देवघर। देवीपुर स्थित देवघर एम्स में डॉक्टरों ने जटिल न्यूरो सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस ऑपरेशन की खास बात यह रही कि सर्जरी के दौरान मरीज को पूरी तरह बेहोश नहीं किया गया, बल्कि उसे नियंत्रित स्थिति में होश में रखा गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर मरीज से बातचीत करते रहे और उसके शरीर की कार्यक्षमता पर लगातार नजर रखते हुए दिमाग के संवेदनशील हिस्सों की सर्जरी की गई।
आमतौर पर किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है, ताकि उसे सर्जरी के दौरान होने वाली प्रक्रिया का एहसास न हो। हालांकि, कुछ विशेष प्रकार की ब्रेन सर्जरी में मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय नियंत्रित तरीके से होश में रखना जरूरी होता है। ऐसी प्रक्रिया का उद्देश्य मस्तिष्क के उन हिस्सों की कार्यक्षमता की लगातार निगरानी करना होता है, जिनका संबंध बोलने, सुनने, संवेदना, आंखों की रोशनी और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से होता है।
देवघर एम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. विमल मुंडा ने बताया कि यह जटिल न्यूरो सर्जरी न्यूरो सर्जरी विभाग की डॉक्टर चंद्रमा विश्वास और डॉ. सौरभ कुमार की टीम ने की। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार के साथ डॉ. नेहा भारती, डॉ. गिरीश और डॉ. सौरव भी मौजूद रहे।
डॉ. विमल मुंडा के अनुसार, इस तरह की न्यूरो सर्जरी में दिमाग के संवेदनशील हिस्सों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही वजह है कि मरीज को नियंत्रित अवस्था में होश में रखा गया। एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति की निगरानी की और यह सुनिश्चित किया कि सर्जरी के दौरान उसकी स्थिति स्थिर बनी रहे।
सर्जरी के दौरान चिकित्सक मरीज से हल्की बातचीत भी करते रहे। बातचीत के माध्यम से डॉक्टर यह आकलन करते रहे कि मस्तिष्क के संवेदनशील हिस्से पर की जा रही सर्जरी का उसकी बोलने, समझने और अन्य कार्यक्षमताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है। इस तरह मरीज की प्रतिक्रिया डॉक्टरों के लिए ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण संकेत का काम करती रही।
देवघर एम्स में हुई इस जटिल न्यूरो सर्जरी को क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि देवघर में स्थित एम्स में अब जटिल न्यूरो संबंधी मामलों के उपचार के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
देवघर एम्स का लाभ केवल देवघर जिले तक सीमित नहीं है। आसपास के भागलपुर, बांका, जमुई, आसनसोल, दुर्गापुर, गिरिडीह और जामताड़ा समेत करीब 15 जिलों के लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की जटिल न्यूरो सर्जरी का सफल होना पूरे संथाल परगना और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जटिल मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को हर बार बड़े शहरों या दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

