नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS Summit 2026 के पहले दिन ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को सिर्फ नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम तय करने वाला बनना होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है और यह समूह किसी देश के खिलाफ नहीं है। उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को साझेदारी के मंच में बदलने की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका सीमित है। उन्होंने कहा कि मौजूदा ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को एक ऐसे ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने की जरूरत है, जहां हर देश की आवाज और हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन व्यवस्था के हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास होना चाहिए।
वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्तावों का सुझाव
पीएम मोदी ने BRICS देशों के सामने वैश्विक शासन सुधार के लिए संयुक्त रूप से 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव रखा। उनका उद्देश्य इन प्रस्तावों को अगले BRICS शिखर सम्मेलन तक BRICS सुधार रोडमैप का रूप देना है।
उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक संस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
UNSC में तत्काल सुधार की मांग
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि UNSC सुधार के लिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता।
पीएम मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था की मौजूदा संरचना को पिरामिड जैसी बताते हुए कहा कि सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि उन देशों की भूमिका सीमित है जो इन फैसलों से सीधे प्रभावित होते हैं।
नाविकों की सुरक्षा के लिए नेटवर्क का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS सदस्य देशों के बीच नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नाविक नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों के लिए बेहतर सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है।
कई देशों के प्रमुख सम्मेलन में मौजूद
BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे।

