गढ़वा: जिले के जंगलों में जंगली हाथियों के बाद अब बाघ की मौजूदगी की सूचना से ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। रंका, भंडरिया, चिनिया, बरगढ़ और रमकंडा क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियों से लोग परेशान हैं। पिछले चार दिनों में हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बाघ द्वारा कई पालतू पशुओं का शिकार किए जाने की सूचना सामने आई है।
मुख्य बिंदु
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गढ़वा के जंगलों में बाघ की मौजूदगी की वन विभाग ने पुष्टि की
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रंका के जंगल में तीन बकरियों और एक बछड़े के मारे जाने की सूचना
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भंडरिया और बलीगढ़ क्षेत्र से भी बाघ की गतिविधियों की जानकारी
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पिछले चार दिनों में हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत
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वन विभाग ने ग्रामीणों को सुबह-शाम जंगल नहीं जाने की दी सलाह
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वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी और सर्च अभियान चला रही है
रंका के ढेगुरा जंगल में बाघ द्वारा तीन बकरियों और एक बछड़े का शिकार किए जाने की सूचना है। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के शिकार की जानकारी सामने आई थी। जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में मिले पदचिह्न सामान्य जंगली जानवरों के निशान से अलग हैं। इसके बाद इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर चर्चा तेज हो गई। जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी एबीन बेनी अब्राहम के अनुसार, भंडरिया और बलीगढ़ क्षेत्र से भी बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है।
पगमार्क की जांच के बाद वन विभाग अलर्ट
ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर वन विभाग की टीम संबंधित इलाकों में लगातार सर्च और निगरानी अभियान चला रही है। डीएफओ ने बताया कि जांच में मिले पगमार्क बाघ के होने की पुष्टि हुई है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को सुबह और शाम के समय जंगल की ओर जाने से बचने तथा अकेले वन क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
हाथियों के हमले से भी ग्रामीण परेशान
बाघ की मौजूदगी के बीच जंगली हाथियों का आतंक भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। पिछले चार दिनों में रंका और चिनिया इलाके में हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। बताया गया कि दोनों लोगों को हाथियों ने कुचलकर मार डाला।
इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी देखने को मिला और लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने वन विभाग से वन्यजीवों के हमलों से सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
डीएफओ के अनुसार, दोनों घटनाओं की जानकारी वन विभाग को मिली है और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने लोगों से एक बार फिर अपील की कि शाम के बाद और सुबह के शुरुआती समय में जंगल की ओर जाने से बचें।
इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष रोकने पर जोर
वन विभाग का कहना है कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। बाघ और हाथी दोनों ही वन पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में विभाग का जोर ग्रामीणों को जागरूक करने, निगरानी बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर है।
फिलहाल वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों से किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर खुद उसका पीछा करने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।

