-अपर सचिव की जांच और कार्रवाई के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन खामोश
अजय निराला/ उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड में 15वें वित्त आयोग के पंचायत समिति मद की योजनाओं में करीब 70 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब हजारीबाग जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता पवन कुमार यादव ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत रिपोर्ट मांगी। आरटीआई से प्राप्त सरकारी दस्तावेज और योजनाओं से जुड़े कागजात को देखने के बाद अधिवक्ता ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए विस्तृत आवेदन मुख्य सचिव को सौंपा। इस आवेदन और संलग्न कागजात पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के अपर सचिव फुलेन्द्र शर्मा ने पत्र संख्या 2046 दिनांक 10 जुलाई 2026 के माध्यम से इन दस्तावेज के आधार पर पूरे मामले की गहनता से जांच करने तथा जांचोपरांत अग्रतर दोषियों पर विधि सम्मत कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने का कड़ा आदेश जारी किया था। लेकिन विडंबना देखिए कि शासन के शीर्ष स्तर से जांच और कार्रवाई के निर्देश मिलने के बावजूद, हजारीबाग जिला प्रशासन और मुख्य सचिव कार्यालय के स्तर पर भी मामला ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है। निर्देश जारी होने के हफ्तों बीत जाने के बाद भी जिला स्तर पर जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन पूरी फाइल को दबाकर बैठा है।
अध्यक्ष, सचिव, इंजीनियर और वेंडर की भूमिका पर उठाए गए सवाल
अधिवक्ता पवन कुमार यादव द्वारा मुख्य सचिव को प्रेषित आवेदन और साक्ष्यों के अनुसार, योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। नियमों के मुताबिक पंचायत समिति मद के पैसे की निकासी प्रखंड विकास पदाधिकारी (सचिव) और प्रखंड प्रमुख (अध्यक्ष) के संयुक्त हस्ताक्षरों से होती है। आरोप है कि ‘लाभुक समिति’ को दरकिनार करते हुए एक ही चहेते ठेकेदार (वेंडर) को भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई। इस पूरी प्रक्रिया और धरातल पर हुए कार्यों के तकनीकी मूल्यांकन को लेकर कनीय अभियंता और संबंधित वेंडर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
आवेदन में इन पदाधिकारियों और वेंडर को जांच के दायरे में लाने की मांग
प्रस्तुत कागजातों के आधार पर इस कथित ₹70 लाख के मामले में निम्नलिखित चेहरों को नामजद करते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की गई है। अखिलेश कुमार तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सचिव, पंचायत समिति, बिष्णुगढ़। जैबुन निशा प्रमुख सह अध्यक्ष, पंचायत समिति, बिष्णुगढ़। वीरेंद्र यादव कनीय अभियंता (Junior Engineer), बिष्णुगढ़। प्रकाश रजवार संचालक, मनवा इंटरप्राइजेज, भेलवारा (लाभार्थी वेंडर)का नाम शामिल है।
मास्टर रोल में बड़ी गड़बड़ी : एक ही समय और तारीख पर दो अलग योजनाओं में काम करते दिखाया
आवेदन में दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्तिका (M.B.) और मास्टर रोल के संधारण में घोर लापरवाही और विसंगतियां बरती गई हैं। कागजातों में सबसे हैरान करने वाली गड़बड़ी यह सामने आई है कि मजदूरों को एक ही समय और एक ही तारीख पर दो अलग-अलग विकास योजनाओं में काम करता हुआ दिखाकर सरकारी राशि की निकासी कर ली गई है, जो व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है। इसके अलावा ऐसे लोगों के नाम भी मास्टर रोल में दर्ज हैं जो कार्यस्थल पर उपस्थित ही नहीं थे।
आनंद कुमार, पिता: बंधन महतो: योजना की स्वीकृति से पूर्व ही विदेश (सऊदी अरब) जा चुके थे, लेकिन मास्टर रोल में उनके कथित हस्ताक्षर बनाकर राशि की निकासी दर्शाई गई (जिसका शपथ पत्र भी संलग्न है)। आवेदन के अनुसार, यह कानूनन गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रमोद कुमार, गोदिया देवी एवं अनीता देवी: इनके नामों का भी मास्टर रोल में गलत इस्तेमाल कर राशि निकासी की बात कही गई है, जबकि इन लोगों ने स्वयं शपथ पत्र देकर इस कार्य की जानकारी होने से इनकार किया है।
सचिवालय का निर्देश पर जिला प्रशासन का टालमटोल
विभागीय अपर सचिव के स्पष्ट निर्देश और अधिवक्ता द्वारा मुख्य सचिव को दिए गए आवेदन में कानूनी प्रावधानों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत मामले की पूरी जांच कर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही गड़बड़ी साबित होने पर राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।
इसके बावजूद, हज़ारीबाग जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस संवेदनशील मामले पर जांच को आगे बढ़ाने या कोई ठोस कदम उठाने में शिथिलता बरती जा रही है। प्राप्त सरकारी कागजातों के आधार पर उच्च स्तरीय आदेश होने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों का यह टालमटोल वाला रवैया सरकार के “जीरो टॉलरेंस” के दावों पर सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही आदेश के आलोक में जांच पूरी कर वास्तविक दोषियों पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा, तो इस मामले को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा। जिसकी पूरी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।



