नई दिल्ली, 09 सितंबर (आरएनएस): 10 सितंबर 1920 को कर्नाटक के बेल्लारी जिले के हडगली गांव में जन्मे कल्याणपुरम राधाकृष्ण राव, जिन्हें दुनिया प्रो. सी. आर. राव के नाम से जानती है, ने सांख्यिकी के क्षेत्र में ऐसी छाप छोड़ी, जिसका असर आज भी विज्ञान और तकनीक की दुनिया में दिखाई देता है। ‘नंबरों का जादूगर’ कहे जाने वाले राव ने सांख्यिकी को नई दिशा दी और उनके कई सिद्धांत आज आधुनिक डेटा साइंस और एआई के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
आंध्र यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ शानदार सफर
सी. आर. राव की शुरुआती शिक्षा आंध्र प्रदेश के गुंटूर, नुज्विडु और नंदीगामा में हुई। इसके बाद उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से गणित की पढ़ाई की। वर्ष 1940 में उन्होंने बीए और एमए की डिग्री हासिल की और दोनों में विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। विश्वविद्यालय ने उनके योगदान और उपलब्धियों के सम्मान में कैंपस में स्टैटिस्टिक्स विभाग के पास की सड़क का नाम ‘सी. आर. राव मार्ग’ रखा है।
एमए के बाद राव भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता पहुंचे। यहां उनकी प्रतिभा को संस्थान के संस्थापक और महान सांख्यिकीविद् प्रो. पी. सी. महालनोबिस ने पहचाना। यही वह दौर था, जिसने राव के वैज्ञानिक करियर को नई दिशा दी।
ऑक्सफोर्ड से कैम्ब्रिज तक, रिसर्च ने बदली राह
राव को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मानवशास्त्र विभाग से सूडान के जेबेल मोया क्षेत्र में मिले प्राचीन कंकालों और हड्डियों पर शोध का अवसर मिला। उनके इस काम से ‘Ancient Inhabitants of Jebel Moya’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक सामने आई।
इसी दौरान उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई जारी रखी और 1948 में पीएचडी पूरी की। कैम्ब्रिज में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् सर रोनाल्ड ए. फिशर से हुई। इन अनुभवों ने उनकी वैज्ञानिक सोच को और मजबूत किया और आगे चलकर सांख्यिकी के क्षेत्र में उनके कई महत्वपूर्ण योगदानों की नींव रखी।
ISI से अमेरिका तक, दुनिया ने माना लोहा
1948 में भारत लौटने के बाद सी. आर. राव ने फिर भारतीय सांख्यिकी संस्थान में काम शुरू किया और रिसर्च व ट्रेनिंग स्कूल का नेतृत्व संभाला। 1963 में वे ISI के निदेशक बने। प्रो. पी. सी. महालनोबिस के निधन के बाद 1976 तक उन्होंने संस्थान के निदेशक और सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
1979 में वे अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी से जुड़े और बाद में पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में भी अध्यापन और शोध किया। वर्ष 2001 में 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने वहां से सेवानिवृत्ति ली।
500 से ज्यादा शोधपत्र और 27 मानद डॉक्टरेट
सी. आर. राव का अकादमिक योगदान बेहद व्यापक रहा। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी और एससी.डी. के अलावा उन्हें दुनिया के 16 देशों की यूनिवर्सिटीज से 27 मानद डॉक्टरेट की उपाधियां मिलीं। उन्होंने करीब 500 वैज्ञानिक शोधपत्र लिखे, कई महत्वपूर्ण किताबें प्रकाशित कीं और लगभग 40 शोधार्थियों को पीएचडी के लिए मार्गदर्शन दिया।
सांख्यिकी की दुनिया में उनके नाम से जुड़े कई सिद्धांत और नियम आज भी शोध और डेटा विश्लेषण का आधार हैं। आधुनिक दौर में डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और एआई जैसी तकनीकों में सांख्यिकीय तरीकों की अहम भूमिका को देखते हुए उनके योगदान की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
प्रो. सी. आर. राव का निधन भले ही हो चुका हो, लेकिन उनके विचार, शोध और सांख्यिकी के सिद्धांत आज भी दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को दिशा दे रहे हैं। उनकी 106वीं जयंती पर उनका जीवन और योगदान नई पीढ़ी के लिए ज्ञान, अनुशासन और वैज्ञानिक जिज्ञासा की प्रेरणा बना हुआ है।

