HomeNationalछत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले 92 गावों में पहली बार...

छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले 92 गावों में पहली बार लहराया तिरंगा

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बस्तर संभाग के दुर्गम और सुदूर अंचलों में एक नया अध्याय लिखा गया। बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के कुल 92 ऐसे गांव, जहां आजादी के बाद से अब तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जा सका था, वहां इस वर्ष पहली बार बस्तरवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता की अनुभूति के साथ शान से तिरंगा फहराया। यह ऐतिहासिक बदलाव 31 मार्च 2026 को राज्य के इन क्षेत्रों को माओवादी सशस्त्र कैडर से पूरी तरह मुक्त घोषित किए जाने के बाद संभव हो पाया है।

छत्तीसगढ़ शासन ने जानकारी दी है कि बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 09 गांवों समेत कुल 92 गांवों में आजादी के बाद पहली बार शान से ध्वजारोहण किया गया। बीजापुर के 33 दूरस्थ गांवों और कार्रेगुट्टलू पहाड़ियों जैसे संवेदनशील इलाकों में ध्वजारोहण किया गया। सुकमा जिला के मिनपा, ताड़मेटला और बुरकापाल जैसे पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित 50 गांवों में तिरंगा लहराया गया। नारायणपुर जिला के अबूझमाड़ और आसपास के 9 गांवों के ग्रामीणों ने पहली बार राष्ट्रीय पर्व पर जश्न मनाया।

इसी कड़ी में बीजापुर जिले के विकासखंड बीजापुर अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कैका के सुदूर गांव ‘मोसला’ में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी प्रांगण में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस गौरवमयी पल के साक्षी बनने और ग्रामीणों के साथ खुशियां बांटने के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पक्के रास्तों के अभाव, दुर्गम मार्गों और बारिश के कारण जगह-जगह बने दलदल के बावजूद राहुल योगराज टिकरिहा का उत्साह कम नहीं हुआ। वे मोटर साइकिल और पैदल यात्रा करते हुए इस सुदूर क्षेत्र तक पहुंचे।

ध्वजारोहण के उपरांत ग्रामीणों को संबोधित करते हुए भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा ने कहा कि बस्तर आज विकास और विश्वास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। दशकों बाद इन 92 गांवों में तिरंगा फहराना इस बात का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का प्रकाश अब बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। यह बस्तर के लिए सही मायनों में पूर्ण आजादी का दिन है।

इस ऐतिहासिक क्षण की सबसे खास और सुखद बात यह रही कि ग्राम के ही 14 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी तिरंगा फहराने के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ।

इस ऐतिहासिक क्षण में ग्राम कैका की सरपंच संगीता राणा, भाजपा महामंत्री संजय नुक्कड़, भाजयुमो जिला अध्यक्ष हरिहर साहनी, जिला उपाध्यक्ष राजू कलमू, दिलीप नुक्कड़, सिरोज विश्वकर्मा, बेचैन प्रसाद, गोलू नाग, राकेश पोनेम, अर्जुन हेमला, दीपेश यालम, निखिल नाग, लक्ष्मण होपका, रमेश राणा, लखन माझी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामवासी और युवा उपस्थित रहे। तिरंगा फहराए जाने के बाद पूरे गाँव में हर्ष का माहौल देखा गया।

छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि “बस्तर क्षेत्र के वे इलाके जो पहले माओवादी हिंसा और आतंक के साए में जीते थे और जहाँ स्वतंत्रता दिवस पर काले झंडे फहराए जाते थे, वहाँ अब देश का संविधान पूरी तरह प्रभावी हो गया है और बस्तर के अंतिम छोर तक शान से तिरंगा लहरा रहा है।”उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 को राज्य के नक्सल मुक्त होने के बाद यह पहला मौका है जब बस्तर के कोने-कोने में और कभी नक्सलियों के गढ़ रहे अंदरूनी गांवों में बिना किसी भय के राष्ट्रीय पर्व का जश्न मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक बदलाव के जश्न के हिस्से के रूप में बस्तर संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, चौराहों और सामुदायिक केंद्रों का नामकरण देश के लिए बलिदान देने वाले वीर बलिदानियों के नाम पर किया जा रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments