नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में सफर का अनुभव कई बार यात्रियों के लिए यादगार बन जाता है। ऐसा ही अनुभव ब्रिटिश यात्री काय और उनके तुर्की मूल के साथी गोगो को वीरभूमि एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कूपे में सफर के दौरान मिला। ट्रेन के भीतर निजी केबिन, साफ-सुथरी चादरें, बाथरूम में शॉवर और गीजर जैसी सुविधाएं देखकर दोनों हैरान रह गए। सफर के दौरान जब उनके केबिन में गर्मागर्म डोमिनोज पिज्जा पहुंचा, तो उनकी खुशी और बढ़ गई। इस यात्रा का वीडियो अब चर्चा में है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सफर के लिए फर्स्ट एसी कूपे का किराया करीब 1900 रुपये बताया गया। विदेशी यात्रियों ने केबिन की सुविधाओं और आराम की तुलना होटल के कमरे से की। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा, क्योंकि लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा के दौरान उन्हें निजी जगह और कई उपयोगी सुविधाएं एक साथ मिलीं।
होटल के कमरे जैसा लगा ट्रेन का कूपे
ट्रेन में चढ़ने के बाद दोनों यात्रियों ने सबसे पहले अपने निजी कूपे का जायजा लिया। वहां साफ-सुथरी चादरें, तकिए और कंबल व्यवस्थित तरीके से रखे थे। इसके अलावा चार्जिंग पॉइंट, पढ़ने के लिए लाइट, सामान रखने की जगह और बड़ा शीशा भी मौजूद था।
केबिन में पर्याप्त जगह देखकर गोगो ने उसका आकार भी मापने की कोशिश की। उनके अनुमान के मुताबिक, कूपे करीब 10 वर्ग मीटर का था। इसकी जगह और सुविधाओं ने उन्हें काफी प्रभावित किया। काय को यह केबिन उनके कुछ होटलों के कमरों से भी बड़ा लगा।
बाथरूम में शॉवर और गीजर देख चौंके
इस यात्रा का एक और दिलचस्प पहलू कूपे का बाथरूम रहा। गोगो जब बाथरूम देखने पहुंचे, तो वहां शॉवर और पानी गर्म करने के लिए गीजर जैसी सुविधाएं देखकर हैरान रह गए। ट्रेन के भीतर इस तरह की व्यवस्था उनके लिए अप्रत्याशित थी।
दोनों यात्रियों ने केबिन की साफ-सफाई और सुविधाओं को अपने सफर का खास हिस्सा बताया। उनके अनुभव ने यह भी दिखाया कि भारतीय रेलवे की अलग-अलग श्रेणियों में मिलने वाली सुविधाएं विदेशी पर्यटकों के लिए कितनी दिलचस्प हो सकती हैं।
चलती ट्रेन में पहुंचा डोमिनोज पिज्जा
सफर के दौरान सबसे सुखद सरप्राइज तब मिला, जब एक वेंडर उनके कूपे में डोमिनोज पिज्जा लेकर पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, पिज्जा की कीमत करीब 220 रुपये थी। ट्रेन के भीतर गर्मागर्म पिज्जा की डिलीवरी देखकर दोनों यात्री काफी खुश हुए।
गोगो ने ट्रेन में पिज्जा पहुंचाने वाले वेंडर के काम की तारीफ की। उनके लिए यह अनुभव केवल यात्रा की सुविधा तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय ट्रेनों में मिलने वाली खानपान सेवाओं को करीब से देखने का अवसर भी था।
उज्जैन के महाकाल दर्शन के लिए जा रहे थे यात्री
कूपे से बाहर निकलकर गोगो ने ट्रेन के दूसरे डिब्बों को भी देखा। इस दौरान उनकी मुलाकात गुजरात के प्रतीक और हेमंत नाम के यात्रियों से हुई। दोनों उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे।
इस बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि ट्रेन से सफर करने वाले कई यात्री धार्मिक यात्रा के लिए भी जा रहे हैं। इससे उन्हें भारतीय रेल यात्रा के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू को समझने का मौका मिला।
तय समय से पहले इंदौर पहुंची ट्रेन
यात्रा का एक और अनुभव दोनों के लिए सुखद रहा। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन इंदौर पहुंचने के निर्धारित समय से करीब 30 मिनट पहले पहुंच गई। स्टेशन की साफ-सफाई और पूरी यात्रा के अनुभव से दोनों यात्री काफी प्रभावित नजर आए।
सफर समाप्त होने पर दोनों ने कहा कि वे ट्रेन से उतरना नहीं चाहते थे और चाहते थे कि यह यात्रा कुछ और समय तक चलती रहे। उनके इस अनुभव का वीडियो इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

