Wednesday, February 21, 2024
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मोदी सरकार राज्यों के खिलाफ कर रही गुंडागर्दी

नये तरह की महाजनी प्रथा की शुरुआत कर रही है मोदी सरकार 

उज्ज्वल दुनिया/रांची । सीएम हेमंत सोरेन ने किसान बिल के बहाने केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का रवैया तानाशाही और गुंडागर्दी वाला है । वे बातें तो को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म की करते हैं,  लेकिन उनके काम करने का तरीका नन- को-ऑपरेटिव वाला है । हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र के विषय पर मोदी सरकार मनमाना फैसला ले रही है , लेकिन जो विषय राज्यों और केन्द्र दोनों को मिलकर लेना है, उसपर भी दिल्ली की तानाशाह सरकार खुद ही निर्णय ले रही है ।

नये तरह की महाजनी प्रथा शुरू कर रही है मोदी सरकार 

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड गठन का आंदोलन महाजनी प्रथा के खिलाफ भी था । लेकिन आज जो हालात बन रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार एक नये तरह की महाजनी प्रथा की शुरुआत कर रही है । उदाहरण के लिए हेमंत सोरेन ने किसान बिल का हवाला दिया । 

मंगरा उरावं अंबानी और अडानी के खिलाफ केस लड़ सकेगा क्या? 

सीएम हेमंत सोरेन ने एक काल्पनिक नाम मंगरा उरावं का उदाहरण दिया । उन्होंने पूछा कि झारखंड का एक छोटा किसान मंगरा उरावं  अंबानी और अडानी जैसे कॉर्पोरेट के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए एग्रीमेंट साइन करता है । मान लिया कि कंपनी ने एग्रीमेंट की शर्तों को तोड़ दिया । या किसान को पैसे नहीं दिए ? ऐसे में मंगरा न्याय के लिए कहां जाएगा । क्या वो कंपनी के खिलाफ़ कोर्ट में लड़ सकेगा?  हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाते-जाते उसका चप्पल घिस जाएगा । उसे मिलेगी तो सिर्फ तारीख पर तारीख । किसान बिल में ये क्यों नहीं लिखा है कि किसान को हर हाल में एमएसपी से ज्यादा पैसा मिलेगा? 

दूसरी बार सत्ता पाते ही मोदीजी ने इरादे साफ कर दिए थे 

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि दूसरी बार सत्ता मिलते ही नरेन्द्र मोदी ने संसद में एक लंबा-चौड़ा भाषण दिया था । उसमें उन्होंने कहा था कि बड़े रिफॉर्म के लिए तैयार रहिए । उसमें उन्होंने साफ कहा था कि कृषि , मजदूर सभी उनके निशाने पर हैं । लेबर कानून, किसान बिल उसी की एक कड़ी है । हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का किसान पंजाब के किसान से अलग है । गुजरात का किसान बंगाल के किसान से अलग है । उनकी जरूरतें अलग है। लेकिन मोदी सरकार ने तो किसी भी राज्य की सरकार से बात करना तक जरुरी नहीं समझा । उन्होंने तो किसानों तक से बात नहीं की । अब हर रोज आकर सफाई दे रहे हैं । खुद को किसानों का हितैषी बता रहे हैं । 

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