काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह आई अचानक भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा समेत कई जिलों में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक तेज जलप्रवाह आने से घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि विभिन्न रिपोर्टों में 1,000 से अधिक लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय भी शामिल हैं।
बाढ़ से जुड़ी बड़ी बातें
- रसुवा के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में सुबह करीब 9 बजे अचानक बाढ़ आई।
- नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 95 मौतों की पुष्टि हुई है।
- अलग-अलग आंकड़ों के अनुसार 1,000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
- नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार सैकड़ों पर्यटक संपर्क से बाहर हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
- बाढ़ में सड़कें, पुल, घर और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हुए हैं।
- रसुवा से नुवाकोट, धादिंग और चितवन तक नदी किनारे के इलाकों में असर पहुंचा है।
- नेपाल में राहत और बचाव के लिए 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं।
- भारत ने राहत सामग्री और दवाइयों की मदद भेजी है तथा भारतीय वायुसेना के विमान भी स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।
- बिहार में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।
कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?
शुरुआती आकलन में बाढ़ के पीछे कई संभावित कारण सामने आए हैं। माना जा रहा है कि ल्हेंदे नदी में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा गिरने से नदी का प्रवाह बाधित हुआ। इसके बाद पानी जमा हुआ और अचानक अवरोध टूटने पर तेज गति से पानी नीचे की ओर बह निकला।
वहीं, तिब्बत क्षेत्र में सुबह 4.4 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था। इसके कारण हिमस्खलन या नदी में मलबा गिरने की संभावना की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
रसुवा में घटना से पहले बहुत ज्यादा बारिश दर्ज नहीं हुई थी। इसलिए स्थानीय बारिश को बाढ़ का मुख्य कारण नहीं माना जा रहा है।
रसुवा में सबसे ज्यादा तबाही
भोटेकोशी नदी के उफान से रसुवा के टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और आसपास के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया। कई बाजार और रिहायशी इलाके मलबे में तब्दील हो गए।
रसुवा से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। इसके अलावा कई पुल भी बह गए हैं।
13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित
बाढ़ का असर नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र पर भी पड़ा है। रसुवा और नुवाकोट में कम से कम 13 हाइड्रोपावर परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
20 मेगावाट की निर्माणाधीन लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना का पावरहाउस बाढ़ में बह गया। परियोजना से जुड़े करीब 60 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
भारतीय पर्यटकों को लेकर बढ़ी चिंता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कई विदेशी पर्यटक लापता हैं। इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी है। कुछ रिपोर्टों में 133 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में संख्या बदलती रही है।
लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्री भी शामिल बताए जा रहे हैं। रसुवागढ़ी मार्ग भारत से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता है।
तमिलनाडु के करीब 50 तीर्थयात्रियों के फंसे होने की भी जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार नेपाल की संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।
सुरक्षा बलों के जवान भी लापता
बाढ़ की चपेट में सुरक्षा बल भी आए हैं। नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर करीब 80 सुरक्षाकर्मी लापता बताए गए हैं, जिनमें नेपाली सेना के जवान भी शामिल हैं।
टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों के भी लापता होने की सूचना है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू अभियान
बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर हेलिपैड भी बाढ़ में बह जाने के कारण राहत अभियान में मुश्किलें आई हैं।
बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीम और एंबुलेंस भी भेजी जा रही हैं।
भारत में भी अलर्ट, बिहार पर नजर
नेपाल से निकलने वाली नदियों के कारण बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी का पानी आगे त्रिशूली और फिर गंडक नदी तंत्र तक पहुंच सकता है।
बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। गंडक नदी में करीब 3 मीटर तक की फ्लैश फ्लड वेव की आशंका के मद्देनजर प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया जा रहा है तथा जरूरत पड़ने पर नाव, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था करने की तैयारी है।
भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया और हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। भारत की ओर से राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
भारतीय वायुसेना के C-17 और C-130 विमान राहत एवं बचाव अभियान के लिए स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।
चीन में भी भूस्खलन और बाढ़ का असर
नेपाल के साथ तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में भी प्राकृतिक आपदा का असर देखने को मिला है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार वहां भूस्खलन के बाद 3 लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई है। चीन ने प्रभावित क्षेत्र में सैकड़ों बचावकर्मियों को तैनात किया है।
फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक जिस क्षेत्र में अचानक पानी का भारी प्रवाह आया, वहां अभी भी पानी और मलबे का बड़ा जमाव मौजूद है। यदि यह अवरोध टूटता है तो दोबारा तेज बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
एक साल पहले भी मची थी तबाही
भोटेकोशी नदी में पिछले वर्ष भी विनाशकारी बाढ़ आई थी। उस दौरान कई लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन के बीच संपर्क भी प्रभावित हुआ था। इस बार की आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड और ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे को सामने ला दिया है।

