नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम और पूर्वोत्तर राज्यों में संभावित आतंकवादी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से संचालित इस्लामिक आतंकवादी संगठनों से संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ने यह बयान गुरुवार को ईटीवी भारत के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान दिया।
सरमा ने कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षा बल उभरती सुरक्षा चुनौतियों से पूरी तरह अवगत हैं। उनके मुताबिक, असम में सक्रिय संदिग्ध चरमपंथी नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और हाल के दिनों में अलग-अलग स्थानों से कुछ संदिग्ध इस्लामिक आतंकवादियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति और भारत की पूर्वी सीमा पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल ही में राज्यसभा में पेश एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी आशंका जताई गई थी कि बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान जेलों से रिहा या फरार हुए आतंकवादी और कट्टरपंथी दोबारा भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इससे करीब 4,096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ने की आशंका है।
ड्रग तस्करी पर भी सरकार की नजर
हिमंत बिस्वा सरमा ने असम की भौगोलिक स्थिति को सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि राज्य को म्यांमार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, हाल में करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स और नशीले पदार्थों की खेप जब्त की गई है। उन्होंने चिंता जताई कि तस्कर म्यांमार और अरुणाचल प्रदेश के रास्ते नए रूट का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पहले मोरेह मार्ग ड्रग तस्करी के लिए प्रमुख रास्तों में शामिल था।
केंद्र के साथ बाढ़ और विकास पर चर्चा
दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। इन बैठकों में असम के विकास, बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
सरमा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के दौरान हाल की बाढ़ से क्षतिग्रस्त नेशनल हाईवे की मरम्मत जल्द कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने भविष्य में बार-बार आने वाली बाढ़ और अचानक आने वाली बाढ़ को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क को अधिक मजबूत बनाने की जरूरत बताई।
असम की बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम सरकार बाढ़ की समस्या के लिए स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तलाश रही है। इसके लिए IIT रुड़की और अन्य संस्थानों से तकनीकी सहयोग लेने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरमा के मुताबिक, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत अब तक करीब 130 से 140 करोड़ रुपये मिले हैं। हालांकि, बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान को देखते हुए राहत, पुनर्वास और बाढ़ नियंत्रण के लिए करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की योजना में बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के साथ पुलों और पुलियों का डिजाइन भी बाढ़ के वैज्ञानिक आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। सरकार का जोर तत्काल राहत के साथ-साथ ऐसे दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे पर है, जो भविष्य में बाढ़ के नुकसान को कम कर सके।

