कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यव्यापी सर्वेक्षण के बाद 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है। वहीं, करीब 100 अन्य मदरसों को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि बिना वैध अनुमति के किसी भी संस्थान को संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने सोमवार को कहा कि सरकार किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन संस्थानों को सरकारी अनुमति नहीं मिली है, वे अपना संचालन जारी नहीं रख सकते। यदि कोई मदरसा काम करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार से अनुमति लेनी होगी।
20 वर्षों से उठ रहे हैं सवाल
संवाददाताओं से बातचीत में घोष ने कहा कि मदरसों के संचालन और उनकी व्यवस्थाओं को लेकर पिछले 20 वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। कई नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे पर चिंता जताई, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब इस मामले का समाधान तलाशेगी और केवल वैध अनुमति प्राप्त संस्थानों को ही काम करने दिया जाएगा।
सर्वेक्षण में सामने आईं कई कमियां
अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री खुदीराम टुडू ने बताया कि जून की शुरुआत से राज्य के सभी जिलों में जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कराया गया था। इसका उद्देश्य सरकारी और निजी मदरसों के बुनियादी ढांचे, अनुमति की स्थिति और प्रबंधन व्यवस्था का आकलन करना था।
सर्वेक्षण के दौरान कई संस्थानों में आवश्यक मंजूरी का अभाव पाया गया। कुछ मदरसों में बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं थीं। अधिकारियों ने संबंधित संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। अब उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वैध अनुमति वाले मदरसे चलते रहेंगे
मंत्री खुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास जरूरी सरकारी मंजूरी है, उनका संचालन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि यह पूरी कवायद राज्य में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की संख्या का पता लगाने के लिए शुरू की गई थी।
टुडू के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर शुरू किए गए इस सर्वेक्षण के बाद 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नोटिस पाने वाले संस्थानों के जवाबों की समीक्षा के बाद ही उनके संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार के इस कदम से राज्य में मदरसों के संचालन, सरकारी अनुमति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोटिस पाने वाले संस्थानों के जवाबों के बाद विभाग क्या कार्रवाई करता है।

