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साइबर अपराध पर कार्रवाई तेज, लेकिन केस निपटाने में पिछड़ा झारखंड; 2,379 मामले अब भी लंबित

रांची। झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद मामलों के निपटारे की धीमी रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। केंद्र स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक राज्य में साइबर अपराध से जुड़े 2,730 मामलों में सिर्फ 351 मामलों का निपटारा हो सका है। वहीं 2,379 मामले अभी भी लंबित हैं।

आंकड़ों में क्या सामने आया?

  • कुल मामले: 2,730
  • निपटाए गए मामले: 351
  • लंबित मामले: 2,379
  • निपटारे की दर: 12.85 प्रतिशत
  • गिरफ्तारियां: 337
  • 1930 हेल्पलाइन: साइबर ठगी की शिकायतों के लिए राज्य में संचालित
  • Lien कार्रवाई: ठगी की रकम रोकने का औसत प्रतिशत 17.23 फीसदी

ठगी की रकम रोकना अब भी बड़ी चुनौती

साइबर फ्रॉड के बाद ठगी की रकम को बैंक खाते में रोकना पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौतियों में शामिल है। समीक्षा के अनुसार झारखंड में Lien की औसत कार्रवाई 17.23 प्रतिशत रही है।

साइबर ठगी में रकम कुछ ही समय में कई बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर हो सकती है। ऐसे में शिकायत मिलने के शुरुआती घंटों में पुलिस और बैंकिंग सिस्टम के बीच तेज समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

रांची समेत चार जिले बने हॉटस्पॉट

समीक्षा में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर को साइबर अपराध से जुड़े म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध गतिविधियों के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की शिकायतें
  • साइबर ठगी की रकम निकालने के लिए ATM का इस्तेमाल
  • संदिग्ध बैंकिंग गतिविधियों पर निगरानी की जरूरत

इन इलाकों में साइबर अपराध के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

337 गिरफ्तारियां, फिर भी लंबित मामलों का दबाव

पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 337 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं समन्वय प्लेटफॉर्म पर 109 मामले दर्ज किए गए हैं।

हालांकि गिरफ्तारी के बाद भी बड़ी संख्या में मामलों का लंबित रहना बताता है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है।

तकनीकी कार्रवाई में भी बैकलॉग

साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए मोबाइल और IMEI ब्लॉकिंग जैसी तकनीकी कार्रवाई अहम है। समीक्षा में इनसे जुड़े लंबित मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

यानी पुलिस के सामने सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि तकनीकी सिस्टम में मौजूद बैकलॉग को कम करना और डिजिटल संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल भी जरूरी है।

NetGrid के इस्तेमाल पर भी सवाल

साइबर जांच और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए इस्तेमाल होने वाले NetGrid में भी सक्रियता की कमी सामने आई है।

  • कुल NetGrid यूजर्स: 49
  • सक्रिय यूजर्स: 26
  • निष्क्रिय यूजर्स: 23

13 मार्च 2026 को NetGrid के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर राज्य स्तर पर कार्यशाला भी आयोजित की गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में यूजर्स का सक्रिय नहीं होना तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े करता है।

सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, केस का निपटारा भी जरूरी

झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा।

अब पुलिस के सामने मुख्य चुनौती है कि लंबित मामलों की जांच तेजी से पूरी हो, ठगी की रकम को शुरुआती स्तर पर रोका जाए, तकनीकी प्रणालियों का पूरा इस्तेमाल हो और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।

2,730 मामलों में सिर्फ 351 का निपटारा और 2,379 मामलों का लंबित रहना साफ संकेत देता है कि साइबर अपराध के खिलाफ अगली बड़ी लड़ाई केस निपटारे की गति बढ़ाने की है।

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