कोर्ट में लंबित मामलों पर मीडिया की टिप्पणियां जजों को प्रभावित करने की कोशिश: केके वेणुगोपाल

उज्ज्वल दुनिया/नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (हि.स.)। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि कोर्ट में लंबित मामलों पर मीडिया की ओर से की गई टिप्पणियां जजों को प्रभावित करने की कोशिश होती है और वे उन मामलों पर असर डालने की कोशिश करते हैं। अटार्नी जनरल ने कहा कि ऐसा करना कोर्ट की अवमानना की तरह हैं। सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के एक अवमानना मामले में सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने ये टिप्पणी की।

सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने कहा कि मैं जब टीवी देखता हूं और जमानत याचिका पर सुनवाई आनी होती है तो टीवी आरोपित की किसी व्यक्ति से बातचीत फ्लैश करता है। यह आरोपित के लिए नुकसानदेह होता है और ये सुनवाई भी प्रभावित करता है। ये कोर्ट की अवमानना है। इस पर वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि लंबित मामलों के सवाल पर सहारा के केस में विचार हुआ था। उन्होंने यूरोपियन कोर्ट के एक फैसले का जिक्र किया, जिसमें कोर्ट ने पूछा था कि क्या प्रेस को शाइलॉक केस की रिपोर्ट न देने को कहा जाए।

ये मामला 2009 में दिए एक इंटरव्यू का है। उस समय प्रशांत भूषण ने 16 में से आधे पूर्व चीफ जस्टिस को भ्रष्ट कहा था। पिछले 17 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले इस पर विचार ज़रूरी है कि ऐसे बयान से पहले क्या आंतरिक शिकायत करना उचित नहीं होता।

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