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  • जिला समाज कल्याण विभाग, हजारीबाग एवं एकजुट संस्था ने किया कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन

    जिला समाज कल्याण विभाग, हजारीबाग एवं एकजुट संस्था ने किया कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन

    जिला समाज कल्याण विभाग, हजारीबाग एवं एकजुट संस्था ने किया कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन

    उज्जवल दुनिया संवाददाता: हजारीबाग।समाज कल्याण विभाग एवं एकजुट संस्था के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों में कुपोषण की रोकथाम को लेकर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के बीच उन्मुखीकरण का आयोजन किया गया। जिला समाज कल्याण कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम  का विधिवत् शुभारंभ जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रोहित कुमार, सीडीपीओ, सदर रेखा रानी के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस कार्यक्रम में एकजुट संस्था के डिविजनल कार्डिनेटर उत्तरी छोटानागपुर संजय कुमार, प्रोग्राम ऑफिसर तरुण कुमार एवं संजय कुमार मौजूद थे। मौके पर परियोजना के तहत तीन वर्ष से छोटे बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए समुदाय आधारित पीएलए बैठक, गृह भ्रमण, मिलने वाली सेवाओं एवं कुपोषण के विभिन्न आयामों,प्रभाव तथा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गयी। मौके पर डीपीआरओ ने कहा कि सामाजिक सहभागिता से ही बचपन कुपोषण मुक्त हो सकता है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा। समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह कुपोषित बच्चों को उनका बचपन लौटाने में सहयोग करे। यह अभियान हमारे अनुभवों को समाज के साथ बांटने का एक प्रयोग है,जिसकी सफलता सामाजिक सहभागिता पर निर्भर है।
  • वीरों की भूमि बंगाल में उपदर्वियो के अत्याचार से भयभीत है हिंदू-बलदेव महतो 

    वीरों की भूमि बंगाल में उपदर्वियो के अत्याचार से भयभीत है हिंदू-बलदेव महतो 

    वीरों की भूमि बंगाल में उपदर्वियो के अत्याचार से भयभीत है हिंदू-बलदेव महतो

    धनबाद : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार एक विशेष समुदाय की वोट बैंक के लिए उन लोगों के मनोबल को इतना बढ़ा दिया है कि स्वामी विवेकानंद ,रविंद्र नाथ टैगोर सहित दर्जनों वीरों की भूमि सोनार बांग्ला में अब हिंदू समाज के लोग अपने आप को रहने में असहज महसूस कर रहे हैं । कानून व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो गई है। सरकार कानून व्यवस्था को नतमस्तक कर एक घुसपैठियों के मनोबल को इतना बढ़ा दिया है कि वे लोग किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो जा रहे हैं। लेकिन तृणमूल कांग्रेस की सरकार वोट बैंक के लिए मौन धारण की हुई है। उक्त बातें वरिष्ठ भाजपा नेता बलदेव महतो ने धनबाद सर्किट हाउस में भाजपा पार्टी के प्रतिपक्ष नेता अमर बावरी की स्वागत कार्यक्रम के दौरान कही। बताया कि धनबाद सांसद ढुल्लू महतो प्रचंड बहुमत से सांसद चुने जाने की खुशी में सर्किट हाउस में श्री अमर बाउरी का जोरदार स्वागत किया गया। श्री बाउरी ने बताया कि  झारखंड के पाकुड़ जिला के गोपीनाथपुर गांव जहां हिंदूओ पर झारखंड सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के शमशेर नगर के मुस्लिम उपदर्वियों के द्वारा , पथराव बमबाजी कर भागने का धमकी दे रहा है। लेकिन हिंदू समाज किसी को छेड़ता नहीं है अगर कोई छेड़ता है तो उसे छोड़ता भी नहीं है। अब तृणमूल कांग्रेस हिंदुओं पर भय दिखाकर वोट लेने का प्रयास कर रही है।लोकतंत्र की गला घोटने का कार्य में लगा हुआ है।
  • साहेबगंज में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप के बाद हत्या: घटना की पूरी कहानी

    साहेबगंज में 8 साल की बच्ची से गैंगरेप के बाद हत्या: घटना की पूरी कहानी

    घटना का विवरण

    साहेबगंज में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। एक 8 साल की मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया है। यह अमानवीय घटना तब घटित हुई जब बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी। चार आरोपियों ने बच्ची को बहला-फुसला कर एक सुनसान जगह ले गए।

    आरोपियों में से तीन नाबालिग हैं, जो इस घटना को अंजाम देने में शामिल थे। घटना के बाद, बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद, आरोपियों ने बच्ची के शव को छिपाने की कोशिश की।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए विभिन्न टीमों का गठन किया और जल्द ही उन्हें हिरासत में ले लिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में रोष और दुख की लहर फैला दी है।

    इस हृदय विदारक घटना ने समाज में बाल सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्ची के परिवार वालों का दुख और गुस्सा देखने लायक है। उन्होंने न्याय की मांग की है और आरोपियों को कड़ी सज़ा दिलवाने की अपील की है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन और सरकार ने भी इस मामले में सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने समाज में बाल सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर उजागर कर दिया है, और इस दिशा में और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

    पुलिस की कार्रवाई

    घटना की सूचना मिलते ही साहेबगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। इसके बाद, आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें तुरंत हिरासत में लिया गया।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया, जो इस मामले की पूरी तरह से जांच करेगी। जांच टीम ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उनके बयानों को दर्ज किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान, पुलिस ने आरोपियों से घटना की पूरी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की है और अपराध के पीछे के कारणों को समझने का प्रयास किया है।

    आगे की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं सख्ती से पालन की जाएंगी। फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची और सभी महत्वपूर्ण सबूतों को एकत्रित किया।

    इसके अतिरिक्त, पुलिस ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर इस घटना की निंदा की और जनता से धैर्य बनाए रखने की अपील की। पुलिस ने वादा किया है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी और न्याय की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

    पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई ने जनता को यह विश्वास दिलाया है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तत्पर है। आगे की जांच और कानूनी कार्रवाइयों पर पुलिस ने जनता को समय-समय पर जानकारी देने का भी आश्वासन दिया है।

    समाज की प्रतिक्रिया

    साहेबगंज में 8 साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और हत्या की घटना ने समाज में गहरा आक्रोश और दुख पैदा कर दिया है। इस भयावह घटना के खिलाफ स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों ने अपनी नाराजगी और शोक व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। गांव के लोग इस बर्बरता के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं, और इस घटना के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।

    स्थानीय संगठनों ने भी इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई संगठनों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाए हैं और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। महिलाएं और बच्चे भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, और उन्होंने सुरक्षित समाज की मांग को लेकर रैलियां निकाली हैं।

    सोशल मीडिया पर भी इस घटना के प्रति भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इस घटना की निंदा करते हुए लोग एकजुट हो रहे हैं और #JusticeForVictim जैसे हैशटैग का उपयोग कर रहे हैं। इस घटना पर सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने का वादा किया है।

    विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इन संगठनों ने पीड़ित बच्ची के परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करने और समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर जोर दिया है।

    समाज के विभिन्न वर्गों की इस तरह की एकजुटता और प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में व्यापक स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है। लोगों की नाराजगी और दुख को देखते हुए प्रशासन को इस मामले में तुरंत और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

    भविष्य की चुनौतियां और समाधान

    साहेबगंज में 8 साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेप और हत्या की घटना ने समाज के सामने एक गंभीर चुनौती पेश की है। बच्चों की सुरक्षा और नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराधों पर गहन विचार और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सबसे पहले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। स्कूलों, खेल के मैदानों, और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी को बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, बच्चों में आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जा सकता है।

    नाबालिग अपराधियों को सुधारने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इन्हें सुधारने के लिए काउंसलिंग, शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों की व्यवस्था करनी होगी। नाबालिगों को समाज के जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करना आवश्यक है। इसके लिए सरकार और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करना होगा, ताकि नाबालिगों की संवेदनशीलता को समझते हुए उन्हें सही मार्ग पर लाया जा सके।

    इसके अतिरिक्त, कानूनी ढांचे में भी सुधार की आवश्यकता है। बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़े कानून बनाना और उन्हें सख्त सजा देना आवश्यक है। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और वे ऐसे जघन्य अपराध करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसके अलावा, समाज में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाए जा सकते हैं।

    समाज में बच्चों की सुरक्षा और नाबालिग अपराधियों के सुधार के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। अगर हम सभी मिलकर इन समस्याओं का समाधान ढूंढें और ठोस कदम उठाएं, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

  • खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर पर कनाडा की खुल गई कलई, भरी सभा में होना पड़ा बेइज्जत

    खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर पर कनाडा की खुल गई कलई, भरी सभा में होना पड़ा बेइज्जत

    परिचय

    हरदीप सिंह निज्जर एक खालिस्तानी आतंकी है जो वर्तमान में कनाडा में सक्रिय है। खालिस्तानी आंदोलन का समर्थक, निज्जर का नाम अक्सर आतंकवादी गतिविधियों और हिंसक अभियानों से जोड़ा जाता है। उसकी प्रमुख भूमिका खालिस्तान के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर है, जिसे वह हिंसक तरीकों से हासिल करना चाहता है। निज्जर ने कई बार अपने विवादास्पद विचारों और गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

    निज्जर के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचना, हिंसक हमलों का संचालन करना, और मासूम लोगों की जान लेना शामिल है। भारत सरकार ने उसे कई मामलों में वांछित घोषित किया है, और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। इसके बावजूद, निज्जर कनाडा में अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए है, जहां उसे स्थानीय खालिस्तानी समर्थकों से समर्थन मिलता है।

    कनाडा में निज्जर की सक्रियता कई कारणों से महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें से कुछ खालिस्तानी विचारधारा के समर्थक हो सकते हैं। दूसरा, कनाडा की उदार आव्रजन नीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निज्जर जैसे व्यक्तियों को अपनी गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति देती है। इसके अलावा, कनाडा में निज्जर को राजनीतिक शरण भी मिल चुकी है, जिससे वह अपने अभियान को अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ चला सकता है।

    इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, हरदीप सिंह निज्जर का परिचय हमें उसकी गतिविधियों और उद्देश्यों को समझने में मदद करता है, जो न केवल कनाडा बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करते हैं।

    कनाडा की वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड पर सवाल

    कनाडा की वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने उनसे एक ऐसा सवाल पूछा जिसने कनाडा की नीति की दोहरी प्रकृति को उजागर कर दिया। यह सवाल खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के संदर्भ में था। पत्रकार ने फ्रीलैंड से पूछा कि कनाडा कैसे एक ओर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का दावा कर सकता है, और दूसरी ओर खालिस्तानी आतंकवादियों को अपने देश में पनाह दे सकता है। इस सवाल ने कनाडा की सरकार की आतंकवाद के खिलाफ नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

    इस सवाल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छवि और उसकी आतंकवाद विरोधी नीति के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। फ्रीलैंड की प्रतिक्रिया ने भी इस मामले को और जटिल बना दिया। उन्होंने शुरुआत में इस सवाल को टालने की कोशिश की, लेकिन पत्रकार की बार-बार की गई पूछताछ के बाद उन्हें जवाब देने पर मजबूर होना पड़ा।

    फ्रीलैंड ने अपने जवाब में कहा कि कनाडा हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रहा है और रहेगा, लेकिन उनकी यह बात पत्रकार को संतुष्ट नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कनाडा में हर किसी को अपने विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह बात भी सवाल के मूल मुद्दे को हल नहीं कर सकी।

    इस घटना ने कनाडा की नीति की दोहरी प्रकृति को और उजागर कर दिया, जिससे न केवल कनाडा की सरकार, बल्कि उसकी पूरी आतंकवाद विरोधी रणनीति पर भी सवाल उठने लगे। इस प्रकार, यह सवाल और फ्रीलैंड की प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा की छवि को प्रभावित किया और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीतियों पर एक नई बहस को जन्म दिया।

    कनाडा की दोहरी नीति पर चर्चा

    कनाडा की दोहरी नीति का मसला हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काफी चर्चा का विषय बन चुका है। एक ओर, कनाडा आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा करता है और वैश्विक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता दिखाता है। वहीं दूसरी ओर, खालिस्तानी आतंकियों को पनाह देने की उसकी नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह विरोधाभास न केवल कनाडा की छवि को धूमिल करता है, बल्कि उसकी नीतिगत विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।

    खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में लिप्त कई आतंकियों को कनाडा में सुरक्षित पनाह मिली हुई है। इनमें से एक प्रमुख नाम हरदीप सिंह निज्जर का है, जिसे कनाडा सरकार ने संरक्षण दिया हुआ है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब कनाडा आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंचों पर अपनी प्रतिबद्धता जताता है।

    कनाडा की इस नीति का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारत जैसे देशों ने कनाडा की इस दोहरी नीति पर कड़ा विरोध जताया है। इससे कनाडा और भारत के संबंधों में तनाव पैदा हुआ है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी कनाडा की इन नीतियों को लेकर आलोचना हो रही है।

    कनाडा की इस दोहरी नीति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक प्रमुख कारण कनाडा के राजनीतिक समीकरण हो सकते हैं, जहां खालिस्तानी समर्थक समुदाय का प्रभाव देखा गया है। इसके अलावा, मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भी कनाडा ने खालिस्तानी आतंकियों को पनाह दी है।

    इस तरह, कनाडा की दोहरी नीति ने न केवल उसकी विश्वसनीयता को आघात पहुंचाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी स्थिति को कमजोर किया है। यह महत्वपूर्ण है कि कनाडा अपनी नीतियों में स्पष्टता लाए और आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करे।

    भविष्य के संकेत और निष्कर्ष

    हरदीप सिंह निज्जर पर हुए हालिया घटनाक्रम ने कनाडा की राजनीति और भारत-कनाडा संबंधों पर गहरा प्रभाव डाला है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद के मुद्दे को गंभीरता से लेना आवश्यक है। कनाडा को अपनी सुरक्षा नीतियों में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हो सकें।

    भारत और कनाडा के बीच संबंधों पर इस मामले का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा। इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश जा सकता है।

    इस घटना से यह भी सीखने को मिलता है कि आतंकवाद का कोई धर्म, जाति या राष्ट्रीयता नहीं होती। इसे रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझा रणनीतियों की आवश्यकता है। कनाडा को भारत के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा ताकि दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस मामले के समाधान के लिए दोनों देशों को संवाद बढ़ाना होगा और आपसी विश्वास को मजबूत करना होगा। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाना जरूरी है ताकि वैश्विक समुदाय का सहयोग प्राप्त हो सके।

    अंततः, हरदीप सिंह निज्जर पर हुए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना समय की मांग है। इसके लिए दोनों देशों को अपनी नीतियों में सुधार करते हुए एक साझा रणनीति अपनानी होगी जिससे न केवल आतंकवाद पर नियंत्रण पाया जा सके, बल्कि भारत-कनाडा संबंधों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

  • आग लगने की घटना से बचाव एवं घटना हो जाने पर त्वरित कार्रवाई कर जान माल की सुरक्षा कैसे की जाए इसकी प्रायोगिक प्रशिक्षण दी गई

    आग लगने की घटना से बचाव एवं घटना हो जाने पर त्वरित कार्रवाई कर जान माल की सुरक्षा कैसे की जाए इसकी प्रायोगिक प्रशिक्षण दी गई

    आग लगने की घटना से बचाव एवं घटना हो जाने पर त्वरित कार्रवाई कर जान माल की सुरक्षा कैसे की जाए इसकी प्रायोगिक प्रशिक्षण दी गई

    भगवती कॉलोनी चास स्थित फर्स्ट  एड प्रशिक्षण संस्थान में फायर सेफ्टी मैनेजमेंट प्रशिक्षण का आयोजन किया  गया

    बोकारो : चास नगर निगम स्थित भगवती कॉलोनी चास स्थित फर्स्ट  एड प्रशिक्षण संस्थान में फायर सेफ्टी मैनेजमेंट प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन रेड क्रॉस के  प्रशिक्षण पदाधिकारी सह सिविल डिफेंस बोकारो के डिवीजनल वार्डन डॉक्टर एस पी वर्मा एवं चास फायर स्टेशन के पदाधिकारी सुदामा पासवान ने किया। कार्यक्रम में आग लगने की घटना से बचाव एवं घटना हो जाने पर त्वरित कार्रवाई कर जान माल की सुरक्षा कैसे की जाए इसकी प्रायोगिक प्रशिक्षण दी गई। प्रशिक्षण में ओ एन जी सी के तहत संविदा पर कार्य करने वाले पदाधिकारी एवं कर्मचारी तथा खनन अभियंताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिविल डिफेंस बोकारो के डिवीजनल वार्डन तथा रेड क्रॉस के  प्रशिक्षण पदाधिकारी डॉ एस पी वर्मा ने आग लगी घटना में होने वाले घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने के गुरु उपायों को बताया। फायर स्टेशन के पदाधिकारी सुदामा पासवान ने विभिन्न प्रकार की आग लगी घटनाओं को प्रदर्शित कर एवं आग बुझाकर दिखाए एवं सिविल डिफेंस बोकारो के डिप्टी डिवीजनल वार्डन सह रेड क्रॉस के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के सदस्य डॉक्टर निशांत कुमार ने आग से बचने के उपाय को विस्तृत रूप से बताया। कार्यक्रम में विशेष रूप से डॉक्टर पूजा, डॉक्टर पदमा एवं फायर स्टेशन चास के श्री विनोद जी एवं राज झा तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संगठन के गगन बावरी एवं आकाश अस्पताल चास के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों ने सहयोग कर आयोजन को सफल बनाय.
  • बंगाल की ‘लक्ष्मी भंडार’ की तर्ज पर झारखंड सरकार लाएगी योजना: महिलाओं के खाते में सीधे जाएंगे पैसे

    बंगाल की ‘लक्ष्मी भंडार’ की तर्ज पर झारखंड सरकार लाएगी योजना: महिलाओं के खाते में सीधे जाएंगे पैसे

    परिचय: नई योजना का उद्देश्य

    झारखंड सरकार ने पश्चिम बंगाल की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की तर्ज पर एक नई योजना लाने की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण स्तर में सुधार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

    इस योजना के तहत, महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे जमा किए जाएंगे, जिससे वे अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर निर्णय ले सकें। वित्तीय स्वतंत्रता के माध्यम से, महिलाएं अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक साधनों तक पहुंच प्राप्त करेंगी। यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार करेगी, बल्कि उनके सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।

    झारखंड सरकार का यह कदम महिलाओं के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास है। कई अध्ययन और शोध यह दर्शाते हैं कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो पूरे परिवार और समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस योजना के माध्यम से, सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने बयान में कहा कि झारखंड सरकार का यह प्रयास महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए है। इस योजना से महिलाओं को न केवल वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान भी प्राप्त होगा। आर्थिक प्रोत्साहन के साथ, राज्य सरकार महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगी, जिससे समाज में व्यापक बदलाव संभव हो सके।

    महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव

    महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने से उनके सामाजिक और पारिवारिक स्थिति में सुधार होता है। झारखंड सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके परिवार में निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करना है। आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं अपने परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकेंगी, जिससे उनके आत्मसम्मान और सामाजिक स्थिति में भी वृद्धि होगी।

    इस योजना के तहत, महिलाओं को वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी, जो उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहतर ध्यान देने में सक्षम बनाएगी। जब महिलाएं अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होती हैं, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास का विकास होता है, जो उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार की योजनाएं न केवल महिलाओं की स्थिति में सुधार लाती हैं, बल्कि पूरे समुदाय और समाज की उन्नति में भी सहायक सिद्ध होती हैं।

    इस योजना के कार्यान्वयन से महिलाओं के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा का अनुभव होगा, जो उन्हें और अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगी। इसके अलावा, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने से आने वाली पीढ़ियों में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। यह योजना झारखंड में महिला सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार

    झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तावित इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और उनके परिवारों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार करना है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली महिलाएँ अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होंगी। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करेगी।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में, वित्तीय सहायता से महिलाएँ और उनके परिवार अपने स्वास्थ्य देखभाल पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और आवश्यक चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी। इससे न केवल महिलाओं की सेहत में सुधार होगा, बल्कि उनके बच्चों की भी सेहत में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    पोषण के क्षेत्र में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने से महिलाएँ अपने और अपने बच्चों के पोषण संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगी। पौष्टिक आहार की उपलब्धता और सेवन से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

    इस प्रकार, झारखंड सरकार की यह योजना महिलाओं और बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न सिर्फ महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

    योजना का क्रियान्वयन और लाभार्थी चयन

    झारखंड सरकार की नई योजना का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस कार्य योजना बनाई जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों का चयन एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। महिला कल्याण विभाग इस योजना के क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी संभालेगा, जिसमें विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों का सहयोग लिया जाएगा।

    योजना के लाभार्थियों का चयन करने के लिए ग्राम स्तर पर महिला समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों के माध्यम से पात्र महिलाओं की पहचान की जाएगी और उनकी जानकारी एक केंद्रीकृत डेटाबेस में दर्ज की जाएगी। इस प्रक्रिया में प्राथमिकता उन महिलाओं को दी जाएगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिन्हें सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है।

    सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के अनुसार, लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में सीधे धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। इस डिजिटल माध्यम से धनराशि का स्थानांतरण करने से भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी, जिससे योजना का लाभ सीधे और त्वरित रूप से महिलाओं तक पहुँच सकेगा।

    इसके अलावा, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय प्रशासन, पंचायत और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। इस योजना के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता के अलावा विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार अवसरों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।

    इस प्रकार, झारखंड सरकार की यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • योग दिवस के पूर्व संध्या पर सभी सीएचओ को योग प्रशिक्षण

    योग दिवस के पूर्व संध्या पर सभी सीएचओ को योग प्रशिक्षण

    योग दिवस के पूर्व संध्या पर सभी सीएचओ को योग प्रशिक्षण

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सभी सीएचओ को योग प्रशिक्षण दिया गया

    प्रशिक्षक: “योग का मतलब जोड़ना है और यह मनुष्य को दीर्घायु बनाता है”

    बोकारो: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व संध्या पर, बोकारो जिला के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नोडल पदाधिकारी डॉ. सेलिना टूडू की अध्यक्षता में, सभी सीएचओ को योगासन का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मानसिक स्वास्थ्य और तनाव मुक्ति के लिए योग के महत्व पर जोर दिया गया।

    योग प्रशिक्षक स्वपन कुमार, पूनम कुमारी और धरनीधर साहिस ने बताया कि योग का अर्थ जोड़ना है और यह मनुष्य को दीर्घायु बनाता है। उन्होंने वज्रासन, सिद्धासन, वक्रासन, गौमुखासन, हलासन, नौकासन, मकरासन और शवासन जैसे विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया।

    योगासन प्रशिक्षण के पश्चात, तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला परामर्शी मो. असलम ने सभी प्रतिभागियों को तम्बाकू निषेध पर सामूहिक शपथ दिलाई। साथ ही सभी सीएचओ को निर्देश दिया गया कि योग दिवस के अवसर पर अपने-अपने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में योगासन के बाद तम्बाकू और किसी भी नशीली पदार्थ का सेवन न करने की शपथ जरूर आयोजित करें, ताकि बोकारो जिला को नशा मुक्त जिला बनाने की दिशा में अग्रसर किया जा सके।

    प्रशिक्षण में डॉ. सेलिना टूडू, कार्यक्रम प्रबंधक प्रदीप कुमार सिन्हा, जिला कार्यक्रम सहायक आरती कुमारी मिश्रा आदि उपस्थित थे

  • यूजीसी-नेट, नीट विवाद पर संघ में बेचैनी; एबीवीपी बोली- सरकार को जवाब देना चाहिए

    यूजीसी-नेट, नीट विवाद पर संघ में बेचैनी; एबीवीपी बोली- सरकार को जवाब देना चाहिए

    परिचय

    यूजीसी-नेट और नीट की परीक्षाओं में हाल ही में उठे विवादों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए), जो इन परीक्षाओं का संचालन करती है, उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। एनटीए की प्रक्रिया और परीक्षा प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। यह असंतोष अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है, जिससे सरकार और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), जो एक प्रमुख छात्र संगठन है, ने इन विवादों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एबीवीपी का मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर देना चाहिए। इस संगठन ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग की है ताकि छात्रों का विश्वास बहाल किया जा सके।

    इन विवादों की पृष्ठभूमि में कई महत्वपूर्ण घटनाएं शामिल हैं। जैसे कि, कुछ छात्रों ने यूजीसी-नेट और नीट परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के लीक होने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, कई छात्रों ने परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित प्रबंधन की भी शिकायत की है। ये घटनाएं न केवल एनटीए की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की समग्र विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं।

    इस प्रकार, यूजीसी-नेट और नीट विवाद ने शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है। इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा और ठोस कदमों की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न उत्पन्न हों और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

    एनटीए की भूमिका और विश्वसनीयता

    राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की स्थापना 2017 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं जैसे यूजीसी-नेट, नीट, जेईई और अन्य के निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन को सुनिश्चित करना है। एनटीए का गठन शिक्षा मंत्रालय के तहत किया गया और इसे एक स्वायत्त संगठन के रूप में स्थापित किया गया। एनटीए के गठन का मुख्य कारण परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देना था, ताकि छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिल सके और शिक्षा प्रणाली में विश्वास बना रहे।

    एनटीए पर यह जिम्मेदारी है कि वह परीक्षा के हर चरण को, जिसमें परीक्षा का आयोजन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा और परीक्षा परिणाम की घोषणा शामिल है, निष्पक्षता के साथ पूरा करे। एनटीए की महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह देश के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है। एनटीए का उद्देश्य न केवल परीक्षा आयोजन है, बल्कि परीक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और इसके माध्यम से शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देना भी है।

    हालांकि, हाल के विवादों ने एनटीए की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूजीसी-नेट और नीट परीक्षाओं के संचालन में आई समस्याओं ने छात्रों और अभिभावकों में चिंता पैदा कर दी है। परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ियां, प्रश्नपत्रों का लीक होना और परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी घटनाएं एनटीए की कार्यक्षमता पर सवाल उठाती हैं।

    इन विवादों ने एनटीए की विश्वसनीयता पर एक धब्बा लगा दिया है। विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने सरकार से एनटीए की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब देने की मांग की है। एनटीए को अपनी विश्वसनीयता वापस पाने के लिए अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा और छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली का विश्वास दिलाना होगा।

    नीट परीक्षा में गड़बड़ी और एबीवीपी की प्रतिक्रिया

    हाल ही में नीट परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष को जन्म दिया है। इन गड़बड़ियों में परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था, पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों के उदाहरण शामिल हैं। कई छात्रों ने शिकायत की है कि परीक्षा के दौरान उन्हें उचित सुविधाएं नहीं मिलीं, जिसके कारण वे अपनी पूरी क्षमता से प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके अतिरिक्त, कुछ केंद्रों पर पेपर लीक की घटनाएं भी रिपोर्ट की गई हैं, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    इन घटनाओं के मद्देनजर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अपनी चिंता व्यक्त की है। एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव याज्ञवल्क्य शुक्ला ने नीट परीक्षा में गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और ईमानदारी को सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। शुक्ला ने यह भी कहा कि सरकार को इन गड़बड़ियों के कारणों की जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

    एबीवीपी का मानना है कि नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, और इसे रोकने के लिए उचित नीतियों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, परीक्षाओं की निगरानी और संचालन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। शुक्ला ने यह भी सुझाया कि सरकार को छात्रों और अभिभावकों के विश्वास को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि वे आगामी परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें।

    सरकार की जिम्मेदारी और भविष्य की दिशा

    यूजीसी-नेट और नीट विवादों के बीच, सरकार की जिम्मेदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे मुद्दों पर सरकार को न केवल तुरंत और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए भी ठोस रणनीति तैयार करनी चाहिए। वर्तमान में, सरकार ने विभिन्न आयोगों और विशेषज्ञ समितियों का गठन किया है जो इन विवादों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं और उचित समाधान सुझा रहे हैं।

    सरकार की भूमिका इस समय दोहरी है: एक ओर, उसे विवादों का त्वरित समाधान निकालना है, और दूसरी ओर, भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के उपाय भी सुनिश्चित करने हैं। विवादों के समाधान के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता का पालन करना आवश्यक है, जिससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बनी रहे। इसके अतिरिक्त, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली की समीक्षा आवश्यक है। छात्रों को एक समान अवसर प्रदान करने के लिए, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है। इसके साथ ही, शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षा संसाधनों का उचित वितरण, और शिक्षा नीति में समय-समय पर बदलाव भी महत्वपूर्ण हैं।

    सरकार को इन विवादों से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसमें न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान शामिल है, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा। छात्रों के हितों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक सशक्त और स्थायी नीति की आवश्यकता है, जो विवादों को कम कर सके और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ा सके।इस प्रकार, सरकार की जिम्मेदारी न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करना है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और समृद्ध शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है।

  • फुसरो गोलीकांड का पर्दाफाश

    फुसरो गोलीकांड का पर्दाफाश

    फुसरो गोलीकांड का पर्दाफाश

    मोती अलंकार ज्वेलर्स दुकान पर फायरिंग की घटना सुलझी

    बोकारो: फुसरो के मोती अलंकार ज्वेलर्स दुकान पर हुई फायरिंग की घटना का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस संबंध में जानकारी डीआईजी, कोयलांचल एसपी झा ने बोकारो एसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। ज्ञात हो कि 17 मई 2024 को फुसरो बाजार स्थित मोती अलंकार ज्वेलर्स पर अज्ञात अपराधियों ने फायरिंग की थी।

    इसके अलावा, 12 जून 2024 को फुसरो बाजार के ज्ञान ज्वेलर्स पर भी फायरिंग की घटना हुई थी। पुलिस ने इस मामले में कई थानों के क्षेत्र में छापेमारी कर अपराधियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अपराधियों में बिट्टू सोनार, गोलु कुमार सिंह, छोटु कुमार सिंह, अरविंद सोनार और रितुराज कुमार उर्फ बाबु शामिल हैं। इन सभी ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।

    गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, पिस्टल, गोली, नगद राशि, मोबाइल फोन और घटना के समय पहने हुए कपड़े बरामद किए गए। अभी तक के अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि सभी अभियुक्त प्रिंस खान गिरोह, धनबाद के लिए कार्य करते हैं।

    छापामारी दल में पुलिस उप-महानिरीक्षक कोयला क्षेत्र बोकारो के निकट अनुश्रवण में पुलिस अधीक्षक बोकारो द्वारा गठित एसआईटी टीम और एटीएस टीम के सदस्य शामिल थे। अभियुक्तों के पास से पिस्तौल, गोली, मोटरसाइकिल, हेलमेट, मोबाइल फोन, नगद राशि और घटना के दौरान पहने हुए कपड़े बरामद किए गए हैं। विशेष अनुसंधान टीम साक्ष्य संकलन करते हुए आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • सड़क दुर्घटना में दो की मौत, दो घायल, मुआवजा के लिए रोड जाम

    सड़क दुर्घटना में दो की मौत, दो घायल, मुआवजा के लिए रोड जाम

    सड़क दुर्घटना में दो की मौत, दो घायल, मुआवजा के लिए रोड जाम

    एस डी ओ, डी एस पी के साथ वार्ता जारी

    चंदनकियारी: सियालजोरी थाना क्षेत्र के सियालजोरी बनगडिया पथ के बांधवाटांड़ में एक ट्रेकर की चपेट में आने से मोपेड सवार एक चार वर्षीय बालक और एक वृद्ध की मौत हो गई। इस हादसे में दो अन्य लोग घायल हो गए, जिनमें से एक बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में चंदाहा निवासी 65 वर्षीय गुलाल अंसारी और उनके पौता एहसान अंसारी (5 वर्ष) शामिल हैं।

    घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने थाना के सामने रोड जाम कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एस डी ओ चास ओम प्रकाश गुप्ता और डी एस पी प्रवीण कुमार सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मृतकों के परिजनों को समझाने में जुटे हुए थे। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को पचास हज़ार रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, परिजन मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर अड़े रहे।

    घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि मृतक गुलाल अंसारी अपने बेटी रेशमा बीबी (32) और दो बच्चों, एहसान अंसारी (5) और आयात परवीन (7), को मोपेड में लेकर चंदनकियारी से घर आ रहे थे। सियालजोरी के बांधवाटाड में विपरीत दिशा से आ रही ट्रेकर ने उनकी मोपेड को सीधा टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही एहसान अंसारी की मौत हो गई। घायल गुलाल अंसारी और आयात परवीन को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान गुलाल अंसारी की भी मौत हो गई। आयात परवीन की हालत गंभीर बनी हुई है।

    सूचना पाकर सियालजोरी पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और बनगड़िया गांव से ट्रेकर को जब्त कर थाने ले आई। घटना के बाद मृतकों के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में सियालजोरी थाना पहुंचे और सड़क जाम कर दिया। इस दौरान रह-रहकर बवाल होता रहा। लोगों ने मुआवजे की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल को भी तैनात किया गया है। समाचार लिखे जाने तक एसडीएम चास, डीएसपी चास, सीओ चंदनकियारी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर मौजूद थी।

    घटना में मृतक गुलाल अंसारी अपने बेटी और उसके बच्चों को चंदनकियारी से घर ला रहे थे। उनकी बेटी रेशमा बीबी की ससुराल संथालडीह के कांकीबजार में है। जब्त ट्रेकर स्कूल के बच्चों को छोड़कर लौट रहा था।