नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन और 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों पर कहा कि यदि हजारों प्रदर्शनकारियों के बीच पैलेट गन चलाई गई होती तो बड़ी संख्या में लोग घायल होते।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर रिजिजू का तर्क
रिजिजू ने कहा कि पैलेट गन से एक साथ कई पैलेट निकलते हैं। ऐसे में यदि हजारों लोगों के बीच इसका इस्तेमाल किया गया होता तो बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को चोट लगती।
- उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के घायल होने की स्थिति में यह भी देखना जरूरी है कि वह किन परिस्थितियों में घायल हुआ।
- रिजिजू के मुताबिक, 4-5 हजार लोगों की भीड़ में पैलेट गन चलने पर 300-400 लोग घायल हो सकते थे।
- उन्होंने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए मामले की पूरी जांच जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों के घायल होने की रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान एक 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी के शरीर पर करीब 20 पैलेट के घाव मिले थे। उसकी पीठ और कोहनी पर चोट के निशान बताए गए। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी की आंख में गंभीर चोट लगने की भी जानकारी सामने आई थी।
इन रिपोर्टों के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं याचिकाएं
रिजिजू ने कहा कि पैलेट गन के कथित इस्तेमाल से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। अदालत मामले की जांच करेगी, इसलिए फिलहाल इस मुद्दे पर कोई अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कश्मीर समेत विभिन्न इलाकों में पैलेट गन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।
30-40 हजार लोगों के मार्च का दावा
रिजिजू ने दावा किया कि संसद मार्च के दौरान करीब 30-40 हजार लोग एक साथ आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
उनके मुताबिक, यदि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे हों तो उन्हें रोकने के लिए परिस्थितियों के अनुसार पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ सकता है। उन्होंने संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इतनी बड़ी भीड़ को पुलिस ने नियंत्रित किया।

