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  • हजारीबाग मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर सदर विधायक ने सीएम को लिखा पत्र, जताई आपत्ति

    कहा हजारीबाग में जन्में किसी स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण करने पर सरकार यथाशीघ्र करे पुनर्विचार

    हजारीबाग मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर सदर विधायक मनीष जायसवाल ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रविवार को पत्र लिखकर हजारीबाग वासियों की जनभावना से अवगत कराते हुये हजारीबाग में जन्में किसी स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण करने पर यथाशीघ्र पुनर्विचार करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है की बीते स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आपकी सरकार द्वारा झारखंड के विभिन्न संस्थानों का नाम बदलकर झारखंड के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर किया गया है। मैं सरकार की इस सोच का सहृदय स्वागत करता हूं, परंतु हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी शहीद शेख भिखारी के नाम से किया जा रहा है। अमर शहीद शेख भिखारी का जन्म रांची जिला स्थित एक बुनकर अंसारी परिवार में हुआ था। वे 1857 के जंग-ए-आजादी में लड़े थे, मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं। आगे उन्होंने सीएम को लिखा है शहीद शेख भिखारी का सम्मान करते हुए आपको हजारीबाग की जन भावनाओं से अवगत कराते हुए कहना चाहता हूं कि हजारीबाग की जनता- जनार्दन, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धगण इस फैसले से सहमत नहीं है। बेहतर होता हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण हजारीबाग के मिट्टी से जुड़े किसी स्वतंत्रता सेनानी यथा- जय मंगल पांडेय, राम नारायण सिंह, कृष्ण बल्लभ सहाय, सरस्वती देवी, लक्ष्मी नारायण दुबे के अतिरिक्त हजारीबाग में जन्मे एक शख्स जिनका संपूर्ण जीवन मेडिकल साइंस और मानवता को समर्पित रहा ऐसे विभूति- सह- भारतवर्ष के प्रथम “टेस्ट ट्यूब बेबी” के जनक डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय सहित अन्य विभूतियों के नाम पर किया जाता ।

    विधायक श्री जायसवाल ने पत्र में यह भी लिखा है कि रांची जिला में जन्मे अमर शहीद शेख भिखारी के नाम पर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने के बजाय राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल का नाम उनके नाम किया जाना अधिक उचित और सम्मानजनक होता। झारखंड सरकार द्वारा हजारीबाग की जन- भावनाओं का अनादर करते हुए आनन- फानन में यह घोषणा किया जाना कतई उचित प्रतीत नहीं होता है। विधायक श्री जायसवाल ने मुख्यमंत्री श्री सोरेन से आग्रह करते हुए हजारीबाग की जन- भावनाओं का कद्र करते हुए स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों व विभूतियों को सम्मान देते हुए हजारीबाग मेडिकल कॉलेज का नामकरण हजारीबाग के ही पावन मिट्टी में जन्मे किसी स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी या महान विभूतियों के नाम पर करने पर यथाशीघ्र पुनर्विचार करे ।

  • भारत की आजादी के लिए क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?

    खास बातें

    • इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया.
    • यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया.
    • भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था.

    नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है. 15 अगस्त (15 August) 1947 को भारत को अंग्रेजों के शासन से आजादी मिली थी और यही कारण है कि 15 अगस्त का दिन हर किसी के लिए बेहद खास है. भारत की आजादी (Independence Day) के दिन जवाहर लाल नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण दिया था. जिसे हम ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ से जानते हैं. यह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा संसद में दिया गया पहला भाषण है. हर स्वतंत्रता दिवस (India Independence Day) पर भारतीय प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं. लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था. लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था. भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा का निर्धारण भी 15 अगस्त को नहीं हुआ था. इसका फैसला 17 अगस्त को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ. 

    ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 4 जुलाई 1947 को पेश किया गया. इस बिल में भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था. यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया और 14 अगस्त को बंटवारे के बाद 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत की आजादी की घोषणा की गई थी. भारत की आजादी के जश्न में महात्मा गांधी शामिल नहीं हुए थे. जब भारत को आजादी मिली थी तब महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे.

    लेकिन क्या आपने सोचा है कि देश की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख को ही क्यों चुना गया?  इस बारे में अलग-अलग इतिहासकारों की मान्यताएं भिन्न हैं. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सी राजगोपालाचारी के सुझाव पर माउंटबेटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख चुनी. सी राजगोपालाचारी ने लॉर्ड माउंटबेटन को कहा था कि अगर 30 जून 1948 तक इंतजार किया गया तो हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचेगी. ऐसे में माउंटबेटन ने 15 अगस्त को भारत की स्वतंत्रता के लिए चुना. 

  • पीटीआई

    रांची । पीटीआई-भाषा के पत्रकार पीवी रामानुजम ने बुधवार की रात लालपुर थाना क्षेत्र के मोराबादी स्थित अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। पत्रकार का शव उनके आवास पर बने कार्यालय में फंदे से लटकी मिली। 

    घटना की सूचना के बाद लालपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की जांच पड़ताल में जुट गई। वहीं पत्रकार के सुसाइड की खबर के बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दुख जताया है।मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा कि पीवी रामानुजम का यूं चले जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी पत्रकारिता से कई पत्रकारों को मार्गदर्शन एवं प्रेरणा मिली है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। मेरी संवेदना उनके परिजनों के साथ हैं। भगवान उन्हें दुःख की इस घड़ी को सहन करने की शक्ति दें।

    पत्नी ने देखा तो पुलिस को दी जानकारी

    समाचार एजेंसी के ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम की पत्नी ने गुरुवार की सुबह शव को फंदे से लटकता देखा तो शोर मचाते हुए पड़ोसियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामले की जानकारी लालपुर पुलिस को दी गई। जिस घर में ब्यूरो चीफ ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है उसी घर में समाचार एजेंसी का दफ्तर भी है।

    उधर, ब्यूरो चीफ के आत्महत्या किए जाने की सूचना के बाद लालपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। पुलिस जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि पीवी रामानुजम पिछले कुछ दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। हालांकि मृतक की पत्नी ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि वे किसी बात को लेकर तनाव में थे या नहीं, इसकी जानकारी उन्होंने कभी भी मुझे नहीं होने दी।

    पत्रकार की पत्नी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने बातचीत भी करना बंद कर दिया था। बताया जा रहा है कि पीवी रामानुज के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा है जो ओडिशा में रहता है। पुलिस पूरे मामले को आर्थिक तंगी और वर्क प्रेशर से जोड़कर जांच कर रही है। अब तक आधिकारिक तौर पर किसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि ब्यूरो चीफ के आत्महत्या की क्या वजह है।

  • तीन मासूम संग महिला ट्रेन के आगे कूदी

    ● माँ बेटे की मौके पर हुई मौत, 2 घायल

    पलामू: विश्रामपुर स्थित रेहला थाना क्षेत्र के सगौना गांव में बुधवार को एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ चलती मालगाड़ी के आगे कूद गई। घटना में महिला और उसके एक सात साल के बेटे की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक दूधमुहा बच्चा व पांच साल की लड़की गंभीर रूप से जख्मी हो गई। घायलों को मेदिनीनगर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ से डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दोनों बच्चों को रांची रिम्स रेफर कर दिया है।

    पति के साथ झगड़ा हुआ था

    बताया जा रहा है कि महिला का उसके पति के साथ अक्सर झगड़ा होता था और मंगलवार की रात भी दोनों में काफी विवाद हुआ था। इसके बाद महिला ने सारे बच्चों के साथ आत्महत्या की योजना बना डाली।महिला की पहचान सगौना गांव निवासी नागेंद्र राम की पत्नी 30 वर्षीय प्रियंका देवी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार नागेंद्र को शक था कि उसकी पत्नी का किसी से नजायज रिश्ता है। इसी बात को लेकर दोनों में अक्सर झगड़ा हुआ करता था। गांव में कई बार इस मामले को लेकर पंचायत भी बुलाई गई थी। सुलह होता और फिर दोनों में विवाद शुरू हो जाता। मंगलवार की रात भी नागेंद्र और प्रियंका देवी के बीच जमकर झगड़ा हुआ था।बुधवार सुबह होते ही प्रियंका अपने डेढ़ साल के दूधमुहे बेटे, सात साल का पुत्र आकाश व पांच साल की बेटी को लेकर रेलवे ट्रैक की ओर निकल गई। घर में इसकी किसी को कुछ भनक भी नहीं लगी। 

    महिला तीनों बच्चों को लेकर रेलवे ट्रैक पर आने वाली ट्रेन का इंतजार करने लगी। जैसे ही मालगाड़ी आई तीनों बच्चों को लेकर प्रियंका ट्रेन के आगे कूद गई। हादसे में मौके पर ही प्रियंका देवी और और उसके 7 साल के बेटे आकाश की मौत हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस व जीआरपी मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। 

  • डॉ. राकेश किरण बनें रांची विश्वविद्यालय कमिटी के अध्यक्ष

    उज्ज्वल दुनिया/ रांची ।  झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंध संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निरंजन महतो की अध्यक्षता में मोराबादी रांची में रांची विश्वविद्यालय इकाई की अतिआवश्यक बैठक संपन्न हुई। जिसमें रांची विश्वविद्यालय कमेटी के विभिन्न पदाधिकारी गण एवं विभिन्न महाविद्यालयों के सक्रिय सदस्य गण उपस्थित हुए।

    इस बैठक में सर्वसम्मति से रांची विश्वविद्यालय कमिटि का अध्यक्ष डॉ. राकेश किरण को बनाया गया।  इन्होंने अध्यक्ष पद को स्वीकार करते हुए कहा कि अपने पद की गरिमा को बनाये रखूंगा और संघ को हक अधिकार दिलाने के लिए हर समय तत्पर रहूंगा।

    बैठक में अनुबंध सहायक प्राध्यापकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। साथ ही अनुबंध प्राध्यापकों के निश्चित मासिक मानदेय और पूर्ण समायोजन पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया गया।

     संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.निरंजन महतो ने रांची विश्वविद्यालय इकाई के नए अध्यक्ष डॉ. राकेश किरण को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। साथ ही प्रदेश कमिटी के संगठन सचिव डॉ. जे.डी. राम, उप कोषाध्यक्ष डॉ. संगीता कुजूर और रांची विश्वविद्यालय कमिटि के उपाध्यक्ष डॉ. रिझु नायक, महासचिव श्री किशोर सुरीन, सचिव डॉ. रामप्रवेश कुमार,उप सचिव श्री बिरेंद्र उरांव, उप कोषाध्यक्ष श्री रवि कुमार, डॉ. शंकर मुंडा के अलावे विभिन्न महाविद्यालयों के सक्रिय सदस्य  शामिल थे।

  • विधायक दीपिका पांडेय और उनके परिवार के कई सदस्य कोरोना पॉजिटिव

    उज्ज्वल दुनिया \रांची ।  झारखंड में कोरोना का कहर जारी है लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है । सरकारी कर्मचारी पुलिसकर्मी डॉक्‍टर-नर्स के अलावे अब राज्‍य के मंत्री विधायक भी कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं । पहले राज्‍य के मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विधायक मथुरा महतो, विधायक सीपी सिंह,  विधायक लंबोदर महतो और अब महगामा से कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय भी कोरोना पॉजिटिव हो गई है ।  

    विधायक दीपिका पांडेय ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है । विधायक के साथ उनके परिवार के कई लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं । विधायक ने संपर्क में आये लोगों से कोरोना जांच कराने की अपील की है । दीपिका पांडेय ने ट्वीट कर लिखा है मेरा और मेरे परिवार का कोविड19 का रिपोर्ट पॉजिटिव आया है । हाल के दिनों में मैं कई लोगों से मिली हूं । डॉक्टर ने मुझे घर में आइसलोइशन में रखने का फ़ैसला किया है । आप में से जो लोग भी मेरे संपर्क में आए हैं, उनसे निवेदन है कि आप सब सावधानी बरतें । सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर उनके जल्‍द स्‍वस्‍थ होने की कामना की है ।

  • उपायुक्त ने आमजनों से की अपील, लैब छोड़ने से पहले ले लें एसआरएफ आईडी

    उज्ज्वल दुनिया \रांची ।  रांची के उपायुक्त छवि रंजन ने सभी रांची वासियों से अपील की है कि बिना एसआरएफ आईडी लिए कोविड 19 सैंपल जमा न करें। इसके साथ ही उन्होंने सभी लैब संचालकों से भी अपील की है कि एसआरएफ आईडी जारी किए बिना किसी भी व्यक्ति का ना सैंपल लिया जाए ना ही उनका कोविड टेस्ट रिपोर्ट जारी किया जाए। 

    आमज़नों से अपील अपने साथ रखें अपनी एसआरएफ आईडी

    उपायुक्त छवि रंजन ने आमजनों से अपील करते हुए कहा है कि जब भी आप कोविड टेस्ट के लिए किसी लैब में पहुंचें तो सैंपल देते समय अपनी एसआरएफ आईडी की जांच अवश्य कर लें। बिना एसआरएफ आईडी लिए लैब छोड़ कर न जाएं। अगर किसी लैब में बिना एसआरएफ आईडी दिए आपको सैंपल देने के लिए बाध्य किया जाता है तो इसकी जानकारी तुरंत ही जिला प्रशासन को दें। 

    सभी लैब संचालकों को हिदायत

    आमजनों को अपील करने के साथ-साथ उपायुक्त छवि रंजन ने रांची के सभी लैब संचालकों (जहां कोविड टेस्ट किया जाता हो) को भी नसीहत दी है कि अगर कोई व्यक्ति आपके लैब पर जांच कराने के लिए पहुंचता है तो उक्त व्यक्ति से संबंधित जानकारी आरटीपीसीआर एप पर अपडेट करते हुए तुरंत ही एसआरएफ आईडी जेनरेट करवा कर उपलब्ध करवाएं।  अगर किसी भी जगह से ऐसी जानकारी/शिकायत मिलती है कि एसआरएफ आईडी बताए बिना कोविड टेस्ट रिपोर्ट जारी किया गया है तो संबंधित लैब के खिलाफ पैंडेमिक एक्ट एवं आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी । 

  • जमीन विवाद में बच्ची को धारदार हथियार से जानलेवा हमला

    उज्ज्वल दुनिया \रांची ।  तमाड़ थाना क्षेत्र के राबो गांव में जमीन विवाद के मामले में एक युवक ने नाबालिग बच्ची पर धारदार हथियार से हमला कर उसे घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी घटनास्थल से भाग निकला। उधर, स्थानीय लोगों ने घायल बच्ची को इलाज के लिए अड़की अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं जानकारी के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची और घायल बच्ची का बयान दर्ज कर जांच पड़ताल में जुट गई।

    आरोपी सोमा मुंडा ने बच्ची के पिता को भी जमकर पीटा

    घायल बच्ची की पहचान 14 साल की चामी कुमारी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, जमीन विवाद के मामले में आरोपी 20 साल का सोमा मुंडा नाबालिग के घर पहुंचा और उसके पिता के साथ मारपीट करने लगा। इसके बाद 14 साल की चामी कुमारी ने बीच बचाव की नियत से दोनों को छुड़ाने की कोशिश की। इसी दौरान सोमा मुंडा ने चामी कुमारी के गर्दन पर धारदार हथियार से वारकर उसे घायल कर दिया। घटना के बाद नाबालिग को अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

    जल्द होगी आरोपी की गिरफ्तारी 

    घटना के संबंध में तमाड़ थाना प्रभारी चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि सूचना के बाद वे अड़की अस्पताल पहुंचे और बच्ची का बयान लिया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • झारखंड दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में बनेगा आत्मनिर्भर

    जन्माष्टमी पर मेधा डेयरी का खीर मिक्स उत्पाद लांचउज्ज्वल दुनिया 
    रांची। राज्य के कृषि, पशुपालन, मत्स्य एवं सहकारिता मंत्री बादल ने जन्माष्टमी के मौके पर रांची के होटवार स्थित मेधा डेयरी कार्यालय में आज संजीवनी हर्बल वाटिका और  ‘मेधा खीर मिक्स’ लांच किया।  इस मौके पर महगामा के पूर्व विधायक राजेश रंजन, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, राजेश गुप्ता छोटू,  दुमका जिलाध्यक्ष श्यामल किशोर सिंह,राँची महानगर अध्यक्ष संजय पाण्डेय समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

    कृषिमंत्री ने कहा कि देश में श्वेत क्रांति का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को जाता है, वे उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि झारखंड पूर्व में सिर्फ खनिज संपदा के लिए जाना जाता था, लेकिन अब दुग्ध उत्पादन में झारखंड आत्मनिर्भर बन रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गांव के किसानों और युवाओं के विकास का जो सपना देखा है, उसे पूरा करने की कोशिश की जा रही है।  

    खीर मिक्स 120 ग्राम के पैक में मेधा के सभी मिल्क बूथ और अन्य दुकानों में उपलब्ध होगा। उपभोक्ताओं के लिए इसकी कीमत 30रुपये निर्धारित की गयी है। मेधा खीर मिक्स रेडी टू इट खाने वाला उत्पाद है,जिसे बनाना बेहद सरल है। पैकेट की संपूर्ण सामग्री को 400 एमएल गर्म पानी में डालने के बाद उसे 1-2 मिनट तक चम्मच से अच्छा से मिलना है और अपनी इच्छानुसान गर्म अथवा ठंडा परोसा जा सकता है। इसे उपभोक्ता दूध के साथ भी पका सकते है और अपनी सुविधानुसान इसमें सूखे मेवे भी डाल कर परोसा जा सकता है।

    कार्यक्रम के उपरांत मंत्री बादल पत्रलेख ने मेधा संजीवनी हर्बल वाटिका का भी उद्घाटन किया,जिसमें कई प्रकार के औषधि पौधे लगाए गये हैं जिनसे किसान गाय के इलाज के इस्तेमाल में लाए जाते हैं।

  • डीजीपी एमवी राव मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

    उज्ज्वल दुनिया \रांची। झारखंड में 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी एमवी राव को प्रभारी डीजीपी बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दाखिल याचिका पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस बोपन्नना और वी रामसुब्रमणियम की अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रह्लाद नारायण सिंह ने एमवी राव को प्रभारी डीजीपी बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले के खिलाफ बताते हुए याचिका दायर की थी। 

    सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूछा कि किन परिस्थितियों में केएन चौबे को हटाया गया 

    वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पहले यूपीएससी ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखकर पूर्व के डीजीपी केएन चौबे को हटाने की वजह पूछी है। वहीं राज्य सरकार के द्वारा डीजीपी की बहाली के लिए पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम के पैनल पर किसी भी तरह की सुनवाई से इंकार कर दिया है। 

    यूपीएससी ने लिखा है कि केएन चौबे के दो साल का टर्म पूरा नहीं हुआ, ऐसे में उन्हें क्यों हटाया गया। जब तक हटाए जाने की वजह स्पष्ट नहीं होगी, यूपीएससी ने पैनल पर विचार करने से इंकार कर दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 16 मार्च 2020 को अचानक ही केएन चौबे को महज नौ माह के कार्याकाल के बाद हटाकर दिल्ली में आधुनिकीकरण का ओएसडी बना दिया था, वहीं एमवी राव को प्रभारी डीजीपी बना दिया गया था।

    यूपीएससी ने लिखा दो साल के भीतर डीजीपी को हटाना गलत

    यूपीएससी ने डीजीपी के पैनल लिस्ट के लिए भेजे गए पत्र के बाद राज्य सरकार को जो पत्र भेजा है, उसमें सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरूद्ध बताया गया है। यूपीएससी ने लिखा है कि 31 मई 2019 को राज्य सरकार ने केएन चौबे का नोटिफिकेशन बतौर डीजीपी निकाला था। यूपीएससी के इंपैनलमेंट कमेटी मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अंतर्गत भेजे गए नामों के आधार यह चयन दो सालों के लिए हुआ था। यूपीएससी ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि यूपीएससी के द्वारा राज्य के तीन वरीय अफसरों के नाम का पैनल भेजा जाएगा। अफसरों के बेहतर सर्विस रिकॉर्ड, सेवा की अवधि व पुलिस विभाग में अनुभवों के आधार पर इन तीन वरीय अफसरों में एक को राज्य सरकार को डीजीपी के पद पर दो सालों के लिए चुनना होगा। दो साल के भीतर इन पुलिस अधिकारियों को तब ही हटाया जा सकता है, जब इन्हें ऑल इंडिया सर्विस रूल्स में दोषी पाया गया हो, किसी मामले में न्यायालय के द्वारा सजा दी गई हो या शारीरिक वजहों से वह काम करने में अक्षम हों।

    सरकार को बतानी होगी केएन चौबे को हटाने की वजह

    यूपीएससी ने राज्य सरकार से केएन चौबे को हटाने की वजह पूछी है। पूछा गया है कि उन्हें किन वजहों से डीजीपी के पद से हटाया गया। क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में आने वाली किसी वजह से उन्हें हटाया गया है। राज्य सरकार को यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि बगैर वजह बताए सरकार के द्वारा नए डीजीपी की प्रतिनियुक्ति संबंधी पैनल भेजने पर विचार नहीं किया जा सकता।