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BRICS शिखर सम्मेलन 2026: आतंकवाद, साइबर अपराध और सीमा पार सुरक्षा खतरों से निपटने पर भारत का रहेगा मुख्य जोर

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा खतरों के खिलाफ सहयोग बढ़ाना प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। भारत BRICS के मौजूदा आतंकवाद रोधी तंत्र को और प्रभावी बनाते हुए आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और साइबर अपराध जैसे खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक सहयोग पर जोर दे सकता है।

भारत का प्रयास BRICS को केवल आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग के मंच तक सीमित रखने के बजाय बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने का है।

आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा सबसे अहम मुद्दे

भारत के लिए आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग लंबे समय से प्रमुख सुरक्षा प्राथमिकताओं में रहा है। BRICS सम्मेलन में सीमा पार आतंकवाद, आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद और आतंकवाद के लिए इस्तेमाल होने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

इसके साथ ही संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर भी खुफिया जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा हो सकती है।

NSA बैठक में पहले ही हुई थी चर्चा

इससे पहले जून में नई दिल्ली में BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली अस्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BRICS के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।

भारत की प्राथमिकता आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करना है।

आतंकी फंडिंग पर कसेगा शिकंजा

भारत BRICS देशों के बीच आतंकवादी वित्तपोषण के नेटवर्क पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली फंडिंग और दूसरे वैकल्पिक वित्तीय माध्यमों की निगरानी को सहयोग के दायरे में लाया जा सकता है।

डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ आतंकवादी और आपराधिक नेटवर्क अब कई देशों में फैले हुए हैं। ऐसे में केवल किसी एक देश में कार्रवाई करने के बजाय विभिन्न देशों की जांच और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान महत्वपूर्ण हो गया है।

ड्रग तस्करी और संगठित अपराध भी एजेंडे में

मादक पदार्थों की तस्करी भी BRICS देशों के लिए साझा सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। कई मामलों में ड्रग नेटवर्क का संबंध संगठित अपराध, अवैध वित्तीय लेनदेन और आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़ा पाया जाता है।

ऐसे में तस्करी के रास्तों, नशीले पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर सहयोग बढ़ाया जा सकता है।

इसका उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की खेप पकड़ना नहीं, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करना होगा।

AI और साइबर अपराध नई चुनौती

साइबर सुरक्षा भी BRICS देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रही है। आतंकवादी और आपराधिक संगठन एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी और डार्कनेट जैसी तकनीकों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

जून में हुई BRICS NSA बैठक में भी उभरती तकनीकों और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों पर चर्चा हुई थी। ऐसे में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच तकनीकी जानकारी, साइबर इंटेलिजेंस और क्षमता निर्माण से जुड़ा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

राजनीतिक मतभेदों के बीच सहयोग बड़ी चुनौती

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS के लिए सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक सहमति को जमीन पर प्रभावी सुरक्षा सहयोग में बदलना होगी। समूह में शामिल देशों की अपनी-अपनी भू-राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताएं हैं।

पूर्व पुलिस महानिदेशक और सुरक्षा विशेषज्ञ प्रकाश सिंह के मुताबिक, BRICS के पास आर्थिक और जनसांख्यिकीय ताकत के साथ-साथ व्यापक भौगोलिक प्रभाव भी है। ऐसे में यह समूह गंभीर सुरक्षा सहयोग के मंच के रूप में विकसित हो सकता है।

उनके अनुसार बेहतर सूचना साझा करना, कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय अपराध के वित्तीय तथा तकनीकी ढांचे पर कार्रवाई इसके महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं।

साझा खतरे बन सकते हैं सहयोग का आधार

ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बीके खन्ना के अनुसार BRICS देशों के बीच हर भू-राजनीतिक मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं है, लेकिन आतंकवादी वित्तपोषण, संगठित अपराध, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे साझा खतरों से निपटने में सभी देशों का हित है।

यही साझा हित BRICS के सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने का आधार बन सकते हैं। भारत की कोशिश होगी कि आगामी शिखर सम्मेलन में आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों पर केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर ठोस और व्यावहारिक सहयोग की दिशा तय की जाए।

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