मोमेंटम झारखण्ड के बाद सबसे पहले स्थापित होने वाला टेक्सटाइल इंडस्ट्री के जाने माने ओरिएंट क्राफ्ट बंद

प्रोत्साहन राशि को बंद करने की वजह से मुसीबत आई। 
सरकारी सुविधा के आभाव में ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के 5000 कामगार हुए बेरोजगार

रेहान संवाददाता / उज्ज्वल दुनिया /रांची । देश की जानी मानी टेक्सटाइल कंपनी ओरिएंट क्राफ्ट 24 जुलाई 2017 में रांची के ईरबा में स्थापित की गयी थी। राज्य में इस पहली टेक्सटाइल कंपनी के खुलते ही यहां के युवक, युवतियों और बेरोजगारों को काम मिला। कंपनी के प्रति कामगारों की वफादारी और लगन रंग लाया और कंपनी सफलता की बुलंदियों पर पहुंच गया। प्रबंधन को लगा कि यहां के लोग काफी मेहनती हैं। कंपनी ने इरबा की  यूनिट से हासिल सफलता के बाद निर्णय लिया कि यहां और यूनिट की आवश्यकता है। इस के बाद प्रबंधन ने रांची स्थित खेलगांव में दूसरे यूनिट की स्थापना की। इस प्रकार झारखंड में दो यूनिट की स्थापना हुई।इरबा की यूनिट को जे-1 और खेलगांव की यूनिट को जे-2 का नाम पड़ा। कंपनी का उदघाटन कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने की थी। इसके बाद कंपनी के दोनों यूनिट में दो शिफ्टों में काम होने लगी। कंपनी के खुल जाने से  राज्य के विभिन्न जिलों के युवक,युवतियों और बेरोजगारों को रोजगार मिला। कंपनी में  निर्मित वस्त्रों की निर्यात विदेशों में होने लगी। इसके बाद ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी की देखा-देखी देश के अन्य टेक्सटाइल कंपनी भी राज्य में अपनी कंपनी स्थापित कर बहुत से लोगों को रोजगार मुहैया कराने लगी।इस से स्थानीय लोगों के अलावा राज्य के विभिन्न जिले के बेरोजगारों को रोजगार मिलना शुरू हो गया। 

लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह बर्बाद हो गई कंपनी 

देश में लॉक डाउन लगते ही देश की इतनी बड़ी टेक्सटाइल कंपनी ने दम तोड़ दिया। इस का असर हुआ कि कंपनी बंद हो गया। लगभग 5000 कामगार  फिर से बेरोजगार हो गए। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी से निर्मित वस्त्रों का विदेश में निर्यात होना बंद हो गया। कंपनी ने लॉक डाउन के दौरान कामगारों की सुध तक नहीं ली। सभों को दर-दर भटकने को छोड़ दिया। कामगारों ने बताया कि कंपनी ने उनका बहुत शोषण किया और जब बुरा समय आया तो कंपनी ने अपना हाथ उठा लिया। इधर दूसरी कंपनी ने अपने कामगारों को लॉक डाउन के दौरान काम भी मुहैय्या कराया और आधा वेतन भी दिया। इससे उन कंपनियों के कामगारों को काफी राहत मिला। ओरिएंट क्राफ्ट के कामगारों ने कंपनी से अन्य कंपनियों की तरह ही काम मुहैय्या कराने और आधा वेतन देने की गुहार लगाई। इस पर प्रबंधन ने साफ इंकार कर दिया।

क्या कहते हैं कंपनी के एचआर ?

इस संबंध में कंपनी के एचआर से बात करने पर बताया कि फिलहाल कंपनी को सरकार से  मिलने वाली सारी सुविधा बंद है। कंपनी अभी कामगारों को काम और वेतन देने की स्थिति में नही है। ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी में जून तक उत्पादन हुआ और जुलाई से कंपनी बंद कर दी गई।  कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को फैक्ट्री आने से मना कर दिया गया। जून के महीने में लॉकडाउन के वक़्त भी कंपनी ने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।  इसको लेकर कंपनी के बाहर कामगारों ने काफी हंगामा भी किया था।  अब मैनेजमेंट के लोग भी दिल्ली शिफ्ट हो गए हैं।

कई यूरोपीय देशों में होता था एक्सपोर्ट 

अमेरिका, फ्रांस, स्पेन,  ब्रिटेन, कनाडा सहित एक दर्जन यूरोपीय देशों में यहां के बने कपड़ों का एक्सपोर्ट होता था। कंपनी के बने शर्ट, जींस, सूट को काफी पसंद किया जाता था लेकिन कोरोना महामारी के बीच इस कंपनी की हालत अचानक खराब  हो गई।  लॉकडाउन में कई कर्मचारियों को ऑफिस आने के लिए मना कर दिया गया है। कंपनी के कई अधिकारी इस मामले में बोलने से कतरा रहे हैं। 

महागठबंन की सरकार में सभी कंपनियां झारखंड से बाहर जाएंगी, बढ़ेगी बेरोजगारी- संजय सेठ

बीजेपी सांसद संजय सेठ ने कहा झारखण्ड सरकार पूरी तरह से विफल  हो गई है।झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में बड़ी कंपनी ओरियंट क्राफ्ट की स्थापना हुई थी। मोमेंटम झारखंड के बाद झारखंड में जो फैक्ट्री लगी थी उसमें से एक कंपनी ओरियंट क्राफ्ट भी थी। रांची में इस कंपनी की दो यूनिटें लगी थी।  एक यूनिट ओरमांझी के इरबा में और दूसरा खेल गांव में लगा था।  यहां के बने कपड़े सात समंदर पार जाते थे। 

कंपनी बंद होने के कारणों की समीक्षा करेगा विभाग- श्रम मंत्री 

ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी के सीईओ गौरभ सहगल ने बताया कि कंपनी को सरकार की तरफ से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को बंद कर दिया गया है।  यह राशि लगभग 33 करोड़ है। दरअसल, टेक्सटाइल नीति के तहत झारखंड के एक व्यक्ति को कंपनी में रोजगार देने पर सरकार उस कंपनी को 5 हजार से लेकर 6 हज़ार तक की प्रोत्साहन राशि देती है. सरकार के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए कहा कि कंपनी आखिर क्यों बंद हुई इसकी विभाग समीक्षा कर रही है।

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