रांची। नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, राजस्व दस्तावेजों के गायब होने और दाखिल-खारिज में कथित अनियमितता के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही 28 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में एफआईआर से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
मुख्य बिंदु :
- नामकुम अंचल में राजस्व रिकॉर्ड गायब होने का मामला
- म्यूटेशन में कथित अनियमितता को लेकर हाईकोर्ट में याचिका
- एसीबी की प्रारंभिक जांच में अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता के संकेत
- हाईकोर्ट ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का दिया निर्देश
- 28 अगस्त को एसीबी को सीलबंद रिपोर्ट पेश करनी होगी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान एसीबी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने बताया कि नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने की शिकायत पर प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने की अनुमति कैबिनेट सचिव से मिली थी। इसके बाद एसीबी ने पीई दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान प्रथम दृष्टया नामकुम अंचल के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने की बात अदालत को बतायी गयी। एसीबी की दलील सुनने के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
म्यूटेशन मामले में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने का आरोप
यह मामला राजस्व दस्तावेजों के गायब होने और दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। प्रार्थी थॉमस साइमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि नामकुम अंचल कार्यालय में म्यूटेशन के एक मामले में गंभीर अनियमितता की गयी। उन्होंने मामले की जांच के लिए मूल राजस्व अभिलेख मांगे थे, लेकिन उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
विवादित जमीन नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित बतायी गयी है। पूर्व की सुनवाई के दौरान भी अदालत के समक्ष यह बात आयी थी कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में लगातार टालमटोल कर रहा था।
हाईकोर्ट के आदेश का भी नहीं हुआ पालन
अदालत के पूर्व में स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद अंचल अधिकारियों द्वारा उसका अनुपालन नहीं किए जाने का मामला भी सामने आया था। हाईकोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी कथित अनियमितता को प्रथम दृष्टया गंभीर माना था। इसके बाद पूरे मामले की जांच एसीबी को सौंपी गयी।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता जेजे सांगा ने अदालत में पक्ष रखा। अब मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी, जिसमें एसीबी को एफआईआर और जांच से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट पेश करनी होगी।

