीसरे ANTF सम्मेलन में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने भी 2026-29 के राष्ट्रीय विजन डॉक्यूमेंट को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

