HomeBreaking Newsतीन इनामी माओवादियों ने बंगाल में डाले हथियार, 81 मामलों में थे...

तीन इनामी माओवादियों ने बंगाल में डाले हथियार, 81 मामलों में थे आरोपी; पति-पत्नी भी शामिल

रांची। झारखंड में माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव अब नक्सलियों के आत्मसमर्पण के रूप में सामने आने लगा है। इसी कड़ी में लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहे तीन इनामी माओवादियों ने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है। खास बात यह है कि तीनों के खिलाफ झारखंड में कुल 81 मामले दर्ज हैं।

आत्मसमर्पण करने वालों में पूर्वी सिंहभूम के पटमदा निवासी और भाकपा माओवादी की रीजनल कमेटी के सदस्य राम प्रसाद मार्डी उर्फ सचिन शामिल हैं। उनके साथ उनकी पत्नी और इनामी जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा महिला कैडर बुलू उर्फ गौरी ने भी संगठन छोड़ दिया है।

राम प्रसाद ने AK-47 के साथ किया सरेंडर

राम प्रसाद मार्डी को माओवादी संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता रहा है। वह रीजनल कमेटी सदस्य (RCM) के पद पर सक्रिय था और उसके खिलाफ झारखंड में 44 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, पुलिस बल पर हमला, हथियार और विस्फोटक अधिनियम समेत कई गंभीर मामले शामिल हैं।

राम प्रसाद ने आत्मसमर्पण के दौरान अपनी AK-47 राइफल भी पुलिस को सौंप दी। वह लंबे समय से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2026 में मनोहरपुर, छोटानागरा और जराईकेला थाना क्षेत्रों की सीमा पर हुई मुठभेड़ में भी उसकी संलिप्तता सामने आई थी। इस दौरान कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हुआ था। बाद में नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी की चपेट में आने से कोबरा 209 बटालियन के सहायक समादेष्टा अजय मल्लिक और एक हवलदार भी घायल हुए थे।

रिकॉर्ड में जनवरी 2023 के टोंटो थाना क्षेत्र की घटनाओं का भी उल्लेख है। उस दौरान नक्सलियों के साथ मुठभेड़ और आईईडी विस्फोट में कोबरा 209 बटालियन के कई जवान घायल हुए थे।

पति के साथ पत्नी ने भी छोड़ा माओवादी संगठन

राम प्रसाद की पत्नी मीता उर्फ नयनतारा भी संगठन में सक्रिय थी। पश्चिम मेदिनीपुर के नंदीग्राम थाना क्षेत्र के सोनाचूड़ा की रहने वाली मीता को माओवादी संगठन में जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) की जिम्मेदारी मिली हुई थी। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

मीता के खिलाफ झारखंड में 19 मामले दर्ज हैं। इनमें पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला, आईईडी विस्फोट, हत्या के प्रयास और प्रतिबंधित संगठन से जुड़े मामले शामिल हैं। 2023 के टोंटो क्षेत्र में हुए आईईडी विस्फोट से जुड़े मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

पति राम प्रसाद के साथ मीता ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। झारखंड पुलिस के अनुसार, यह ऐसी चौथी घटना है, जिसमें पति-पत्नी ने एक साथ माओवादी संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण किया है।

गौरी के खिलाफ भी 18 मामले दर्ज

आत्मसमर्पण करने वाली तीसरी महिला कैडर बुलू उर्फ गौरी है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबनी थाना क्षेत्र के करमसोल की रहने वाली है और मदन महतो उर्फ चरण की पत्नी बताई गई है। वह माओवादी संगठन की सक्रिय कैडर रही है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।

गौरी के खिलाफ झारखंड में 18 मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, आईईडी विस्फोट, हत्या, हत्या के प्रयास, हथियार और विस्फोटक अधिनियम तथा यूएपीए से जुड़े मामले दर्ज हैं। 2025 में जराईकेला और छोटानागरा क्षेत्र में हुई नक्सली घटनाओं में भी उसका नाम रिकॉर्ड में दर्ज है।

झारखंड पुलिस के बढ़ते दबाव का असर

तीनों माओवादियों के आत्मसमर्पण को झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से लगे जंगलों में माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

सारंडा और दलमा के अलावा एमजीएम, पटमदा, बोड़ाम और घाटशिला क्षेत्र के जंगलों में भी सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। अभियान में झारखंड पुलिस के साथ कोबरा बटालियन के जवान भी शामिल हैं।

गांवों में लगाए गए नक्सलियों के पोस्टर

सुरक्षा बलों ने जंगलों में अभियान तेज करने के साथ ग्रामीण इलाकों में भी नक्सलियों के खिलाफ दबाव बढ़ाया। पुलिस ने सक्रिय माओवादियों की तस्वीर और पहचान से जुड़े पोस्टर एमजीएम, पटमदा, बोड़ाम, घाटशिला और दलमा से सटे गांवों के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए थे।

पोस्टरों के माध्यम से ग्रामीणों को सक्रिय नक्सलियों की पहचान बताई गई और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई। माना जा रहा है कि जंगलों में लगातार अभियान, ग्रामीण इलाकों में बढ़ी निगरानी और संगठन पर बने दबाव के बीच तीनों ने पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया।

तीनों के हथियार डालने से झारखंड और पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका माना जा रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments