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प्रधानमंत्री के सपनों का ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के लिए शुरू होंगे कई आधुनिक उद्योग

बेगूसराय (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत निर्माण का बड़े पैमाने पर असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन अगर परदेस से लौटे श्रमिकों को समुचित साधन मुहैया कराए तो कभी बिहार की औद्योगिक राजधानी रहा बेगूसराय एक बार फिर नए-नए उद्योगों का हब बन सकता है।

ह कहना है असम से काम छोड़कर गांव लौटे श्रमिकों का।
बेगूसराय स्टेशन पर असम से लौटे प्रवासी श्रमिकों ने गुरुवार।को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत के दौरान कहा कि आजादी के बाद पहली बार देश को एक ऐसे प्रधानमंत्री मिले हैं जो कहते हैं, वह करते भी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब सैकड़ों वर्ष के विवादित राम जन्म भूमि की समस्या का हल कर दिया तो श्रमिकों को गांव में स्वरोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने की उनकी योजना ने हम लोगों के मन में एक नई आशा का संचार किया है।

प्रमोद चंद्रवंशी, विकास चंद्रवंशी, सुरेश पासवान, रंजीत पासवान आदि ने बताया कि हम लोग गुवाहाटी में मोबाइल का कवर बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। बिहार में काम नहीं मिलने के कारण लाखों-लाख श्रमिक रोजी-रोटी के लिए परदेस में अपना श्रम सस्ते में बेच रहे थे, ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि ऐसा एक दिन आएगा, जब परदेस में आर्थिक रूप से मजबूत होने गए हम लोग वहां से कंगाल होकर घर लौट आएंगे। हम घर लौट कर आए हैं, यहां आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम चल रहा है। जिसमें नए नए उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन, संसाधन और पूंजी की व्यवस्था अनुदान के साथ किए जाने की बात कही गई है। सरकारी मदद मिल जाए तो हम लोग यहां ग्रुप बनाकर मोबाइल का कवर बनाना शुरू कर देंगे। यह उद्योग कम पूंजी में ही शुरू हो जाता है तथा डिमांड बहुत ज्यादा है। अभी बिहार में उच्च गुणवत्ता के कवर महंगे दामों पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन हम लोग जब निर्माण शुरू करेंगे तो सस्ता में और सरलता से उच्च गुणवत्ता का कवर लोगों को उपलब्ध हो सकता है।

टेक्सटाइल कंपनी के लिए धागा बनाने वाले रोशन कुमार महतो, विजय कुमार, राधा देवी ने बताया कि बेगूसराय के उपजाऊ काली मिट्टी में कपास की खेती में अपार संभावना है। सरकार प्रयास कर अगर यहां खेती शुरू करवा दे तो कपास से धागा बनेगा और धागा से स्थानीय स्तर पर कपड़ा का उत्पादन होगा तो बिहार बड़ा हब बन सकता है। इसमें हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, स्वरोजगार के व्यापक द्वार खुलेंगे। बिहार के बेगूसराय में अत्यधिक काली मिट्टी होने के कारण यहां रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। जिले में टेक्सटाइल इंडस्ट्री स्थापित होने से किसानों, मजदूरों एवं युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मुहैया होगा। यहां के मजदूरों के मेहनत से दूसरे राज्य को राजस्व की प्राप्ति होती है। यहां टैक्सटाइल्स फैक्ट्री लगने से ना केवल मजदूरों का पलायन रुकेगा, बल्कि बिहार सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की भी प्राप्ति होगी।

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