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उम्र की सीमा नहीं रोक सकी शिक्षा की ललक, 60 से 70 वर्ष के महिला-पुरुषों ने दी साक्षरता परीक्षा

बहरागोड़ा: उम्र के इस पड़ाव पर भी शिक्षा हासिल करने का जज्बा देखने को मिला। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ‘उल्लास’ के तहत नव साक्षरों के लिए आयोजित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा रविवार को उत्क्रमित उच्च विद्यालय झांझिया में शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न हुई।

परीक्षा में क्षेत्र के नव साक्षरों ने उत्साह के साथ भाग लिया। खास बात यह रही कि परीक्षा केंद्र पर 60 से 70 वर्ष की उम्र के महिला एवं पुरुष परीक्षार्थी भी पूरे उत्साह के साथ परीक्षा देते नजर आए। कई बुजुर्ग परीक्षार्थी हाथों में कलम लेकर प्रश्नों के उत्तर लिखते दिखाई दिए। उनके उत्साह और सीखने की इच्छा ने यह संदेश दिया कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती।

बुजुर्गों के उत्साह ने दिया प्रेरणादायक संदेश

परीक्षा के दौरान बुजुर्ग महिला और पुरुष परीक्षार्थियों में खासा उत्साह देखा गया। उम्र की परवाह किए बिना उन्होंने परीक्षा में हिस्सा लेकर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उनके इस प्रयास को स्थानीय स्तर पर प्रेरणादायक माना जा रहा है।

शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त माहौल में हुई परीक्षा

परीक्षा का संचालन उत्क्रमित उच्च विद्यालय झांझिया की प्रभारी प्रधानाध्यापक सह केंद्र अधीक्षक आदित्य करण तथा झांझिया संकुल के सीआरपी सपन कुमार दत्ता की देखरेख में किया गया। केंद्र पर परीक्षार्थियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न हुई।

शिक्षा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ाती है

केंद्र अधीक्षक आदित्य करण ने कहा कि उम्र कभी भी शिक्षा प्राप्त करने में बाधा नहीं बन सकती। 60 से 70 वर्ष की उम्र के महिला-पुरुष जिस उत्साह के साथ परीक्षा में शामिल हुए, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने कहा कि ‘उल्लास’ कार्यक्रम के माध्यम से नव साक्षरों को पढ़ने-लिखने के साथ दैनिक जीवन में संख्यात्मक ज्ञान का उपयोग करने में सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उसे रोजमर्रा के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिक्षकों और कर्मियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में शिक्षक संदीप कुमार अधिकारी, दुलाल सोरेन, अजीत कुमार सिंह, शिव शंकर दास तथा लिपिक लक्ष्मीकांत सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस दौरान केंद्र अधीक्षक आदित्य करण और झांझिया संकुल के सीआरपी सपन कुमार दत्ता सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे।

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