आत्मनिर्भर भारत व नवाचार के लिए आईआईटी इंदौर ने किये सराहनीय प्रयास : निशंक

आईआईटी इंदौर के 8वें दीक्षांत समारोह में 412 छात्रों को प्रदान की डिग्री

नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ, रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के 8वें दीक्षांत समारोह को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के द्वारा संबोधित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत और नवाचार के लिए संस्थान ने अनेक सराहनीय प्रयास किये हैं।

निशंक ने इस मौके पर डिजिटल माध्यम से आईआईटी इंदौर के 412 छात्रों को डिग्री प्रदान करने के साथ ही केंद्रीय विद्यालय, कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र, केंद्रीय कार्यशाला, अभिनंदन भवन और तक्षशिला व्याख्यान हॉल परिसर का उद्घाटन किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईटी इंदौर ने एकेडमी और इंडस्ट्री के बीच के गैप को कम करने तथा आत्मनिर्भर भारत एवं नवाचार के लिए सराहनीय प्रयास किये हैं और यह संस्थान सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्यूबेशन, एंटरप्रेन्योरशिप एंड इंडस्ट्री रिलेशन (सीआईआईईआईआर) की स्थापना के साथ ही ग्रामीण विकास, डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजी, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स के केंद्रों की स्थापना कर ‘नए भारत, आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के लिए सजग है।

छात्रों को व्यावहारिक जीवन में प्रवेश के लिए शुभकामनाएं देते हुए निशंक ने कहा, “दीक्षांत का मतलब शिक्षा-दीक्षा का अंत नहीं होता है बल्कि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया तो जीवन पर्यंत चलती रहती है। दरअसल दीक्षांत के पश्चात ही छात्र की असली परीक्षा प्रारंभ होती है जब वह जीवन-जगत व रोजगार के क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहां उसे संस्थानों में पाए सैद्धांतिक ज्ञान एवं अनुभवों का व्यवहारिक जीवन में उपयोग करना होता है।

आईआईटी इंदौर की प्रशंसा करते हुए उन्होनें कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान को एक आयामी नहीं बल्कि बहुआयामी होना चाहिए जैसे कि अगर प्रौद्योगिकी का संस्थान है तो उसे कला, मानविकी, सांस्कृतिक तथा सामाजिक जीवन से जुड़े विषयों के शिक्षण में भी पहल करनी चाहिए। आईआईटी इंदौर विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षा तो दे ही रहा है, साथ में एस्ट्रोनॉमी (खगोल विज्ञान) में एमएससी प्रोग्राम प्रारंभ करने वाला यह भारत का पहला आईआईटी संस्थान है।

उन्होंने कहा, “किसी भी संस्थान की ताकत एवं क्षमता का पता उसके भवन या दीवारों से नहीं बल्कि संस्थान द्वारा चुनौतीपूर्ण समय में किए गए कार्यों से होता है। वैश्विक महामारी कोविड-19 ने हमारे सामने जो चुनौतियां रखी हैं उनसे निपटने में आईआईटी इंदौर द्वारा किए गए कार्य बेहद सराहनीय हैं। आईआईटी इंदौर ने महामारी से संबंधित 25 अनुसंधान परियोजनाएं प्रस्तुत की हैं और साथ ही संस्थान में स्यूडोवायरस आधारित कोविड-19 वैक्सीन सफलतापूर्वक निर्मित की गई और वर्तमान में यह परीक्षण के अगले चरण में है। इसके अलावा 3डी प्रिंटेड मास्क, पीपीई किट, रोगाणुनाशक चैंबर के निर्माण के साथ-साथ यह ‘कोविड-19 महामारी को रोकने’ के लिए निर्मित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क अनुसंधान परियोजना में नॉर्वे, स्वीडन, यूएसए, फ्रांस तथा डेनमार्क के साथ छठवें रिसर्च ग्रुप के रूप में जुड़कर हमारे देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यही नहीं पीएम केयर्स फंड में 10 लाख से अधिक का दान संस्थान की उदारता और सामाजिक सजगता को दर्शाता है।

डॉ निशंक ने नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा के लिए दिए गए प्रावधानों के बारे में भी सभी को अवगत करवाया और यह भरोसा जताया कि नई शिक्षा नीति तथा आईआईटी इंदौर जैसे संस्थान मिलकर ‘राष्ट्र निर्माण’ तथा ‘भारत को ज्ञान की महाशक्ति’ बनाने की दिशा में अपना शत-प्रतिशत योगदान देंगे।

उन्होंने आईआईटी इंदौर को उसके नवीन भवनों (केंद्रीय विद्यालय, कंप्यूटर एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी सेंटर, केंद्रीय कार्यशाला, अभिनंदन भवन तथा तक्षशिला व्याख्यान कक्ष परिसर) एवं नवाचारी कार्यक्रमों के लिए भी बधाई दी और यह विश्वास दिलाया कि ऐसे सर्वांगीण विकास के प्रयासों के लिए भारत का शिक्षा मंत्रालय, हर संभव सहयोग के लिए आपके साथ खड़ा रहेगा।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, आईआईटी इंदौर के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. दीपक फाटक, आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. निलेश कुमार जैन, आईआईटी इंदौर के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. देवेंद्र देशमुख एवं संस्थान से जुड़े अन्य सभी शिक्षक, छात्र-छात्रा एवं उनके अभिभावक भी उपस्थित थे।

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