देवघर। देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा के अवसर पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर से जुड़ी प्राचीन पौराणिक मान्यताएं एक बार फिर चर्चा में हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं और वास्तुशिल्प से जुड़ी मान्यताओं के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ धाम परिसर के कई मंदिरों का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने किया था। इनमें बाबा बैद्यनाथ मंदिर, माता शक्ति मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर समेत अन्य मंदिरों का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास भी है कि मंदिर का मौजूदा स्वरूप भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत शिल्पकला का उदाहरण है।
गर्भगृह में दूसरा दरवाजा बनाने की कोशिश का क्या है दावा?
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के वरिष्ठ पंडा और ज्योतिषाचार्य बाबा झलक के अनुसार, मंदिर को जिस स्वरूप में भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी मान्यता में बताया जाता है, उसका मूल स्वरूप आज भी बरकरार है। उनके अनुसार, मंदिर के निर्माण से जुड़ी कई ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं, जो सदियों से श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।
उनका दावा है कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर के गर्भगृह से दूसरा रास्ता या दरवाजा बनाने की कोशिश पहले कई बार की गई। इस काम के लिए बाहर से इंजीनियरों को भी बुलाए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, दूसरा दरवाजा बनाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी।
बाबा झलक के अनुसार, निर्माण के दौरान दीवार पर छेनी-हथौड़ी चलाने पर लाल रंग का पदार्थ निकलने की घटना भी बताई जाती है। इस तरह की घटनाओं के बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाया गया। हालांकि, ये बातें स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और कथनों पर आधारित हैं।
लक्ष्मी नारायण मंदिर के अधूरे रहने की भी है मान्यता
बाबा बैद्यनाथ धाम परिसर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर को लेकर भी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालुओं के बीच कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा से जुड़ा हुआ है, लेकिन निर्माण के दौरान सुबह हो जाने के कारण इसका काम पूरा नहीं हो सका।
श्रद्धालुओं का मानना है कि आज भी मंदिर में उस अधूरे निर्माण की झलक देखी जा सकती है। मंदिर की वास्तुकला और इससे जुड़ी कथाएं बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का विषय रहती हैं।
विश्वकर्मा पूजा पर बढ़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के मजिस्ट्रेट कमलेश कुमार के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।
मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में उसके मौजूदा स्वरूप और धार्मिक परंपराओं का भी ध्यान रखा जाता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था किए जाने के बावजूद मंदिर के मूल स्वरूप में बदलाव से जुड़े विषयों पर धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखा जाता है।
भगवान विश्वकर्मा और बैद्यनाथ धाम की मान्यताएं
भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धार्मिक परंपरा में देवताओं के शिल्पकार के रूप में माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारीगर, इंजीनियर और विभिन्न तकनीकी एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोग उनकी पूजा करते हैं।
इसी अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम से जुड़ी भगवान विश्वकर्मा की कारीगरी की मान्यताएं भी चर्चा में आती हैं। मंदिर के वास्तुशिल्प, गर्भगृह से जुड़े कथित निर्माण प्रयास और लक्ष्मी नारायण मंदिर के अधूरे निर्माण की कहानी श्रद्धालुओं के बीच लंबे समय से प्रचलित है।
प्रमुख बिंदु
- देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम से भगवान विश्वकर्मा की कारीगरी जुड़ी होने की धार्मिक मान्यता।
- मंदिर परिसर के कई मंदिरों के निर्माण को लेकर पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
- गर्भगृह में दूसरा दरवाजा बनाने की कोशिश सफल नहीं होने का दावा।
- लाल रंग का पदार्थ निकलने की बात स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में कही जाती है।
- लक्ष्मी नारायण मंदिर के अधूरे रहने को लेकर भी पौराणिक कथा प्रचलित है।
- विश्वकर्मा पूजा के दिन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है।
- मंदिर की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन विशेष व्यवस्था करता है।

