नई दिल्ली: सिक्किम के एक मौजूदा जिला जज को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता जिला जज प्रज्वल खतिवाड़ा को अपनी शिकायत सिक्किम हाईकोर्ट के समक्ष रखने की छूट दी है।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका में शो-कॉज नोटिस के अलावा कथित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और उनकी एसीआर (Annual Confidential Report) से जुड़े मुद्दों को भी चुनौती दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोयल ने अदालत को बताया कि शो-कॉज नोटिस कथित तौर पर हाईकोर्ट की फुल कोर्ट या अधिकृत कमेटी की ओर से जारी नहीं किया गया। उनका दावा था कि नोटिस याचिकाकर्ता को उनके जूनियर द्वारा जारी किया गया और इसे रजिस्ट्रार जनरल को भी नहीं भेजा गया।
वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के एक तत्कालीन जज के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और उन्हें कथित तौर पर परेशान किया गया।
याचिकाकर्ता ने लगाए ये आरोप
याचिका के मुताबिक, प्रज्वल खतिवाड़ा ने 2005 में न्यायिक सेवा परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद सिक्किम न्यायिक सेवा ज्वाइन की थी। उन्होंने करीब 21 साल की सेवा में बेदाग रिकॉर्ड होने का दावा किया है। फरवरी 2023 से दिसंबर 2025 तक उन्होंने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में भी काम किया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि 2025 के अंत में हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज के खिलाफ शिकायत करने के बाद उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई शुरू हुई। आरोपों के मुताबिक, उनका अचानक तबादला किया गया, सुरक्षा वापस ली गई, निजी मामलों की जांच की गई और उनकी एसीआर को कथित तौर पर नष्ट कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके और परिवार के सदस्यों के खिलाफ गुमनाम शिकायतें प्रसारित की गईं, जिनमें बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना आरोप लगाए गए।
22 आरोपों वाला स्टेटमेंट ऑफ एलिगेशन
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जुलाई 2026 में उन्हें 22 आरोपों वाला स्टेटमेंट ऑफ एलिगेशन दिया गया। उनका कहना था कि आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं तथा उनके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज या साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। इस वजह से उन्हें अपना प्रभावी जवाब देने में भी कठिनाई हुई।
इसके बाद उन्हें शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कथित तौर पर कहा गया कि फुल कोर्ट ने उनके जवाब को असंतोषजनक पाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों हाईकोर्ट जाने को कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन हाईकोर्ट जज के खिलाफ याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी और संबंधित तत्कालीन चीफ जस्टिस, दोनों अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
CJI सूर्य कांत ने कहा कि अब हाईकोर्ट के जो जज कार्यरत हैं, वे मामले को न्यायिक पक्ष से सुन सकते हैं। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मामले के गुण-दोष पर तभी विचार करेगा, जब हाईकोर्ट न्यायिक पक्ष से मामले की सुनवाई करने में असमर्थ हो।
पीठ को हाईकोर्ट की फुल कोर्ट में हितों के टकराव से जुड़ी शुरुआती दलील में पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत हाईकोर्ट के समक्ष रखने की स्वतंत्रता देते हुए मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

