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BRICS Summit 2026 Day 2: पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका पर दिया जोर, जिनपिंग चीन रवाना

नई दिल्ली: भारत में आयोजित 18वें BRICS Summit 2026 का रविवार को दूसरा दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। कार्यक्रम के अनुसार, सुबह करीब 10:55 बजे BRICS देशों के नेता एक बार फिर भारत मंडपम पहुंचेंगे, जहां ग्रुप फोटो भी होगा।

इससे पहले शनिवार को BRICS देशों के नेताओं ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई। बैठक में वैश्विक मामलों में ग्लोबल साउथ की भूमिका मजबूत करने और विकासशील देशों की वैश्विक संस्थानों में भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

BRICS Summit 2026: मिडिल ईस्ट तनाव पर नेताओं की चिंता

BRICS बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी शामिल हुए। उन्होंने अमेरिका की ओर से किए गए कथित ‘जानबूझकर हमलों’ पर चिंता जताई और कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान परमाणु सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उनकी टिप्पणी को ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों की अप्रत्यक्ष आलोचना के तौर पर देखा गया।

BRICS नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाया। संयुक्त बयान में ऐसे कदमों को खत्म करने की मांग की गई, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों एवं उद्देश्यों को कमजोर करते हैं।

पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ को लेकर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit के दौरान ‘Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें

  • ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत हो: पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल संकटों में ग्लोबल साउथ सबसे आगे रहता है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अभी भी पीछे है।
  • विशेषाधिकार से साझेदारी की ओर: उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में मौजूद ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के प्लेटफॉर्म’ में बदलने की आवश्यकता बताई।
  • UNSC में अधिक प्रतिनिधित्व: प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक शासन व्यवस्था आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे। इसके लिए UN Security Council जैसे संस्थानों में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।
  • युवा राजनयिकों को प्रशिक्षण: उन्होंने BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत की कला, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी जानकारी देने का सुझाव दिया।
  • नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क: पीएम मोदी ने वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाने वाले नाविकों के लिए संकट के समय सहायता उपलब्ध कराने वाला इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा।

BRICS Summit 2026: क्या है संगठन का महत्व?

BRICS की स्थापना 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने मिलकर की थी। दक्षिण अफ्रीका 2010 में संगठन में शामिल हुआ। इसके बाद संगठन का विस्तार हुआ और वर्तमान में इसमें 11 सदस्य देश हैं।

BRICS का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना तथा वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को मजबूत करना है।

पीएम मोदी ने दिया साझी भागीदारी का संदेश

अपने संबोधन के समापन पर पीएम मोदी ने कहा कि जब भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को बनाने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने आवाज से प्रभाव तक और विशेषाधिकार से साझेदारी तक समान भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया।

सत्र का समापन New Delhi BRICS Leaders’ Declaration को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा में BRICS सहयोग के लिए साझा प्राथमिकताओं, प्रतिबद्धताओं और भविष्य की दिशा को रेखांकित किया गया।

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