HomeBreaking Newsहजारीबाग में मौत का कुआं! रैट-होल में दबकर मजदूर की मौत

हजारीबाग में मौत का कुआं! रैट-होल में दबकर मजदूर की मौत

-बिना पोस्टमार्टम ही कर दिया अंतिम संस्कार, पुलिस सो रही, CISF पकड़ रही कोयला!
-बड़कागांव में दर्जनों मौत की खदानें चल रही हैं, कोयला सीधे जा रहा बड़ी फैक्ट्रियों में फिर भी प्रशासन को कुछ नहीं दिख रहा?
अजय निराला, उज्जवल दुनिया संवाददाता
हजारीबाग। झारखंड में अवैध कोयला खनन ने एक और गरीब की जान ले ली। गुरुवार सुबह बड़कागांव प्रखंड के इंद्र गांव में अचानक अवैध भूमिगत कोयला खदान की चाल धंस गई। मिट्टी के नीचे दबकर 30 साल के कालेश्वर महतो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। कालेश्वर महतो गोंदलपुरा गांव के सिमराडीह टोला का रहने वाला था। पिता का नाम बाज़ो महतो है। पीछे छोड़ गया एक बेटा और दो मासूम बेटियां। पेट की आग बुझाने के लिए वो रोज मौत के कुएं में उतरता था, और आखिरकार वही कुआं उसकी कब्र बन गया।

सबूत मिटाने का आरोप
मजदूर की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खबर है कि शव का पोस्टमार्टम किए बिना ही आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर दिया गया, कथित तौर पर कानूनी जांच से बचने के लिए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर ये सच है तो ये बेहद गंभीर मामला है। आखिर किसके इशारे पर सबूत मिटाए गए?

इंद्रा-लुरुंगा में चल रहा है मौत का कारोबार
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इंद्रा, लुरुंगा, सेहदा-चपरी और खपिया क्षेत्रों में एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों अवैध कोयला खदानें धड़ल्ले से चल रही हैं। इनमें से कई खदानें आरक्षित वन भूमि पर स्थित हैं। यहां मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर संकरी, सुरंग जैसी खदानों में रेंगकर कोयला निकाल रहे हैं, जहां न छत का सहारा है, न वेंटिलेशन है, न आपातकालीन निकास है।

कोयला जा कहां रहा है?
इन अनाधिकृत खदानों से निकाला गया कोयला कथित तौर पर ट्रैक्टरों द्वारा स्थानीय स्टॉकयार्ड तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद इसे हाइवा और ट्रेलरों से अन्य स्थानों पर भेजा जाता है। सूत्रों का आरोप है कि ये अवैध कोयला रामगढ़ जिले के कुजू क्षेत्र और हजारीबाग जिले के गिद्दी थाना क्षेत्र में स्थित कुछ स्पंज आयरन संयंत्रों को सप्लाई किया जाता है।

प्रवर्तन एजेंसियां कहां हैं?
सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि सभी छापे और बरामदगी CISF द्वारा ही की जा रही हैं। ऐसा लगताहै कि राज्य पुलिस गहरी नींद में सो रही है। जिला प्रशासन, वन विभाग और जिला खनन विभाग इस मामले पर काबू पाने में क्यों लाचार बने हुए हैं? अगर क्षेत्र में दर्जनों खदानें चल रही हैं, तो कोयले का निष्कर्षण, परिवहन और भंडारण बिना हस्तक्षेप के कैसे हो रहा है? बड़कागांव की ये घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है। ये मानवीय जीवन, प्रशासनिक जवाबदेही और भारत के खनन कानूनों के प्रवर्तन का सवाल है। अनधिकृत खनन को संगठित करने और उससे लाभ कमाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

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